फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कारगिल के जांबाज विक्रम बत्रा की अनसुनी कहानी, जानिए किससे कहा- तू बाल बच्चेदार है हट जा पीछे

Tue, 07 Jul 2020 11:05 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
विज्ञापन
1 of 5
विक्रम बत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
जब-जब कारगिल युद्ध की बात आती है सेना के एक ऐसे जांबाज का नाम जरूर आता है जिसने पाकिस्तान के नापाक मंसूबों की धज्जियां उड़ा दी थीं। सेना के इस जांबाज विक्रम बत्रा को शेरशाह के नाम से जाना जाता था।
विज्ञापन

2 of 5
विक्रम बत्रा - फोटो : सोशल मीडिया
7 जुलाई 1999
कारगिल युद्ध की सबसे मुश्किल चुनौतियों में शुमार प्वाइंट 4875 पर मोर्चा संभालना लोहे के चने चबाने जैसा था। ऊपर चढ़ने की संकरी जगह और ठीक सामने दुश्मन का ऐसी पोजीशन पर होना जहां से आसानी से वो आपको अपना निशाना बना सकता है। इन सब मुश्किलों के बाद भी इस बहादुर के कदमों को दुश्मन रोक न सके।
 
विज्ञापन

3 of 5
vikram batra - फोटो : सोशल मीडिया
बिजली की गति से दुश्मन के मोर्चे पर धावा बोलकर कैप्टन विक्रम बत्रा ने पहले हैंड टू हैंड फाइट की और उसके बाद प्वाइंट ब्लैक रेंज से दुश्मन के पांच सैनिक ढेर कर दिए। गहरे जख्म होने पर भी बत्रा यहीं नहीं रुके। वो क्रॉलिंग करते हुए दुश्मन के करीब तक पहुंचे और ग्रेनेड फेंकते हुए पोजीशन को क्लियर कर दिया।

 

4 of 5
vikram batra - फोटो : सोशल मीडिया
टीम का नेतृत्व कर रहे विक्रम बत्रा ने अपनी टीम में पूरी ताकत के साथ लड़ने का जुनून भर दिया। जब जख्मी विक्रम बत्रा को उनके सूबेदार ने रेस्क्यू करने की कोशिश की तो वो बोले तू बाल बच्चेदार है, हट जा पीछे।

यह भी पढ़ें- कारगिल युद्धः जब विक्रम बत्रा से पाकिस्तानी घुसपैठिया बोला- हमें माधुरी दीक्षित दे दो, ऐसा मिला जवाब    


 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
vikram batra - फोटो : सोशल मीडिया
इसके बाद दुश्मन की गोली से विक्रम बत्रा शहीद हो गए। बाद में उनकी टीम ने प्वाइंट 4875 को वापस कब्जाने का लक्ष्य हासिल कर लिया। विक्रम बत्रा के अदम्य साहस और नेतृत्व प्रदर्शन के लिए उन्हें परमवीर चक्र का सम्मान दिया गया।

यह भी पढ़ेंः कारगिल विजय के 21 साल: भारत के इस ‘बहादुर’ का खौफ इतना था कि पाकिस्तान कहता था 'चुड़ैल'

 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें