भारतीय संस्कृति की सबसे बड़ी खासियत है, इसकी विविधता। जितने इसके रंग हैं वे सब मिलकर इसको अनूठा भी बनाते हैं और खूबसूरत भी। खासतौर पर भारतीय त्योहार, जिनके अलग अलग स्वरूप इन त्योहारों की चमक को बढ़ाते हैं। ऐसा ही एक कलात्मक स्वरूप है रंगोली, अल्पना और मांडने का। भले ही इनके नाम और बनाने के तरीकों में अंतर हो लेकिन इन सबके पीछे भावना एक ही है- त्योहार की खूबसूरती को और बढ़ाना। देश के विभिन्न हिस्सों में दरवाजे, आंगन, बालकनी और पूजा स्थल पर कलात्मकता से सजी आकृतियां उकेरने का चलन है। कुछ जगहों पर साल भर घर के मुख्य द्वार पर शुभ संकेत के प्रतीक चिन्ह के रूप में रंगोली या अल्पना बनाई जाती है। इसके लिए विशेषकर सफेद रंग, खड़ी या चावल के आटे का प्रयोग किया जाता है। साथ में हल्दी और कुमकुम भी उपयोग में आते हैं। तो इस दिवाली आप भी सजाएं अपने द्वार पर एक सुंदर सी अल्पना और बढ़ाएं शुभता।