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World Diabetes Day: मधुमेह रोगियों की जटिलताएं बढ़ा रही है जहरीली हवा, इंसुलिन उत्पादन पर भी इसका दुष्प्रभाव

Mon, 14 Nov 2022 12:05 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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वायु प्रदूषण के कारण डायबिटीज की समस्या - फोटो : istock
डायबिटीज के शिकार लोगों को इसकी जटिलताओं से बचे रहने के लिए लाइफस्टाइल और आहार पर विशेष ध्यान देते रहने की सलाह दी जाती है। आहार में मीठी चीजों और कार्ब्स की मात्रा को कम करने के साथ दिनचर्या में शारीरिक सक्रियता वाले तरीकों को शामिल करना ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल रखने में आपके लिए सहायक माना जाता है। पर क्या आप जानते हैं कि इन कारकों के अलावा डायबिटीज को कंट्रोल करने में हवा की गुणवत्ता का भी विशेष योगदान होता है?

इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि वायु प्रदूषण के संपर्क में रहने वालों में डायबिटीज विकसित होने और पहले से ही डायबिटीज के शिकार लोगों में इसकी जटिलताओं के बढ़ने का खतरा अधिक हो सकता है।

राजधानी दिल्ली-एनसीआर में जिस तरह से वायु की गुणवत्ता बिगड़ रही है, विशेषज्ञ इसे डायबिटीज की समस्याओं को बढ़ाने वाला मानते हैं।  इनवायरमेंटल हेल्थ प्रोस्पेक्टिव में जून 2020 में प्रकाशित एक अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि आप जिस हवा में सांस लेते हैं उसकी गुणवत्ता भी डायबिटीज की समस्या को बढ़ाने वाला कारक हो सकती है। इस अध्ययन में जंगल की आग के धुंए को प्रदूषण का आधार मानकर अध्ययन किया गया था। इस तरह के खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह देते हैं। आइए इस अध्ययन के बारे में जानते हैं।
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वायु प्रदूषण के कारण स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम - फोटो : istock

वायु प्रदूषण और मधुमेह के बीच संबंध


अध्ययन में शोधकर्ताओं की टीम ने वायु प्रदूषण और मधुमेह के बीच संबंधों पर प्रकाश डाला। बोल्डर स्थित कोलोराडो यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर तान्या एल्डरेटे कहती हैं, प्रदूषित वातावरण के संपर्क में रहने वाले टाइप-2 डायबिटीज के शिकार लोगों में कई प्रकार की जटिलताओं के विकसित होने का जोखिम देखा गया है। प्रदूषण की स्थिति इंसुलिन संवेदनशीलता में कमी और अधिक वजन वाले या मोटे बच्चों में इंसुलिन उत्पादन से संबंधित जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। मधुमेह को नियंत्रित करने के अन्य कारकों पर ध्यान देने के साथ प्रदूषण से बचाव करते रहना भी आवश्यक है। 
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टाइप-2 डायबिटीज का खतरा - फोटो : istock
वायु प्रदूषण का डायबिटीज पर असर 

शोधकर्ताओं ने इनवायरमेंटल इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में बताया कि प्रदूषित हवा में मेटल और अन्य विषाक्त पदार्थों सहित सूक्ष्म कणों की मौजूदगी देखी गई है। सांस के माध्यम से ये हानिकारक तत्व शरीर में प्रवेश करके न सिर्फ फेफड़ों के लिए मुश्किलों को बढ़ा देते हैं साथ ही ये ब्लड शुगर बढ़ने का भी कारण हो सकता है।

वैज्ञानिकों का मानना है कि सूक्ष्म कणों के कारण शरीर में होने वाली इंफ्लामेशन की स्थिति टाइप-2 डायबिटीज का खतरा और इसकी जटिलताएं बढ़ा सकती है।

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प्रदूषण के कारण आंतों की समस्या - फोटो : Pixabay
प्रदूषण का आंतों पर दुष्प्रभाव

प्रोफेसर तान्या एल्डरेटे कहती हैं, वायु प्रदूषण के अधिक संपर्क में रहने वाले लोगों के आंतों में अस्वास्थ्यकर तरीके के बदलाव देखे गए हैं, जिनके कारण भी मधुमेह की जटिलताओं के बढ़ने का जोखिम हो सकता है। दक्षिणी कैलिफ़ोर्निया के युवाओं पर किए अध्ययन में पाया गया कि प्रदूषण के संपर्क में रहने के कारण आंत के माइक्रोबायोम में दिक्कतें आ गईं। गट माइक्रोबायोम, बैक्टीरिया सहित सूक्ष्मजीवों का वह समूह है, जो आपके शरीर को भोजन को तोड़ने में मदद करता। इसमें होने वाली समस्याओं के कारण इंसुलिन का उत्पादन प्रभावित हो सकता है जिसके कारण कई प्रकार के जोखिम बढ़ सकते हैं।
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वायु प्रदूषण से बचाव के उपाय जरूरी - फोटो : istock
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से राजधानी दिल्ली सहित देश के कई राज्यों में प्रदूषण बढ़ा है, ऐसे में मधुमेह वाले लोगों को अपने परिवेश और हवा की गुणवत्ता के बारे में जागरूक होने की जरूरत है। मधुमेह वाले लोगों को धुएं में मौजूद महीन कणों के प्रति अधिक संवेदनशील पाया गया है,यह उनमें हृदय रोगों के खतरे को भी बढ़ा सकता है।

प्रदूषण से बचे रहने के लिए अनावश्यक रूप से घर से बाहर जाने से बचें। घर से बाहर जाना पड़ रहा है तो एन-95 मास्क का प्रयोग करें, जिससे हवा को आसानी से फिल्टर किया जा सके। इसके साथ डायबिटीज को कंट्रोल करने वाले अन्य उपायों का भी ध्यान देते रहना बहुत आवश्यक है।


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स्रोत और संदर्भ

Air pollution exposure is associated with the gut microbiome as revealed by shotgun metagenomic sequencing

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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