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अध्ययन में दावा: ओमिक्रॉन पर फाइजर वैक्सीन का असर बेहद कम, बूस्टर डोज है कारगर

Wed, 08 Dec 2021 03:24 PM IST
प्रकाश चंद जोशी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
विश्वभर के तमाम देशों के साथ भारत में भी ओमिक्रॉन तेजी से अपने पैर पसार रहा है। कोरोना वायरस के इस नए वैरिएंट को पहले के कई सारे वैरिएंट से काफी खतरनाक बताया जा रहा है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक कोविड-19 की वैक्सीन फाइजर अन्य कोरोना वायरस के वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन के खिलाफ कम प्रतिरक्षा प्रदान करती है। साथ ही एक प्रयोगशाला में किए गए अध्ययन से ये बात पता चली है कि अभी भी कोरोना वायरस वैक्सीन का बूस्टर डोज ओमिक्रॉन से निपटने के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है। प्री-प्रिंट रिपॉजिटरी medRxiv के सहकर्मियों के ऊपर किए गए परीक्षण के अध्ययन में ये भी पाया गया कि जिन लोगों को टीका लगाया गया था और पहले से संक्रमित थे, उनमें काफी प्रतिरक्षा बनी हुई है।

ओमिक्रॉन स्पाइक प्रोटीन का लेता है सहारा
  • ओमिक्रॉन की उत्पत्ति और स्पाइक प्रोटीन के साथ कई अन्य तरह से इसके म्यूटेशन की चिंता ने इस बात पर जोर दिया है कि ओमिक्रॉन से बचने के लिए बूस्टर डोज काफी हद तक प्रभावी रहेगा। अध्ययन के अनुसार SARS-CoV-2 वायरस मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने और उन्हें संक्रमित करने के लिए स्पाइक प्रोटीन का उपयोग करता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
टीकाकरण ही है एकमात्र विकल्प 
  • अफ्रीका के हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट में काम करने वाले दक्षिण अफ्रीका के कार्यकारी निदेशक प्रोफेसर विलेम हानेकोम के अनुसार, "इन महत्वपूर्ण प्रयोगशाला डेटा के आगामी प्रभावों को निर्धारित करने की आवश्यकता है। साथ ही ये संभावना है कि संक्रमण और बीमारी के खिलाफ कम टीका-प्रेरित सुरक्षा का परिणाम होगा।" हनेकोम ने अपने एक बयान में कहा, "महत्वपूर्ण बात ये है कि अधिकांश वैक्सीनोलॉजिस्ट इस बात से सहमत हैं कि मौजूदा टीके अभी भी ओमिक्रॉन संक्रमण की स्थिति में गंभीर बीमारी और मृत्यु से रक्षा करेंगे। इसलिए ये महत्वपूर्ण है कि सभी को टीका लगाया जाना चाहिए।"
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
क्या ओमिक्रॉन एंटीबॉडी वैक्सीन से बच सकता है? 
  • साथ ही शोधकर्ताओं ने ये भी जांच कि, 'क्या ओमिक्रॉन फाइजर एमआरएनए वैक्सीन द्वारा प्राप्त एंटीबॉडी न्यूट्रलाइजेशन से बच जाता है और क्या वायरस को अभी भी मानव कोशिकाओं पर एसीई 2 रिसेप्टर को संक्रमित करने के लिए बाध्य करने की आवश्यकता है। इसके लिए उन्होंने एक मानव फेफड़े की सेल लाइन क्लोन का उपयोग किया, जो ACE2 रिसेप्टर को वायरस को अलग करने और परीक्षण न्यूट्रलाइजेशन दोनों को ध्यान में रखकर बनाया गया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पीटीआई
शोध में मिला चौंकाने वाला परिणाम 
  • शोध के निष्कर्ष ने इस ओर संकेत दिया है कि ओमिक्रॉन प्रविष्टि के लिए ACE2 आवश्यक है। इसके अलावा शोधकर्ता ने ओमिक्रॉन बनाम पैतृक डी614जी वायरस को बेअसर करने के लिए फाइजर टीकाकरण अध्ययन प्रतिभागियों से प्लाज्मा की क्षमता का भी परीक्षण किया। जिसके लिए उन्होंने 12 प्रतिभागियों के 14 प्लाज्मा नमूनों का परीक्षण किया, जिनमें से छह में SARS-CoV-2 संक्रमण का कोई पिछला रिकॉर्ड नहीं था और न ही वो ये पता लगाने के योग्य थे कि ये एंटीबॉडी पिछले संक्रमण से बने थे। बाकी की छह प्रतिभागियों का दक्षिण अफ्रीका में पहले SARS-CoV-2 संक्रमण के लहर में पिछले संक्रमण का रिकॉर्ड था, जहां संक्रमण पैतृक D614G संस्करण के साथ मौजूद था। इस अध्ययन के अनुसार, इन नमूनों में D614G वायरस का बहुत मजबूत न्यूट्रलाइजेशन था, जो टीकाकरण के तुरंत बाद नमूने के अनुरूप थे।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
ओमिक्रॉन में देखा गया 41 गुना गिरावट 
  • हालांकि शोधकर्ताओं के अनुसार, 'ओमिक्रॉन के टीके से बेअसर होने में 41 गुना गिरावट देखी गई।' उन्होंने कहा कि जिन प्रतिभागियों को पहले संक्रमित किया गया था, उनमें से पांच ने ओमाइक्रोन के साथ अपेक्षाकृत उच्च न्यूट्रलाइजेशन टाइटर्स दिखाए हैं।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
क्या कहते हैं शोधकर्ता? 
  • अध्ययन में शामिल शोधकर्ताओं ने कहा, "पिछला संक्रमण, उसके बाद टीकाकरण या बूस्टर से न्यूट्रलाइजेशन स्तर में वृद्धि होने की संभावना है और ओमिक्रॉन संक्रमण में गंभीर बीमारी से सुरक्षा प्रदान करने की संभावना है।"

स्त्रोत और संदर्भ:
https://sigallab.net/

नोट: ये खबर दक्षिण अफ्रीका में मौजूद अफ्रीका हेल्थ रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा किए गए एक शोध के आधार पर तैयार की गई है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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