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सावधान: चावल खाने से हो सकता है कैंसर..! पढ़ें ये खबर

Mon, 20 Sep 2021 10:34 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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चावल खाने से कैंसर का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
हम सभी के घरों में भोजन में चावल का विशेष महत्व है। उत्तर से लेकर दक्षिण भारत तक, हर जगह चावल बड़े ही चाव से खाया जाता है। चावल कार्बोहाइड्रेट का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है जो शरीर को ऊर्जा प्रदान करने के लिए बहुत आवश्यक होता है। हालांकि डायबिटीज और मोटापा जैसी कई बीमारियों के शिकार लोगों को चावल का सेवन कम करने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि चावल का ज्यादा सेवन ब्लड शुगर के स्तर और मोटापे के खतरे को बढ़ा सकता है। इस बारे में हम सभी लंबे समय से पढ़ते आ रहे हैं, पर क्या चावल कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का भी कारण बन सकता है? अगर यह सुनकर आप भी चौंक गए हैं तो रुकिए, असल में हाल ही में किए गए एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने दावा किया है कि कुछ स्थितियों में चावल, कैंसर के खतरे का कारण बन सकता है।
इंग्लैंड स्थित क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के शोधकर्ताओं ने अपने हालिया शोध में बताया है कि यदि आप चावल को बिना ठीक से पकाए ही खा रहे हैं तो यह काफी नुकसानदायक हो सकता है। कुछ स्थितियों में यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का भी कारण बन सकता है। आइए इस अध्ययन के बारे में आगे की स्लाइडों में विस्तार से जानते हैं।
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चावल खाने से शरीर को होने वाले नुकसान - फोटो : Pixabay
चावल से कैंसर का खतरा
वैज्ञानिकों ने अपने हालिया अध्ययन के दौरान पाया कि जिस तरह से खेतों में फसल की उपज बढ़ाने के लिए बहुतायत मात्रा में खाद और रसायनों का प्रयोग किया जा रहा है, उससे सेहत को काफी नुकसान पहुंच सकता है। औद्योगिक विषाक्त पदार्थ और कीटनाशक, मिट्टी को काफी जहरीला बनाते जा रहे हैं। ऐसे में इससे उपजने वाले खाद्य पदार्थों में भी इसके अंश हो सकते हैं। यही कारण है कि चावल को हमेशा अच्छे से धोकर और पकाकर ही खाना चाहिए। 
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चावल में हो सकते हैं कई तरह के रसायन - फोटो : Pixabay
आर्सेनिक रसायन हो सकता है बेहद खतरनाक
अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि कई तरह के औद्योगिक कीटनाशकों को बनाने के लिए आर्सेनिक रसायन का प्रयोग किया जाता है। यह रसायन मिट्टी में लंबे समय तक बने रहते हैं जिसका असर उस फसल पर भी हो सकता है। अगर हम लंबे समय तक भोजन या पानी के माध्यम से इस रसायन के संपर्क में रहते हैं, तो इससे आर्सेनिक विषाक्तता भी हो सकती है। इससे उल्टी, पेट दर्द, दस्त और यहां तक कि कैंसर का भी खतरा बढ़ जाता है। अध्ययन के अनुसार, चावल में आर्सेनिक का स्तर अधिक हो सकता है, ऐसे में यदि इसे ठीक से नहीं पकाया जाए, तो यह भविष्य में स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का कारण बन सकता है।

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चावल खाने से हो सकता है कैंसर का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
कई अध्ययनों में बताया गया है  इसका खतरा
इसके पहले भी चावल से सेहत पर होने वाले प्रभावों को जानने के लिए किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने लोगों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों का दावा है कि चावल से कार्सिनोजेन का खतरा हो सकता है जो शरीर में कैंसर की समस्याओं का बढ़ावा दे सकती है। कार्सिनोजेन एक ऐसा एजेंट है जो मनुष्यों में कैंसर पैदा करने की क्षमता रखता है। कार्सिनोजेन्स प्राकृतिक हो सकते हैं और अधिकतर संग्रहीत अनाज या तंबाकू के धुएं में पाए जाते हैं। 
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महिलाओं में कैंसर का खतरा - फोटो : Pixabay
महिलाओं में स्तन कैंसर का खतरा
90 के दशक में किए गए अध्ययन के दौरान वैज्ञानिकों ने पाया कि चावल का ज्यादा सेवन करने वाली महिलाओं में स्तन और अन्य प्रकार के कैंसर का जोखिम अधिक हो सकता है। करीब 9,400 प्रतिभागियों पर किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि कई अन्य कारकों के साथ चावल का सेवन भी स्तन और फेफड़ों जैसे कैंसर के मामलों को बढ़ा सकता है। चावल को अच्छी तरह से बिना पकाए खाने पर खतरा और बढ़ जाता है। 
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चावल को अच्छी तरह से पकाना सबसे आवश्यक - फोटो : pixels
क्या है चावल बनाने का सही तरीका?
क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के अध्ययन में वैज्ञानिकों का कहना है कि चावल से कैंसर के खतरे को देखते हुए इसे खाना बंद करना की जरूरत नहीं है। चावल में मौजूद आर्सेनिक से छुटकारा पाने का सबसे अच्छा तरीका है कि इसे पकाने से पहले रात भर पानी में भिगो दें। इस प्रक्रिया का पालन करने से इसमें मौजूद विषाक्त पदार्थों का स्तर 80 प्रतिशत तक कम हो जाता है। इसके बाद चावल को अच्छी तरह पका कर ही सेवन करें, ऐसे करके इस खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।  


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स्रोत और संदर्भ: 
Queen’s research team discovers new method which reduces arsenic in rice

अस्वीकरण नोट: यह लेख इंग्लैंड स्थित क्वीन्स यूनिवर्सिटी बेलफास्ट के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए अध्ययन  के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं। 
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