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Vibrio Vulnificus: कोरोना के बाद अब इस जानलेवा संक्रमण को लेकर चेतावनी, अमेरिका में कई लोगों की मौत

Fri, 08 Sep 2023 06:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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विब्रियो वल्निकस संक्रमण के मामले - फोटो : istock
कोरोना, पिछले तीन साल से वैश्विक स्तर पर गंभीर स्वास्थ्य जोखिम बना हुआ है, इसका खतरा अभी कम नहीं हुआ है। कई देशों में ओमिक्रॉन के एरिस (EG.5.1) और पिरोला (BA.2.86) जैसे वैरिएंट के कारण पिछले एक महीने में तेजी से संक्रमण के मामले बढ़ते हुए देखे गए हैं। नए वैरिएंट्स के कारण अस्पताल में संक्रमितों और यहां तक कि मरने वालों की संख्या भी बढ़ती हुई देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को कोरोना संक्रमण के खतरे को लेकर अलर्ट रहने की सलाह देते हैं। 

इस बीच सेंटर्स फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) वैज्ञानिकों ने हालिया रिपोर्ट में एक नए संक्रमण के बढ़ते मामलों के लेकर अलर्ट किया है। सीडीसी विशेषज्ञों ने कहा, संयुक्त राज्य अमेरिका के कई हिस्सों में विब्रियो वल्निकस नाम के बैक्टीरिया के कारण संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ते देखे गए हैं, इस साल इस बैक्टीरिया से संक्रमण के कारण 13 लोगों की मौत भी हो चुकी है। लगभग 200 अमेरिकी हर साल विब्रियो वल्निकस के संक्रमण के शिकार होते हैं और उनमें से लगभग पांच लोगों की मौत हो जाती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को इस संक्रमण से बचाव के लिए प्रयास करते रहने की आवश्यकता है। आइए इस बैक्टीरिया और संक्रमण से होने वाले जोखिमों के बारे में जानते हैं।
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विब्रियो वल्निकस बैक्टीरिया - फोटो : Pixabay
विब्रियो वल्निकस संक्रमण के बारे में जानिए

विब्रियो वल्निकस बैक्टीरिया इंसानों में घातक संक्रमण का कारण बन सकता है। यह कच्चे या अधपके मांस खाने से त्वचा में घाव का कारण बनता है। संक्रमण के लक्षण बहुत तेजी से विकसित होने शुरू होते हैं और इसके कारण बुखार, लो ब्लड प्रेशर की समस्या के साथ दर्दकारक छाले हो सकते हैं। अगर आपको लगता है कि आपको विब्रियो वल्निकस का संक्रमण हुआ है तो तुरंत इस बारे में विशेषज्ञ की सलाह ली जानी चाहिए, यह गंभीर और जानलेवा भी हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, संक्रमितों को इंटेंसिव केयर की जरूरत हो सकती है और संक्रमण बढ़ने की स्थिति में अंग विच्छेदन की आवश्यकता हो सकती है। 
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संक्रमण की समस्या - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं सीडीसी विशेषज्ञ?

अमेरिका के कुछ हिस्सों में बढ़ते संक्रमण को देखते हुए सीडीसी विशेषज्ञ कहते हैं, वी. वल्निकस का इंक्यूवेशन पीरियड काफी कम होता है और यह त्वचा और ऊतकों में नेक्रोटाइजिंग संक्रमण का कारण बन सकता है। सीडीसी ने कहा कि बाढ़, तूफान और महामारी जैसी चरम मौसम संबंधी घटनाएं इस संक्रमण के बढ़ने का कारण हो सकती हैं।

सीडीसी का कहना है कि बैक्टीरिया मई से अक्टूबर के महीने में तेजी से बढ़ता है, समुद्री वातावरण वाले हिस्सों में इस संक्रमण के बढ़ने और लोगों को बीमार करने का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 

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विब्रियो वल्निकस संक्रमण की आशंका - फोटो : iStock
विब्रियो वल्निकस के जोखिम कारक

कुछ विशेष स्थितियों वाले लोगों को बैक्टीरिया के संपर्क में आने पर विब्रियो वल्निकस संक्रमण होने की आशंका अधिक होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यदि आपको सिरोसिस सहित लिवर की बीमारियां रही हैं, क्रोनिक किडनी डिजीज है, मधुमेह के शिकार रहे हैं या फिर ऐसी किसी बीमारी से पीड़ित हैं जो आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली को कमजोर करती है तो इसके कारण आपमें संक्रमण और इसके कारण गंभीर रोग विकसित होने का खतरा अधिक हो सकता है।

कुछ अध्ययनकर्ताओं ने यह भी पाया है कि महिलाओं की तुलना में पुरुषों में इस बैक्टीरिया के कारण संक्रमण होने और इसके जोखिमों का खतरा अधिक देखा जाता रहा है। 
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समुद्री भोजन को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Pixabay
बचाव के लिए करते रहिए प्रयास

डॉक्टर कहते हैं, कुछ सामान्य से देखभाल वाले उपायों का पालन करके आप संक्रमण के खतरे को कम कर सकते हैं। कच्चे या अधपके मांस, विशेषकर समुद्री मछलियों का सेवन कम करें। यदि आपकी त्वचा पर कोई घाव है या आपने हाल ही में टैटू या सर्जरी कराई है तो समुद्री जल और खारे पानी के संपर्क से बचें। समुद्र के आसपास रहने वाले लोगों में इस संक्रमण के होने का खतरा अधिक होता है, ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।




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स्रोत और संदर्भ
Severe Vibrio vulnificus Infections in the United States Associated with Warming Coastal Waters

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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