प्रतीकात्मक तस्वीर
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अस्पतालों पर बढ़ता बोझ
सरकार दावा करती है कि वो सभी प्रभावित लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करा रही है, लेकिन बिस्तरों की कमी की वजह से सैकड़ों लोगों को अस्पतालों से लौटाए जाने की खबरें आती रही हैं। अब अपने सामर्थ्य के हिसाब से लोग अन्य विकल्पों की तलाश कर रहे हैं, जैसे कुछ लोग अपने ही घर में प्राइवेट इलाज करा रहे हैं। लगातार बढ़ते मामलों और अस्पतालों पर पड़ते दबाव की वजह से ही शायद केंद्र सरकार ने ये निर्देश दिया है कि 'कोविड-19 के एसिम्पटोमैटिक और सिंप्टोमेटिक मरीजों को जल्द से जल्द क्वारंटीन किए जाने की जरूरत है।'
सरकार ने अपने आइसोलेशन वार्ड बढ़ाने के लिए कई होटलों, स्पोर्ट्स स्टेडियम और यहां तक कि रेल सेवा को अपने नियंत्रण में ले लिया है, लेकिन जिन परिवारों में एक या एक से ज्यादा सदस्य पॉजिटिव हैं, वो होम फैसिलिटी के विकल्प पर विचार कर रहे हैं। कोरोना से ठीक हो चुके एक 56 वर्षीय मरीज की बेटी भारती सिंह कहती हैं, 'घर में ही आईसीयू सेट-अप लगाना एक अच्छा फैसला था, क्योंकि मैं अपने पिता के स्वास्थ्य पर नजर रख सकती थी। इसमें अस्पताल में जाने का रिस्क जुड़ा हुआ नहीं था।'
उन्हें लगता है कि 'अस्पतालों के कोविड-19 वार्ड में सैकड़ों मरीज होते हैं, और सभी पर ध्यान देना होता है, सभी को वक्त देना होता है, ऐसे में संक्रमण बढ़ने का खतरा भी होता है।'