विश्वभर के तमाम देशों के साथ भारत में भी ओमिक्रॉन तेजी से अपने पैर पसार रहा है। कोरोना वायरस के इस नए वैरिएंट को पहले के कई सारे वैरिएंट से काफी खतरनाक बताया जा रहा है। हाल ही में किए गए एक अध्ययन के मुताबिक कोविड-19 की वैक्सीन फाइजर अन्य कोरोना वायरस के वैरिएंट की तुलना में ओमिक्रॉन के खिलाफ कम प्रतिरक्षा प्रदान करती है। साथ ही एक प्रयोगशाला में किए गए अध्ययन से ये बात पता चली है कि अभी भी कोरोना वायरस वैक्सीन का बूस्टर डोज ओमिक्रॉन से निपटने के लिए एक बेहतर विकल्प हो सकता है। प्री-प्रिंट रिपॉजिटरी medRxiv के सहकर्मियों के ऊपर किए गए परीक्षण के अध्ययन में ये भी पाया गया कि जिन लोगों को टीका लगाया गया था और पहले से संक्रमित थे, उनमें काफी प्रतिरक्षा बनी हुई है।
ओमिक्रॉन स्पाइक प्रोटीन का लेता है सहारा
- ओमिक्रॉन की उत्पत्ति और स्पाइक प्रोटीन के साथ कई अन्य तरह से इसके म्यूटेशन की चिंता ने इस बात पर जोर दिया है कि ओमिक्रॉन से बचने के लिए बूस्टर डोज काफी हद तक प्रभावी रहेगा। अध्ययन के अनुसार SARS-CoV-2 वायरस मानव कोशिकाओं में प्रवेश करने और उन्हें संक्रमित करने के लिए स्पाइक प्रोटीन का उपयोग करता है।