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मजदूरों का दर्द: घर-गांव से दूर, अब जेब नहीं पेट के लिए जारी है संघर्ष

Fri, 01 May 2020 01:46 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन - फोटो : अमर उजाला
देशभर में फैली कोरोना महामारी को रोकने के लिए तीन मई तक लागू किए गए लॉकडाउन से लगभग सभी कारोबार ठप पड़े हैं। इसका सबसे ज्यादा असर प्रवासी मजदूरों पर पड़ा है। कामकाज ठप होने से उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
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जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन - फोटो : बासित जरगर
लॉकडाउन के बाद मजदूर पैदल अपने घरों को कूच कर रहे हैं। जानकारी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में इस वक्त 40 से 50 हजार प्रवासी मजदूर हैं। 28 अप्रैल को केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उप-राज्यपाल आरके माथुर ने बताया था कि लद्दाख में भी 14 हजार मजदूर फंसे हुए हैं।

 
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जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन - फोटो : बासित जरगर
दूसरे राज्यों से आकर जम्मू-कश्मीर में खेतीबाड़ी, भवन निर्माण, सड़क निर्माण, ढाबों में ये मजदूर काम कर रहे थे, लेकिन लॉकडाउन के कारण सभी कामकाज ठप पड़े हैं। ऐसे में इनको अब परेशानी हो रही है। कई श्रमिक परिवार सहित यहां रहते हैं। ऐसे में बिना कामकाज परिवार को अब दो वक्त की रोटी का प्रबंध करना भी मुश्किल होता जा रहा है।

 

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जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन - फोटो : अमर उजाला
पेंटर का काम करने वाले एक श्रमिक ने बताया कि वह उत्तर प्रदेश के बरेली का रहने वाला है। पिछले 10 वर्षों से परिवार के साथ यहीं रह रहा है। लोगों के घरों में रंग-रोगन का काम करके कमाई करता था, लेकिन एक महीने से ज्यादा समय हो गया है कोई काम नहीं मिला। अब परिवार के भरण पोषण की चिंता सताने लगी है। आगे भी काम किस तरह से शुरू होंगे इस पर भी कुछ नहीं कहा जा सकता। ऐसे ही कई अन्य मजदूरों ने अपनी व्यथा सुनाई। सभी का कहना यही था कि अब पैसा कमाने और जोड़ने की बात तो बहुत दूर है, अभी तो पेट भरने के लिए सोचना पड़ रहा है।

 
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जम्मू-कश्मीर में लॉकडाउन - फोटो : अमर उजाला
लॉकडाउन के बाद 25 मार्च से रेलवे सहित अन्य परिवहन सेवाएं बंद हैं। अपने गांवों को छोड़कर दूसरे राज्यों में रोजी-रोटी कमाने आए श्रमिकों को वापस आने-जाने के लिए कोई परिवहन सुविधा नहीं मिल पा रही है। इस कारण मजदूरों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। मजदूरों ने जो कुछ अब तक कमाया था, वह सारा पैसा खत्म हो चुका है। रोजगार भी छिन चुका है। ऐसे में मजदूरों का भविष्य अनिश्चिता के घेरे में है।
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