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Heart Attack: महिला या पुरुष, किसे हार्ट अटैक का खतरा अधिक? क्या लक्षणों में भी होता है कोई अंतर

Sun, 18 Feb 2024 03:54 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा और बचाव - फोटो : istock
हृदय रोग गंभीर समस्याओं और वैश्विक स्तर पर मृत्य के प्रमुख जोखिम कारकों में से एक है। हर साल हृदय से संबंधित तमाम बीमारियों-हार्ट अटैक के कारण लाखों लोगों की मौत हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोना महामारी के बाद हार्ट अटैक के मामले और भी अधिक देखे जा रहे हैं। आश्चर्यजनक तौर पर कम उम्र के लोगों में भी ये मौत का कारण बनती जा रही है।

पर क्या आप जानते हैं कि लिंग के आधार पर हृदय रोगों का खतरा कम और अधिक भी हो सकता है?

हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के मुताबिक कम उम्र में पुरुषों को महिलाओं की तुलना में हृदय रोग का अधिक खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लिंग के आधार पर हार्ट की समस्याओं का जोखिम कई कारकों पर निर्भर करता है। आइए जानते हैं कि पुरुषों में इस गंभीर रोग का खतरा क्यों अधिक होता है और इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है?
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पुरुषों में हृदय रोगों का खतरा - फोटो : istock
किसमें हार्ट अटैक का खतरा अधिक?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ज्यादातर अध्ययन इस बात की तरफ संकेत देते हैं कि पुरुषों को महिलाओं की तुलना में हार्ट अटैक का जोखिम अधिक हो सकता है। पुरुषों में धूम्रपान और तनाव जैसी अस्वास्थ्यकर आदतें इस जोखिम को बढ़ाने वाली मानी जाती हैं। वहीं रजोनिवृत्ति के बाद महिलाओं में हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।

विशेषज्ञों का मानना है जिस तरह से लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी की समस्या बढ़ती जा रही है, ऐसे में दोनों लिंग- महिला और पुरुष को इस गंभीर रोग से सुरक्षित नहीं माना जा सकता है। हृदय रोग को लेकर अपने जोखिम कारकों को समझना और इससे बचाव करना आवश्यक है।
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महिलाओं में हार्ट की समस्या - फोटो : iStock
हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं भिन्न

अध्ययनकर्ता बताते हैं, महिला और पुरुष दोनों में हार्ट अटैक के लक्षण भी अलग-अलग हो सकते हैं।

हार्वर्ड विशेषज्ञ कहते हैं, महिलाओं में दिल का दौरा पड़ने की स्थिति में मितली, चक्कर आने और थकान जैसे असामान्य लक्षण होने की संभावना अधिक होती है। जबकि पुरुषों में छाती में दर्द, पसीना आने, जबड़ों में दर्द की भी दिक्कत अधिक देखी जाती रही है। 

एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने लोगों को दिल के दौरे का इलाज कराने से पहले कितनी देर का अंतर रहा, इसे समझने की कोशिश की। महिलाओं के लिए औसतन देरी का समय लगभग 54 घंटे पाया गया, जबकि पुरुषों के लिए यह लगभग 16 घंटे था। 

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हार्ट अटैक की समस्या - फोटो : istock
हार्ट अटैक और मौत का जोखिम

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने महिलाओं में दिल के दौरे के बारे में जारी बयान में पुरुषों और महिलाओं के बीच असमानताओं को उजागर किया। उदाहरण के लिए, पहले हार्ट अटैक के एक साल के भीतर, पुरुषों की तुलना में महिलाओं में जीवित रहने की दर कम होती है। पांच वर्षों के भीतर पहली बार दिल का दौरा पड़ने वाली 47% महिलाओं में मौत का खतरा देखा गया।

हृदय रोग (दिल का दौरा) के कारण अस्पताल में भर्ती 65 वर्ष और उससे अधिक उम्र के लगभग 50,000 लोगों पर किए गए एक हालिया अध्ययन इन असमानताओं के संभावित कारण पर प्रकाश डालता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि पुरुषों की तुलना में, महिलाओं को एस्पिरिन और कोलेस्ट्रॉल कम करने वाली संभावित लाभकारी दवाएं मिलने या धूम्रपान छोड़ने के बारे में सलाह मिलने की संभावना कम होती है।
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हृदय का रखें ख्याल - फोटो : istock
क्या कहते हैं स्वास्थ्य विशेषज्ञ?

डॉक्टर कहते हैं, अध्ययन के रिपोर्ट से इतर यह समझना जरूरी है कि समय के साथ लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण किसी भी उम्र के व्यक्ति में हृदय रोग और इसके कारण मौत का खतरा हो सकता है। आनुवांशिकी के साथ ब्लड प्रेशर और ब्लड कोलेस्ट्रॉल की समस्याओं के कारण कम आयु के लोग भी इसके शिकार होते जा रहे हैं। कोरोना संक्रमण के बाद हार्ट की दिक्कतें और भी बढ़ गई हैं, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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