‘पोथी पढ़ी-पढ़ी जग मुआ पंडित भया न कोय, ढाई आखर प्रेम के पढ़े सो पंडित होए’। संत कबीर का यह दोहा अपने आप में सारे सवालों का उत्तर है। फरवरी के शुरू होने के साथ ही प्यार का प्रतीक वेलेंटाइन का नशा युवाओं पर चढ़ने लगा है।
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PIC: फरवरी के साथ छाने लगा वेलेंटाइन का नशा
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भगवान के स्वरूप प्रेम के लिए वैसे कोई भी दिन या सप्ताह या साल नहीं होता, लेकिन वसंत ऋतु हमेशा प्रेम के लिए जानी जाती है। इसी ऋतु में प्रेम का उत्सव मनाया जाता है जो आधुनिक रूप में वेलेंटाइन डे कहा जाता है।
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वेलेंटाइन डे भले ही चौदह फरवरी को होता हो, मगर इसका खुमार सात फरवरी से ही शुरू हो जाता है। सात से तेरह फरवरी तक हर दिन किसी खास विषय को समर्पित होगा। यानी वेलनटाइन डे से पहले सात दिन।
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सात यानी सात जन्मों का प्रेम, विवाह के सात फेरे, सरगम के सात सुर आदि। प्रेम के इस खास मौके के लिए युवाओं ने अभी से तैयारी करना शुरू कर दी है।
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इस खास मौके पर अपने खास को कुछ खास देने के लिए आर्चीज गैलरियों में गिफ्टों का पहुंचना शुरू हो गया है। परेड में आर्चीज गैलरी चला रहे आलोक कहते हैं कि सोमवार से गैलरी में वेलेंटाइन को लेकर सजावट शुरू हो जाएगी।
गिफ्टों के लिए युवाओं की ज्यादा भीड़ पहुंचती है। कट्टरपंथियों की धमकियों के बाद प्रेमी अपने प्यार का इजहार करने में पीछे नहीं रहते हैं। इस बार रविवार से वेलेंटाइन वीक की शुरुआत हो रही है।