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Covid-19: अपशिष्ट जल में पाया गया 30 म्यूटेशनों वाला ये वैरिएंट, दुनियाभर में 'साइलेंटली' बढ़ रहा है जोखिम

Sun, 24 Sep 2023 12:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स - फोटो : iStock
दुनिया के कई देशों में पिछले कुछ महीनों में कोरोना के नए वैरिएंट्स के कारण संक्रमण और अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या बढ़ती हुई देखी गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यूएस में कोरोना संक्रमितों में मौत के आंकड़ों में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। कोरोना के जिन वैरिएंट्स के कारण संक्रमण का जोखिम बढ़ा है उनमें एरिस (EG.5.1) और पिरोला (BA.2.86) प्रमुख हैं, ये दोनों ही ओमिक्रॉन स्ट्रेन के सब-वैरिेंट्स हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने इन वैरिएंट्स के कारण बढ़ते खतरे को लेकर लोगों को अलर्ट करते हुए सावधानी बरतते रहने की अपील की है।

इस बीच कोरोना के हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक के अत्यधिक म्यूटेटेड माने जा रहे बीए.2.86 वैरिएंट्स के कारण अमेरिका के करीब 10 स्टेट्स में संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े हैं। वर्ल्डवाइड कोविड ट्रैकिंग डेटाबेस की रिपोर्ट के अनुसार यूके और यूएस सहित कई अन्य देशों में भी इस वैरिएंट के कारण स्वास्थ्य जोखिम और अस्पतालों में रोगियों के मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट में कोरोना के स्रोतों को लेकर जो जानकारी साझा की गई है, उसने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की चिंता और बढ़ा दी है। आइए इस बारे में जानते हैं।
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कोरोना वायरस के मामले - फोटो : Pixabay
अपशिष्ट जल में पाया गया BA.2.86
 
सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) द्वारा कोरोना के जोखिमों को समझने के लिए किए जा रहे शोध में विशेषज्ञों ने बड़ी जानकारी साझा की है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका में अपशिष्ट जल में भी BA.2.86 भी पाया गया है। वेस्टवाटर ट्रैकिंग रिपोर्ट के मुताबिक इस तरह के मामले अमेरिका में अभी भी  दुर्लभ हैं कि खतरे के स्रोत के तौर पर नहीं माना जा सकता है। 

शुक्रवार के अपडेट के अनुसार, सीडीसी अधिकारियों कहा BA.2.86 कई कम्युनिटीज के बीच फैल रहा है, लेकिन अच्छी बात ये है कि यह इसके कारण स्वास्थ्य जोखिम अधिक नहीं है।
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कोरोना के नए वैरिएंट्स के जोखिम - फोटो : istock
शरीर की प्रतिरक्षा को चकमा देने वाला वैरिएंट

कोरोना के इन नए वैरिएंट्स के कारण बढ़ते जोखिमों को लेकर इस महीने की शुरुआत में द लैंसेट जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में जापानी शोधकर्ताओं ने चिंता जताते हुए कहा था कि पिरोला वैरिएंट दुनिया भर में बहुत साइलेंटली फैल रहा है। टोक्यो विश्वविद्यालय की टीम के नेतृत्व में वैज्ञानिकों ने प्रयोगशाला परीक्षण किए जिससे पता चला कि टीके या पूर्व संक्रमण से शरीर में बनी सुरक्षा भी BA.2.86 के खिलाफ उतनी प्रभावी नहीं हो सकती है। नए वैरिएंट्स में अतिरिक्त म्यूटेशनों के कारण ये बहुत आसानी से शरीर को प्रतिरक्षा को चकमा देकर लोगों को संक्रमित करने में सफल हो रहा है।

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कोरोना के जोखिम कारक - फोटो : PTI
अधिक म्यूटेशन बढ़ा रहे हैं जोखिम

ओमिक्रॉन के पिरोला वैरिएंट की प्रकृति को समझने के लिए किए गए अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि इसमें मूल वैरिएंट की तुलना में 30 से अधिक म्यूटेशन हो सकते हैं, जिससे संक्रमण के काफी तेजी से बढ़ने का खतरा रहता है। शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं में प्रवेश करने में इन्हीं म्यूटेशनों को जिम्मेदार माना जाता है। इन नए वैरिएंट्स में अधिक म्यूटेशनों की संख्या ने वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के लिए चिंता बढ़ा दी है।

अध्ययन के लेखकों ने बताया, कुल मिलाकर, ये नतीजे बताते हैं कि BA.2.86 अब तक के सबसे अधिक प्रतिरक्षा प्रतिरोधी वैरिएंट में से एक है।
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कोरोना से बचाव के लिए करें उपाय - फोटो : Pixabay
सभी लोगों को बचाव करते रहने की आवश्यकता

कोरोना के इन नए वैरिएंट्स के बारे में जानने के लिए किए गए प्रारंभिक प्रयोगशाला प्रयोगों से पता चला है कि जिन लोगों का वैक्सीनेशन हो चुका है, अगर उनमें संक्रमण हो जाता है तो गंभीर रोग विकसित होने या मृत्यु का खतरा कम है। हालांकि सभी लोगों को इन नए वैरिएंट्स से बचाव करते रहने की आवश्यकता है। इसकी प्रकृति ऐसी है जिससे बड़ी आबादी में संक्रमण के बढ़ने का जोखिम हो सकता है, जो स्वास्थ्य क्षेत्र पर बड़े दबाव का कारण बन सकती है।


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स्रोत और संदर्भ
Summary of Variant Surveillance

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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