रांची से सटे बुंडु गांव में हाथियों के उत्पात के डर से लोग पेड़ों पर रहने को मजबूर हैं।यहां के लोहराटोला में रहने वाले चार परिवारों ने पेड़ों पर ही अपना ठिकाना बना लिया है। वे खुद को हाथियों से बचाने के लिए पेड़ों पर ही सोते हैं।
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- फोटो : ANI
जंगल किनारे इनका खेत होने के कारण ये मजबूरन यहीं रहते हैं। खेती के अतिरिक्त इनके पास रोजगार का कोई अन्य साधन नहीं । बुंडू का पूरा हुमटा पंचायत हाथी प्रभावित रहा है। हुमटा के गितिलडीह गांव के लोहराटोला जंगल के किनारे रहने के कारण यहां लगभग प्रतिदिन जंगली हाथी आ धमकते हैं। कई बार हाथियों ने इनका घर भी तोड़ डाला है।
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जंगली हाथियों के भय से चारों परिवार दिन में तो खेतों में काम करते है लेकिन रात पेड़ों पर किसी तरह गुजारते हैं। जान बचाने के लिए इन्हें कड़कड़ती ठंढ और बारिश में भी पेड़ पर ही रात गुजारनी पड़ती है। न्यूज एजेंसी एएनआई को ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों ने मकानों को कई बार क्षत-विक्षत कर चुके हैं। वन विभाग से उन्हें कभी कोई मदद नहीं मिली ।
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अपने तीन बच्चों और पत्नी के साथ लगभग तीन वर्षों से पेड़ पर रह रहे परीक्षित लोहरा ने बताया कि बचाव के लिए रात में उनके पास मात्र घुमचा और टार्च ही रहता है। बच्चे दिन में ऐसे पत्थर के टुकड़ों को जमा करते हैं जिनका उपयोग घुमचा में हाथियों को भगाने के लिए किया जा सके।
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वन विभाग से उन्हें कभी कोई मदद नहीं मिली । दो छोटे बच्चों और पत्नी के साथ पेड़ पर रह रहे जानकी मुंडा ने बताया एक साल पहले हाथियों ने उनका घर तोड़ दिया था। दो माह तक गांव से बाहर रहा लेकिन खेती के लिए वापस गांव आना ही पड़ा। मुखिया फेकला गोंझू के प्रयास से लोहराटोला में एक सोलर लाइट भी लगा है लेकिन फिर भी जंगली हाथी आ ही जाते हैं।
मुखिया के अतिरिक्त वे सांसद अथवा विधायक से कभी नहीं मिले और न हीं इन जन प्रतिनिधियों ने कभी उनकी सुध ली। हुमटा के मुखिया फेकला गोंझू ने कहा कि वे इनकी तकलीफ देख बहुत दुखी है। उनकी समस्याओं को कई पदाधिकारियों एवं जन प्रतिनिधियों के समक्ष रखा लेकिन कुछ नहीं हुआ।