कोरोना संक्रमण ने पिछले दो वर्षों में वैश्विक स्तर पर हम सभी को कई तरह से परेशान किया है। कुछ वैरिएंट्स ने जहां फेफड़े और हृदय को गंभीर क्षति पहुंचाई, वहीं कुछ को अत्याधिक संक्रामक माना जा रहा है। संक्रमण से ठीक होने के लंबे समय, यहां तक कि कुछ मामलों में एक साल बाद तक भी लोगों में लॉन्ग कोविड की समस्या देखी जा रही है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना वायरस का संक्रमण और इसके दीर्घकालिक दुष्प्रभाव, दोनों ही शरीर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं, ऐसे में हम सभी को इससे बचाव के निरंतर उपायों को प्रयोग में लाते रहने की आवश्यकता है।
संक्रमण के दीर्घकालिक प्रभावों और इसकी गंभीरता को जानने के लिए अध्ययन कर रही वैज्ञानिकों की एक टीम ने अपने हालिया अध्ययन में बड़ा खुलासा किया है।
जर्नल बीएमजे में प्रकाशित अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि कई लोगों में संक्रमण से ठीक होने के लंबे समय बाद तक भी गंभीर समस्याएं देखी जा रही है। इतना ही नहीं, कुछ लोगों में रिपोर्ट निगेटिव आने के महीनों बाद रक्त के थक्के बनने की समस्या देखी गई है। ब्लड क्लॉटिंग एक गंभीर समस्या है, जिसके कारण शरीर के अंगों को क्षति होने का खतरा हो सकता है। संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों को इस बारे में विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।