फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

144 साल पुरानी परंपरा के लिए हर साल खर्च होते है 500 करोड़

विज्ञापन
1 of 9
जम्मू कश्मीर में हर साल एक पंरपरा निभाने के लिए सरकार 500 करोड़ रुपए खर्च कर देती है। यह राशि साल दर साल बढ़ती चली जा रही है। दरअसल जम्मू कश्मीर में साल में दो बार राजधानी परिवर्तन किया जाता है।
विज्ञापन

144 साल पुरानी परंपरा के ल‌िए हर साल खर्च होते है 500 करोड़

2 of 9
दरबार मूव परंपरा के तहत राज्य की राजधानी छह महीने जम्मू और छह महीने श्रीनगर रहती है। राज्य में 144 साल पुरानी दरबार मूव की परंपरा के तहत सोमावर को शीतकालीन राजधानी जम्मू में सचिवालय का गार्ड ऑफ ऑनर के साथ शुभारम्भ हुआ।
विज्ञापन

144 साल पुरानी परंपरा के ल‌िए हर साल खर्च होते है 500 करोड़

3 of 9
जम्मू कश्मीर देश का एक अकेला ऐसा राज्य है जिसका दो राजधान‌ियां है। गर्म‌ियों में सच‌िवालय श्रीनगर स्थानांतर‌ित कर द‌िया जाता है। जबक‌ि सर्द‌ियों में सच‌िवालय जम्मू में आ जाता है।

144 साल पुरानी परंपरा के ल‌िए हर साल खर्च होते है 500 करोड़

4 of 9
प‌िछले 144 सालों से राजधानी को हो हर साल इसी तरह पर‌िवर्त‌ित क‌िया जाता रहा है। इसमें सरकार को भारी भरकम राश‌ि को खर्च करना पड़ता है।
विज्ञापन

144 साल पुरानी परंपरा के ल‌िए हर साल खर्च होते है 500 करोड़

5 of 9
दरबार मूव के दौरान रिकार्ड तथा कर्मचारियों को लाने के लिए सकैंड़ो ट्रक और बसों का इंतजाम क‌िया जाता है। राजधानी का पर‌िवर्तन 1872 में डोगरा शासनकाल में राज्य की प्रार्कतिक एवं भौगोलिक परिस्थितियों के चलते इसे शुरु किया गया था।
विज्ञापन

144 साल पुरानी परंपरा के ल‌िए हर साल खर्च होते है 500 करोड़

6 of 9
डोगरा महाराजा गुलाब सिंह ने दरबार मूव की परंपरा की शुरुआत की थी। उस समय ये काम बैल गाड़ी और घोड़ा गाड़ी से होता था। उस समय दोनों जगह महाराजा का दरबार शिफ्ट होने के बाद एक बड़ा समारोह आयोजित किया जाता था।
विज्ञापन

144 साल पुरानी परंपरा के ल‌िए हर साल खर्च होते है 500 करोड़

7 of 9
सरकार सचिवालय सहित अन्य प्रमुख कार्यालयों में कार्य करने वाले 8 हजार से अध‌िक कर्मचारियों को टीए भत्ते के तौर पर ही प्रत्येक कर्मचारी को दस हजार रुपये दिए जाते हैं।

144 साल पुरानी परंपरा के ल‌िए हर साल खर्च होते है 500 करोड़

8 of 9
कई बार इस पंरपरा को रोकने को ल‌िए व‌िरोध भी क‌िए जा चुके हैं। लेक‌िन इसको फ‌िलहाल सरकार रोकने के ल‌िए तैयार नहीं है। इसके पीछे उनका मकसद जम्मू और कश्मीर के लोगों के बीच आपसी भाईचारा व सौहार्द कायम करना है।

विज्ञापन

144 साल पुरानी परंपरा के ल‌िए हर साल खर्च होते है 500 करोड़

9 of 9
दुन‌िया भले ही इसे फ‌िजूल खर्च कहे ल‌ेक‌िन दरबार मूव की पंरपरा यहां के लोगों की ज‌िंदगी एक सबसे खास ह‌िस्सा बन चुकी है। दोनों ही शहर इस खास परंपरा के ल‌िए रह साल बड़े इंतजार में रहते हैं।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें