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Alert: बच्चों के लिए इतना खतरनाक हो सकता है एंटीबायोटिक, सोचा भी नहीं होगा आपने; अध्ययन में डराने वाला खुलासा

Mon, 28 Apr 2025 10:18 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

फिनलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों ने दो साल की उम्र से पहले एंटीबायोटिक्स ली थी, उनमें 12 साल की उम्र तक मोटापे (हाई बॉडी मास इंडेक्स) की आशंका 20 प्रतिशत अधिक देखी गई। मोटापा के कारण हृदय रोग-डायबिटीज सहित कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।
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बच्चों के लिए नुकसानदायक हो सकता है एंटीबायोटिक - फोटो : Freepik.com
छोटा-मोटा संक्रमण होते ही अगर आप भी एंटीबायोटिक दवा लेना शुरू कर देते हैं तो ये खबर आपके लिए ही है। पहले के भी कई अध्ययनों में दुनियाभर में एंटीबायोटिक्स के बढ़ते इस्तेमाल के चलते एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस के खतरे को लेकर अलर्ट किया जाता रहा है, पर क्या आप जानते हैं कि इसके जोखिम और भी गंभीर हो सकते हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों की एक टीम ने सभी लोगों को अलर्ट किया है कि बच्चों को बिना डॉक्टरी सलाह के एंटीबायोटिक दवा देने से बचना चाहिए। इन दवाओं का ज्यादा इस्तेमाल भविष्य में कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों जैसे डायबिटीज-हाई ब्लड प्रेशर यहां तक कि कैंसर के खतरे को भी बढ़ाने वाली हो सकती है। 

अध्ययनकर्ताओं की टीम ने डॉक्टर्स को भी सावधान किया है कि एंटीबायोटिक के ज्यादा इस्तेमाल (विशेषकर बच्चों में) को लेकर सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।


(ये भी पढ़िए- बच्चों में निमोनिया के लिए दी जाने वाली दवाएं हो रहीं बेअसर)
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बच्चों में अधिक वजन की समस्या - फोटो : Adobe Stock
बच्चों में मोटापा बढ़ा रही हैं ये दवाएं

एक नए अध्ययन में पाया गया है कि बचपन में संक्रमण से लड़ने वाली आम दवाओं के अधिक इस्तेमाल के कारण बच्चों में मोटापे की आशंका बढ़ सकती है।

फिनलैंड के शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन बच्चों ने दो साल की उम्र से पहले एंटीबायोटिक्स ली थी, उनमें 12 साल की उम्र तक मोटापे (हाई बॉडी मास इंडेक्स) की आशंका 20 प्रतिशत अधिक देखी गई। वहीं जिन बच्चों ने इस उम्र तक कभी भी या फिर एंटीबायोटिक्स दवाओं का बहुत कम इस्तेमाल किया उनमें मोटापे का खतरा कम था। 

इतना ही नहीं, दो साल से कम उम्र के जिन बच्चों को एंटीबायोटिक्स दी गई, उनमें पांचवी कक्षा तक पहुंचते-पहुंचते अधिक वजन का जोखिम काफी अधिक था।
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एंटीबायोटिक दवाओं का अधिक इस्तेमाल नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com
गले में खराश-संक्रमण के लिए होता है एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल

आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि अकेले यूके में हर साल 14 वर्ष से कम आयु के बच्चों को एंटीबायोटिक्स के लगभग 4 मिलियन (40 लाख) प्रिस्क्रिप्शन दिए जाते हैं। ये दवाएं आमतौर पर बैक्टीरियल संक्रमण जैसे कि गले में खराश, निमोनिया और गैस्ट्रोएंटेराइटिस, त्वचा और कान के संक्रमण के इलाज के लिए दी जाती हैं। 

विशेषज्ञों ने पहले भी एंटीबायोटिक्स की लिमिट तय करने की मांग की थी, इसमें चेतावनी दी गई थी कि अगर इनका अधिक इस्तेमाल किया जाता रहा तो ये दवाएं समय के साथ अपनी शक्ति खो सकती हैं और एक समय ऐसा भी आ सकता है कि इनसे  आम संक्रमणों का इलाज करना भी मुश्किल हो सकता है।

अब, फिनिश वैज्ञानिकों का कहना है कि दवा लेने से और भी स्वास्थ्य जोखिम हैं जिसे भी ध्यान में रखना चाहिए।


(वैज्ञानिकों की चेतावनी- 'हमें दवाओं की सख्त जरूरत होगी पर उनका असर नहीं होगा')

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दवाओं के इस्तेमाल को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं ने अध्ययन में पाया कि 24 महीने तक के बच्चों को एंटीबायोटिक्स देने से 7 साल की उम्र तक बीएमआई अधिक हो सकता है। यह बाद के जीवन में और भी कई समस्याओं का कारण बन सकती है।

अध्ययन के लिए विशेषज्ञों ने फिनलैंड में 12 वर्ष की आयु तक 33,095 बच्चों के डेटा का विश्लेषण किया। इनमें जीवन के पहले दो वर्षों में एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर नजर रखी गई। शोधकर्ताओं ने गर्भावस्था से पहले, गर्भावस्था के दौरान, जन्म के समय भी एंटीबायोटिक के इस्तेमाल पर भी नजर रखा।

निष्कर्ष में पाया गया कि गर्भावस्था से पहले, गर्भावस्था के दौरान या जन्म के समय एंटीबायोटिक दवा लेने से बच्चे के वजन में कोई अंतर नहीं आया। हालांकि जिन बच्चों ने पहले दो वर्षों में ये दवाएं लीं उनमें मोटापे का जोखिम अधिक था।
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दवाओं के इस्तेमाल को लेकर अलर्ट - फोटो : Freepik.com
डॉक्टर भी ये दवाएं लिखते समय बरतें सावधानी

फिनलैंड स्थित ओउलू विश्वविद्यालय के लेखकों ने डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे छोटे बच्चों के लिए एंटीबायोटिक्स लिखते समय सावधानी बरतें, खासकर ऊपरी श्वसन पथ के संक्रमण के दौरान। इसके अलावा मात-पिता को भी खुद से छोटी-छोटी समस्याओं में इन दवाओं के इस्तेमाल को लेकर अलर्ट रहना चाहिए। ये बच्चों को मोटापे का शिकार बना सकती हैं, जिसके कारण भविष्य में उनमें हृदय रोग-डायबिटीज सहित कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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