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मिजोरम के बाद नागालैंड में कुत्ते के मांस पर लगी रोक, जानें स्वास्थ्य के लिए कितना नुकसानदायक

Sat, 04 Jul 2020 11:47 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
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कुत्ते (तस्वीरें केवल सांकेतिक तौर पर प्रयोग की गई हैं) - फोटो : social media
नागालैंड सरकार की कैबिनेट ने कुत्तों के मांस पर व्यावसायिक आयात और व्यापार पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की एक अहम बैठक में कुत्ते के मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने के साथ ही प्रदेश में कुत्तों के बाजारों को पूरी तरह बंद करने का निर्णय लिया गया है। 

नागालैंड के मुख्य सचिव तेमजन टॉय ने शुक्रवार को एक ट्वीट कर इस बात की पुष्टि करते हुए कहा, "राज्य सरकार ने कुत्तों के बाजार और कुत्तों के वाणिज्यिक आयात और बिक्री पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही कुत्तों के कच्चे और पके मांस की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया गया है।" इससे पहले इस साल मार्च में पूर्वोत्तर राज्य मिजोरम ने पशुओं की स्लॉटरिंग यानी वध के लिए उपयुक्त जानवरों की परिभाषा से कुत्तों को हटाने से जुड़े कानून में संशोधन किया था। इसके बाद अब नागालैंड सरकार ने यह कदम उठाया है।
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कुत्ता (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
दरअसल नागालैंड और मिजोरम में कुत्ते का मांस बेचने का यह मुद्दा काफी पुराना है लेकिन फेडरेशन ऑफ इंडिया एनिमल प्रोटेक्शन आर्गेनाईजे़शन ने नागालैंड सरकार से तत्काल कार्रवाई करने के लिए गुरुवार को अपील की थी जिसके बाद से ये मुद्दा फिर से सुर्खियों में आ गया।

नागालैंड में कुत्ते की मांस की बिक्री, तस्करी और खपत पर प्रतिबंध लगाने के लिए फेडरेशन ऑफ इंडिया एनिमल प्रोटेक्शन आर्गेनाईजेशन की कानूनी प्रबंधक वर्णिका सिंह ने मुख्यमंत्री नेफ्यू रियो को तत्काल कार्रवाई के लिए एक पत्र लिखा था।
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Street Dogs - फोटो : सोशल मीडिया
उन्होंने अपने पत्र में लिखा था,"हमने नागालैंड के दीमापुर में 'पशु बाजारों' की हालिया तस्वीरों को देखा है जिसके कारण हमें एक बार फिर से आघात पहुंचा हैं। अवैध व्यापार के लिए बोरियों में बांधकर इस वेट मार्केट में लाए गए कुत्तों को भयानक परिस्थितियों रखा जा रहा है जो देखा जा सकता है।"

पशु संरक्षण के काम में जुटे इस संगठन का कहना था कि नागालैंड में कुत्ते के मांस का व्यापार पूरी तरह से अवैध है और भारतीय दंड संहिता 1860 जैसे विभिन्न कानूनों का पूरी तरह से उल्लंघन है। आर्गेनाईजेशन की मानें तो कुत्तों को पकड़ना और उनका मांस खाना कई बार लोगों के लिए रेबीज (जलांतक रोग) जैसी बीमारी का जोखिम पैदा कर देता है क्योंकि यह रोग न केवल कुत्ते के काटने से फैल सकता है, बल्कि संक्रमित मांस को छूने और खाने से भी फैल सकता है।
 

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मेनका गांधी (File Photo) - फोटो : PTI
इसके अलावा लोकसभा सांसद मेनका गांधी ने 30 जून को पीपल्स फॉर एनिमल्स के आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर लोगों से नागालैंड के मुख्य सचिव को ईमेल करने का अनुरोध करते हुए राज्य में "कुत्तों के बाजारों और कुत्तों के मांस" पर रोक लगाने की बात कही थी।

हालांकि, ईसाई बहुल इन राज्यों में कुत्ते के मांस को लोग चिकन और मटन की तरह स्वादिष्ट भोजन के तौर पर नियमित खाते आ रहें है। नागालैंड की जनजातियों में कुत्ते के मांस खाने का रिवाज सैकड़ों साल पुराना है। नागालैंड के सबसे बड़े शहर दीमापुर के सुपर मार्केट में बुधवार के दिन कुत्ते का मांस खुलेआम बेचा जाता रहा है।
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Street Dogs - फोटो : Social Media
दीमापुर के रहने वाले कैसी माओ सालों से दीमापुर के सुपर मार्केट से कुत्ते का मांस खरीदते आ रहे हैं। कुत्ते के मांस पर प्रतिबंध लगाने के सवाल पर वो कहते है, "नागालैंड में 17 प्रमुख जनजातियां है और लगभग हर जनजाति में कुत्ते का मांस खाने का पुराना चलन रहा है। देश के अन्य हिस्सों में जैसे लोग मटन और मुर्गी का मीट खाते है, यह ठीक हमारे लिए उसी तरह है।"

वो कहते है, "पहले सप्ताह में एक बार हमारे परिवार में राजा मिर्ची (पूर्वोत्तर में उगाई जाने वाली सबसे तीखी मिर्च) के साथ कुत्ते का मांस बन जाता था। लेकिन अभी कुछ महीनों से हमने नहीं खाया है। इसकी एक वजह यह है कि हम स्थानीय नस्ल का कुत्ता ज्यादा पसंद करते है और दीमापुर के मार्केट में ज्यादातर कुत्ते असम से लाए जाते है।"
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Facebook - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
नागालैंड में कुत्ते का मांस खाने के पीछे और भी कोई कहानी है?
इस सवाल का जवाब देते हुए कैसी माओ कहते है, "नागालैंड में कुत्ते के मांस को काफी पौष्टिक माना जाता है। यहां कुछ लोगों का कहना है कि कुत्ते का मांस यौन शक्ति को बढ़ाता है। लिहाजा इन मान्यताओं के कारण यहां काफी लोग कुत्ते का मांस खाते आ रहें है।" नागालैंड की राजधानी कोहिमा में रहने वाले नोथो थापरू ने कुत्ते के मांस पर प्रतिबंध को लेकर सरकार के इस फै़सले के बाद अपने फेसबुक पर लिखा, "एक अच्छा कारण दें कि कुत्ते के मांस को क्यों प्रतिबंधित किया जाना चाहिए?"

दीमापुर के रहने वाले मंचोंग अवेन्नोहो ने अपनी प्रतिक्रिया में लिखा, "जो भी हुआ है, हम इसके माध्यम से क्या हासिल करेंगे, कुत्ते का मांस इस राजनीति और पार्टी के इतिहास से बहुत पहले से यहां के लोग कुत्ते का मांस खाते रहे हैं।" गुवाहाटी में पीपल फॉर एनिमल्स नामक गैर सरकारी संगठन की अध्यक्ष संगीता गोस्वामी नागालैंड में कुत्ते के मांस खाने को लेकर दिए जा रहें तर्कों को अमानवीय और कल्पना बताती हैं।
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कुत्ते (File Photo) - फोटो : सोशल मीडिया
लंबे समय से मिजोरम और नागालैंड में कुत्तों के मांस पर प्रतिबंध लगाने की मांग करती आ रही संगीता गोस्वामी ने बीबीसी से कहा, "कुत्ते का मांस एक अधिसूचित भोजन का आइटम नहीं है। लिहाजा ये शुरू से गैर-कानूनी माना जाता रहा है लेकिन नागालैंड में खुलेआम कुत्ते का मांस बेचा जा रहा था। हमारी संस्था ने मिजोरम में कुत्ते का मांस बेचने वाली 28 दुकानें बंद करवाई थी। हालात ऐसे थे कि गुवाहाटी में स्थित मिजोरम भवन के मेन्यू तक में कुत्ते का मांस परोसा जा रहा था। लेकिन अब मिजोरम में खुलेआम कुत्ते का मांस नहीं बेचा जाता। मिजोरम सरकार ने भी जरूरी कदम उठाए है।"

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कुत्ते (File Photo) - फोटो : अमर उजाला
नागालैंड सरकार द्वारा कुत्ते के अवैध व्यापार और कुत्ते के मांस की बिक्री पर रोक लगाने के फैसले का स्वागत करते हुए संगीता गोस्वामी ने कहा "असम से लावारिस कुत्तों को नागालैंड में अवैध तरीके से बेचने का यह कारोबार अब बंद होगा। असम से खासकर गोलाघाट जिले से कुछ लोग बड़े अमानवीय तरीके से कुत्तों को मुंह और पैर से बांधकर बोरियों में भरकर नागालैंड बेचने के लिए ले जाते हैं। इन कुत्तों के मुंह रस्सी से बांध दिए जाते हैं ताकि वे भौंक न सकें। इस तरह रास्ते में दम घुटने से कई बार उनकी की मौत हो जाती है।"

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कुत्ते (File Photo) - फोटो : ani
"एक कुत्ते के एवज में इन लोगों को महज सौ से डेढ़ सौ रुपए मिलता है जबकि नागालैंड में इनको खरीदने वाले वहां 300 रुपए किलो मांस बेचते है। इस तरह वे लोग एक कुत्ते को बेचकर 1500 रुपए से अधिक कमा लेते है। हमने पुलिस की मदद से में कुत्तों का अवैध कारोबार करने वाले असम के कई लोगों को पकड़ा है। अब नागालैंड सरकार को ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी होगी।" ह्युमन सोसाइटी इंटरनेशनल (एचएसआई) ने भी भारत में कुत्तों के मांस के व्यापार को खत्म करने के खिलाफ सालों से अभियान चलाया था। इस संगठन ने नागालैंड सरकार के फैसले का स्वागत किया है।

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कुत्ते (File Photo) - फोटो : अमर उजाला
एचएसआई की मैनेजिंग डायरेक्टर अलोकपर्णा सेनगुप्ता ने बीबीसी को बताया, "नागालैंड में कुत्तों की पीड़ा की एक काली छाया भारत पर छाई रही है और यह खबर भारत में छिपे तौर पर होने वाले कुत्ते के मांस के व्यापार को खत्म करने में एक बड़ी वजह साबित होगी।" एचएसआई के अनुसार, नागालैंड में हर साल तकरीबन 30,000 कुत्ते तस्करी करके लाए जाते हैं जिन्हें बाजार में बेचा जाता है और उन्हें लकड़ी के डंडों से जान से मारा जाता है।

नागालैंड के सामाजिक मुद्दों को लंबे समय से कवर करते आ रहे वरिष्ठ पत्रकार समीर कर पुरकायस्थ कहते है, "मिजोरम और नागालैंड में अधिकांश जनजातियां मंगोलॉयड स्टॉक की हैं। इन जनजातियों की संस्कृति और खान-पान चीन, कोरिया और वियतनाम के लोगों के साथ काफी मिलती-जुलती हैं। मुख्य तौर पर कोरिया में लोग कुत्ते का मांस बहुत ज्यादा खाते है।"
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कुत्ते (File Photo) - फोटो : social media
ऐसा कहा जाता है कि मंगोलॉइड स्टॉक के लोगों के खून में आयरन की मात्रा कम होती हैं। जबकि कुत्ते के मांस में अन्य मांस की तुलना में अधिक लौह तत्व होता है। मंगोलॉयड स्टॉक के लोगों के कुत्ते का मांस पसंद करने के पीछे ऐसा भी एक कारण दिया जाता रहा है।

इससे पहले मिजोरम की सत्ता संभाल रही मिजो नेशनल फ्रंट की अगुवाई वाली सरकार ने इसी साल 4 मार्च को अपनी एक घोषणा मे कहा था कि कुत्तों को मवेशी अर्थात पशुधन नहीं माना जाएगा। इस तरह मिजोरम विधानसभा ने पुराने कानून में संशोधन करते हुए सर्वसम्मति से मिजोरम पशु वध (संशोधन) विधेयक, 2020 को पारित कर दिया और कुत्तों की बिक्री पर रोक लगा दी।

लेकिन बड़े पैमाने पर दुनिया के कई देशों में कुत्तों का मांस खाया जाता है। इनमें चीन, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसे देश शामिल हैं।
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