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ब्रेन हेल्थ टिप्स: 40 के बाद दिमाग की सेहत को न करें नजरअंदाज, न्यूरोलॉजिस्ट ने बताई जरूरी बातें

Wed, 16 Sep 2026 01:50 PM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

How to Improve Brain Health: इस लेख में जानें 40 की उम्र में दिमाग की सेहत को नुकसान पहुंचाने वाली कौन-सी आदतों से बचना चाहिए और एक उम्र के बाद बेहतर नींद, खान-पान, व्यायाम और मानसिक सक्रियता क्यों जरूरी है।
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40 के बाद दिमाग की सेहत को न करें नजरअंदाज - फोटो : AI
How to Improve Brain Health: 40 की उम्र को अक्सर जिंदगी का ऐसा पड़ाव माना जाता है, जब करियर, परिवार, बच्चों और आर्थिक जिम्मेदारियों के बीच व्यक्ति खुद की सेहत को पीछे छोड़ देता है। दिमाग की सेहत के मामले में भी कई लोग तब तक ध्यान नहीं देते, जब तक याददाश्त, एकाग्रता या नींद से जुड़ी परेशानी सामने न आने लगे। 

ऐसे में डॉ. कुणाल बहरानी चेयरमैन एवं ग्रुप डायरेक्टर, न्यूरोलॉजी डिपार्टमेंट ने जानकारी दी है कि 40 की उम्र के आसपास हमारी कई आदतें लंबे समय की दिनचर्या का हिस्सा बन जाती हैं और इनका असर आगे चलकर संपूर्ण स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। हालांकि, हर भूलने की समस्या किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होती। ऐसे में जानते हैं 40 की उम्र में दिमाग की सेहत के लिए किन गलतियों से बचना चाहिए।
 
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40 के बाद दिमाग की सेहत को न करें नजरअंदाज - फोटो : AI
40 की उम्र में दिमाग की सेहत के लिए किन गलतियों से बचें?

लगातार कम नींद को सामान्य मानना

देर रात तक काम करना, सुबह जल्दी उठना और सप्ताहांत में नींद पूरी करने की कोशिश करना कई लोगों की दिनचर्या बन चुका है। लगातार नींद पूरी न होने से ध्यान, एकाग्रता, मूड और याददाश्त प्रभावित हो सकती है।

अगर नियमित रूप से थकान के साथ नींद खुलती है, दिन में अत्यधिक नींद आती है या तेज खर्राटे और नींद के दौरान सांस रुकने जैसी समस्या होती है, तो डॉक्टर से सलाह लेना उचित है।

 
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40 के बाद दिमाग की सेहत को न करें नजरअंदाज - फोटो : AI
पूरे दिन बैठे रहना

ऑफिस में लंबे समय तक बैठना, कार से सफर करना और काम के बाद स्क्रीन के सामने समय बिताना शारीरिक गतिविधि को कम कर देता है। नियमित शारीरिक गतिविधि केवल वजन और फिटनेस के लिए ही नहीं, बल्कि हृदय और रक्त वाहिकाओं के स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण है।

काम के बीच छोटे-छोटे वॉक ब्रेक लेना, सीढ़ियों का इस्तेमाल करना और रोजाना नियमित शारीरिक गतिविधि को दिनचर्या में शामिल करना मददगार हो सकता है।

 

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40 के बाद दिमाग की सेहत को न करें नजरअंदाज - फोटो : AI
ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नजरअंदाज करना

हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी स्थितियां लंबे समय तक बिना स्पष्ट लक्षण के रह सकती हैं। समय के साथ ये रक्त वाहिकाओं को प्रभावित कर सकती हैं और स्ट्रोक सहित कई स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम बढ़ा सकती हैं।

इसलिए 40 की उम्र के बाद डॉक्टर की सलाह के अनुसार ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल जैसी स्वास्थ्य जांच करवाते रहना महत्वपूर्ण है।

 
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40 के बाद दिमाग की सेहत को न करें नजरअंदाज - फोटो : AI
नई चीजें सीखना छोड़ देना

व्यस्त जीवन में पढ़ना, नई भाषा सीखना, संगीत सीखना, कोई नया हुनर विकसित करना या किसी नए विषय के बारे में जानना कम हो सकता है। दिमाग को सक्रिय रखने के लिए किसी महंगे ऐप की जरूरत जरूरी नहीं है।

किताब पढ़ना, नई स्किल सीखना, पहेलियां हल करना, संगीत सीखना या किसी नए विषय को समझना मानसिक रूप से सक्रिय रहने के तरीके हो सकते हैं।

 
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40 के बाद दिमाग की सेहत को न करें नजरअंदाज - फोटो : AI
सामाजिक रिश्तों से दूरी बनाना

काम और पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच दोस्तों और रिश्तेदारों से मिलना-जुलना कम हो सकता है। बातचीत, सामाजिक जुड़ाव और सामुदायिक गतिविधियां मानसिक सक्रियता का हिस्सा हो सकती हैं।

इसके लिए बहुत बड़ा सोशल सर्कल होना जरूरी नहीं है। कुछ करीबी और सार्थक रिश्तों को समय देना भी महत्वपूर्ण हो सकता है।

 
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40 के बाद दिमाग की सेहत को न करें नजरअंदाज - फोटो : AI
हर भूलने की समस्या को उम्र का असर समझना

कभी-कभार किसी का नाम भूल जाना या कोई चीज रखकर भूल जाना हमेशा किसी गंभीर बीमारी का संकेत नहीं होता। तनाव, थकान और नींद की कमी भी ऐसी परेशानी पैदा कर सकती है। लेकिन अगर लगातार परिचित काम करने में परेशानी हो, रास्ते भूलने लगें, पैसे या दवाइयां संभालने में दिक्कत हो या परिवार को व्यवहार में स्पष्ट बदलाव नजर आए, तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

 
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40 के बाद दिमाग की सेहत को न करें नजरअंदाज - फोटो : AI
40 के बाद दिमाग को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. कुणाल बहरानी के अनुसार, नींद को प्राथमिकता देना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर जैसे स्वास्थ्य जोखिमों को नियंत्रित रखना, पौष्टिक आहार लेना, सामाजिक रूप से जुड़े रहना और दिमाग को नई चीजें सीखने का मौका देते रहना महत्वपूर्ण है। किसी भी लगातार या तेजी से बढ़ती संज्ञानात्मक समस्या को नजरअंदाज करने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेना बेहतर है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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