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Banu Mushtaq: गृह राज्य कर्नाटक में सम्मान से अभिभूत हुईं लेखिका बानू; कहा- बुकर पुरस्कार जीतने का 500% यकीन..

Thu, 29 May 2025 04:49 AM IST
दीपक कुमार शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बंगलूरू

सार

भारत की कन्नड़ भाषा की लेखिका बानू मुश्ताक को साल 2025 का बुकर सम्मान मिला है। पुरस्कार जीतने के बाद गृह राज्य कर्नाटक पहुंची मुश्ताक को कर्नाटक यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स ने बुधवार को बंगलूरू में सम्मानित किया। गृह राज्य में सम्मान मिलने से मुश्ताक अभिभूत दिखाई दीं। 
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बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक - फोटो : पीटीआई
बुकर पुरस्कार विजेता बानू मुश्ताक ने बुधवार को कहा कि उन्हें 500 फीसदी विश्वास था कि वह पुरस्कार जीतेंगी। बानू ने बताया कि उन्होंने पुरस्कार समारोह से तीन दिन पहले ही अपना भाषण लिख लिया था। मुश्ताक बंगलूरू में कर्नाटक यूनियन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स द्वारा आयोजित सम्मान समारोह में बोल रही थीं।

गृह राज्य कर्नाटक में सम्मान से अभिभूत हुईं बानू ने कहा कि शुरू में मैंने पुरस्कार के बारे में ज्यादा नहीं सोचा था। जब मेरा नाम सूची में आया और सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं देखीं, तब मुझे एहसास हुआ कि बुकर पुरस्कार कितना खास है। उन्होंने कहा कि उस रात जब मेरा परिवार सो रहा था, तब मैंने बैठकर भाषण लिखा, जिसे मैंने पुरस्कार जीतने के बाद दिया। बानू ने बताया कि उन्होंने तब से हर दिन भाषण का अभ्यास किया और खुद को बुकर पुरस्कार पकड़े हुए कल्पना की। 

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सम्मान समारोह के दौरान बानू मुश्ताक - फोटो : पीटीआई
प्रकाशक ने बानू की उम्मीदों को कम करने की कोशिश की
सम्मान समारोह को संबोधित करते हुए बानू ने यह भी याद किया कि कैसे उनके प्रकाशक ने उनकी उम्मीदों को कम करने की कोशिश की। उन्होंने बताया कि प्रकाशक ने उनसे कहा था कि बुकर पुरस्कार के इतिहास में कभी भी किसी लघु कहानी संग्रह ने पुरस्कार नहीं जीता है। इस पर उन्होंने प्रकाशक से कहा, 'आप क्यों नहीं मानते कि हम जीत सकते हैं? मुझे 500 फीसदी विश्वास है।'

लोगों को सिखाया कन्नड़ भाषा का सही उच्चारण
मुश्ताक ने यह भी बताया कि लोगों को कन्नड़ भाषा के बारे में बिल्कुल भी जानकारी नहीं थी। वे इसे कनाडा कहने लगे थे। तब उन्होंने लोगों को भाषा का सही उच्चारण सिखाया। मुश्ताक ने कहा, 'मैंने उन्हें कन्न-ना-दा दोहराने के लिए कहा।' 
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बानू मुश्ताक - फोटो : पीटीआई
लंदन से चार घंटे की यात्रा बहुत खूबसूरत थी: बानू
मुश्ताक को 24 मई को वेल्स में हे फेस्टिवल 2025 में पुरस्कार निदेशक गैबी वुड और जज एंटोन हूर के साथ एक पैनल में बोलने के लिए आमंत्रित किया गया था। उन्होंने कहा कि वह वहां की 'पुस्तक संस्कृति' से बहुत प्रभावित हुईं। मुश्ताक ने कहा, 'लंदन से चार घंटे की यात्रा बहुत खूबसूरत थी। इसने मुझे हमारे सकलेशपुरा और कोडागु (कर्नाटक में हिल स्टेशन) या केरल की याद दिला दी। वहां पहुंचने के बाद, मुझे एहसास हुआ कि गांव भले ही छोटा हो, लेकिन यह लेखकों और पाठकों के लिए मक्का है। वहां हर दिन करीब 25,000 लोग आते हैं और उत्सव के 11 दिनों के दौरान 40 से अधिक छोटी किताबों की दुकानों से किताबें खरीदते हैं।'

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बानू मुश्ताक - फोटो : पीटीआई
12 कहानियों का संग्रह है 'हार्ट लैंप'
भारत की कन्नड़ भाषा की लेखिका बानू मुश्ताक को साल 2025 का बुकर सम्मान मिला है। यह पहली बार है जब कन्नड़ भाषा की किताब को यह सम्मान मिला है। बानू मुश्ताक ने यह इतिहास अपनी कहानियों की किताब 'हार्ट लैंप' के लिए रचा है। दीपा भष्ठी ने किताब को अंग्रेजी में अनूदित किया था। बीते मंगलवार 20 मई को रात टेट मॉडर्न में हुए एक समारोह में अपनी अनुवादक दीपा भष्ठी के साथ बानू ने पुरस्कार प्राप्त किया। 12 कहानियों का संग्रह हार्ट लैंप दक्षिण भारत की पितृसत्तात्मकता की व्यथा है। इन कहानियों के दीपा भष्ठी ने 2022 से अनूदित करना शुरु किया था। किताब में 1990 से लेकर 2023 तक की लिखी कहानियों का संग्रह है। कुल मिलाकर यह किताब 30 साल के अधिक समय में लिखी गई है।
 
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