पहली अप्रैल से पंद्रह दिन के लिए प्रस्तावित आयोजन को सफल बनाने की तैयारियां जोरशोर से शुरू हो गई हैं।
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46 किस्मों के 20 लाख से अधिक ट्यूलिप बल्ब (फूल) का दिलकश नजारा इस बार देखते ही बनेगा।
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फेस्टिवल के दौरान न सिर्फ ट्यूलिप गार्डन की रंगत अलग होगी, बल्कि आलमी मुशायरा सरीखे आयोजन भी इसे बेहद खास बनाएंगे।
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पर्यटन एवं उद्यानिकी सचिव फारूक अहमद शाह ने बताया कि एक अप्रैल से पंद्रह दिवसीय ट्यूलिप फेस्टिवल आयोजित करने की तैयारियां चल रही हैं। डल झील से सटे ट्यूलिप गार्डन में फेस्टिवल को बहार-ए-कश्मीर से जोड़कर मनाया जाएगा।
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शाह ने कहा, एशिया के सबसे बड़े ट्यूलिप गार्डन में हर साल बड़ी तादाद में सैलानी पहुंचते हैं।
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इस बार फेस्टिवल के तौर पर खास माहौल बनाया जा रहा है, ताकि रूटीन से ज्यादा संख्या में सैलानियों को घाटी में आकर्षित किया जा सके।
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फेस्टिवल में ट्यूलिप गार्डन की खूबसूरती के साथ हैंडीक्राफ्ट के स्टाल, स्थानीय परंपरा से जुड़ी खान-पान की सामग्री के स्टाल, सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होंगे।
ट्यूलिप गार्डन को सिराज बाग के रूप में पहचाना जाता था जिसे बाद में इंदिरा गांधी मैमोरियल ट्यूलिप गार्डन का नाम देकर वर्ष 2008 में फिर से खोला गया। ज्ञात हो कि वर्ष 2016 में कश्मीर हिंसा की वजह से घाटी में पर्यटन को व्यापक नुकसान पहुंचा है।