रियासती सरकार का दरबार सोमवार को जम्मू सचिवालय में सज गया। अगले छह महीने तक रियासत की राजधानी यहीं रहेगी। सचिवालय में सुबह मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद को गार्ड आफ आनर दिया गया। इसके अलावा दरबार से जुड़े राजभवन, हाईकोर्ट, पुलिस मुख्यालय व आयोगों के कार्यालय भी खुल गए। दरबार खुलने के साथ ही शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है।
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मुख्यमंत्री को गार्ड आफ आनर के साथ कामकाज शुरू
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सचिवालय जाने वाले रास्ते पर चप्पे-चप्पे पर निगरानी है। श्रीनगर में 30 अक्टूबर को दरबार बंद हो गया था। ज्ञात हो कि दरबार मूव की प्रक्रिया 141 साल पुरानी है। डोगरा महाराजा रणबीर सिंह के समय से वर्ष 1872 से यह प्रक्रिया चलती आ रही है।
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सुबह साढ़े नौ बजे मुख्यमंत्री के पहुंचते ही उन्हें गार्ड आफ आनर दिया गया। इस दौरान उप मुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह सहित मंत्रिमंडल के सहयोगी, चीफ सेक्रेटरी बीआर शर्मा, डीजीपी के राजेंद्रा, विभिन्न प्रशासनिक सचिवों, वरिष्ठ अधिकारियों तथा सचिवालय के कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया। सिविल सेक्रेटिएट नान गजटेड इंप्लाइज यूनियन तथा लो पेड इंप्लाइज यूनियन के पदाधिकारियों ने उन्हें बुके प्रदान कर सचिवालय में पहले दिन कामकाज शुरू करने की शुभकामनाएं दी।
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उधर, मुख्य सचिव बीआर शर्मा ने विभिन्न कालोनियों में दरबार मूव कर्मचारियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की समीक्षा की। बिजली, पानी, कूड़ा निस्तारण, गाड़ियों की पार्किंग तथा सुरक्षा व्यवस्था की जानकारी ली। उन्होंने कर्मचारियों को हर प्रकार की सुविधाएं मुहैया कराने की हिदायत दी। जम्मू-कश्मीर लेजिस्लेटिव काउंसिल के डिप्टी चेयरमैन जहांगीर मीर ने भी काउंसिल सचिवालय का दौरा किया। उनके साथ सचिव अब्दुल मजीद भट थे।
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उन्होंने अधिकारियों की बैठक में विभिन्न कमेटियों से समय पर एक्शन टेकेन रिपोर्ट लेने को कहा। राज्यपाल एनएन वोहरा ने राजभवन के विभिन्न विभागों का दौरा कर अधिकारियों को साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने को कहा। साथ ही अतिथियों से बेहतर व्यवहार करने, रिकार्ड का बेहतर रखरखाव, डिजास्टर मैनेजमेंट की तैयारियां तथा मामलों के त्वरित निराकरण पर बल दिया। उन्होंने राजभवन के लान और गार्डन का भी निरीक्षण किया। उन्होंने सोलर पावर प्लांट तथा सीआरपीएफ एवं जेके पुलिस कैंप का भी निरीक्षण किया।
जम्मू में सचिवालय खुलने के साथ ही पहले दिन कर्मचारियों ने मुख्यमंत्री के समक्ष विरोध दर्ज कराया। मुख्यमंत्री जब गार्ड आफ आर्डर ले रहे थे तो कर्मचारी अपने सीने पर विभिन्न मांगों से जुड़े नारे लिखे पोस्टर लगाकर विरोध दर्ज करा रहे थे। उनकी मांग थी कि एस्टेट निदेशक को हटाया जाए। इसके साथ ही उनके कार्यकाल के विभिन्न आदेशों की जांच कराई जाए। सचिवालय कर्मचारियों का एकोमोडेशन कोटा बहाल किया जाए। हालांकि, इस दौरान उन्होंने किसी प्रकार की नारेबाजी नहीं की।