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ऑपरेशन नागबेरन की कहानी: जनजातीय महिलाओं का शारीरिक उत्पीड़न करते थे आतंकी, दुर्गम इलाके में ऐसे मारे गए

Sun, 22 Aug 2021 09:40 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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आतंकियों को मार गिराने वाली संयुक्त टीम के जवान - फोटो : भारतीय सेना
दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले के त्राल के जंगल में शनिवार को सुरक्षा बलों ने जैश-ए-मोहम्मद के तीन आतंकियों को मार गिराया। इसमें टॉप-10 की सूची में शामिल दहशतगर्द वकील शाह भी शामिल है। उसने त्राल नगर परिषद के अध्यक्ष एवं भाजपा नेता राकेश पंडिता समेत कई लोगों की हत्या की थी। मारे गए आतंकियों के पास से दो एके 47, एक एसएलआर, एक यूबीजीएल और अन्य हथियार बरामद हुए हैं। यह यूबीजीएल 11 दिसंबर 2018 को शोपियां के जैनापोरा में अल्पसंख्यक चौकी पर हमला कर लूटा गया था। मारे गए आतंकी जनजातीय महिलाओं का शारीरिक उत्पीड़न भी करते थे। आईजी कश्मीर और विक्टर फोर्स के जीओसी ने इसे बड़ी कामयाबी बताया है।

आईजी कश्मीर विजय कुमार ने बताया कि अवंतीपोरा पुलिस को सूचना मिली थी कि आतंकी संगठन जैश का एक ग्रुप नागबेरन त्राल के ऊपरी इलाके तारसर-मारसर के जंगल में छिपा हुआ है। इस इनपुट के आधार पर पुलिस ने सेना की 42 राष्ट्रीय राइफल्स और सेना की स्पेशल पैरा फोर्स के साथ इलाके में साझा ऑपरेशन शुरू किया। शनिवार सुबह आतंकियों के साथ कांटेक्ट हुआ और भीषण मुठभेड़ शुरू हुई।
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इसी वन क्षेत्र में मारे गए आतंकी - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि इसमें जैश के तीन आतंकी मारे गए। मारे गए तीन आतंकियों में से एक की शिनाख्त वकील शाह के तौर पर हुई। यह हाल ही में आतंकियों की जारी की गई टॉप-10 की सूची में शामिल था। इसने ही भाजपा नेता राकेश पंडिता की हत्या की थी और उसका मारा जाना सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि है। मारे गए अन्य आतंकियों में अब्दुल हमीद चोपान था जिसका बेटा आदिल चोपान भी आतंकी था। उसे 2017 में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में मार गिराया था। हमीद भी नागरिकों की हत्या में शामिल था। तीसरे आतंकी की पहचान पुलवामा के खेलन निवासी इलियास नजर के रूप में हुई है। वह जून 2019 से सक्रिय था।

 
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त्राल वन क्षेत्र - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने बताया कि यह एक कठिन ऑपरेशन था और उनके जवान टारगेट के काफी नजदीक पहुंच चुके थे। आतंकियों को आत्मसमर्पण करने का मौका दिया लेकिन उन्होंने अंदर से फायरिंग की और जवाबी कार्रवाई में मारे गए। सबसे अच्छी बात इस ऑपरेशन की यह रही कि मुठभेड़ के दौरान ढोक में रह रहे गुज्जर समुदाय के लोगों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा। बिना किसी नुकसान के इस ऑपरेशन में बहुत बड़ी कामयाबी हासिल हुई।

 

 

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आईजी विजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
आईजीपी ने बताया कि आतंकी इन लोगों का आर्थिक और शारीरिक शोषण करते थे जिसकी कई बार उन्हें शिकायत भी मिली थी। उनके जवान काफी पेशेवर तरीके से काम करते हैं। उन्होंने आतंकियों को एक कड़ा संदेश देते हुए कहा कि वह यह न समझें की वह नागरिकों की हत्या कर पहाड़ पर छिप कर आराम से बैठेंगे। हमारी फोर्स वहां भी उन्हें ट्रैक कर मार गिराएगी।

 
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इसी वन क्षेत्र में मारे गए आतंकी - फोटो : अमर उजाला
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार मारा गया आतंकी वकील शाह सुरक्षाबलों पर हमले और नागरिकों की हत्या की साजिश रचता था। उसके खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हैं। वह नागरिकों को पुलिस और सुरक्षाबलों का मुखबिर बता हत्याएं करता था। वह राकेश पंडिता के अलावा नूराबाद त्राल के शब्बीर अहमद भट, त्राल पाईन के मोहम्मद अयूब अहंगर, डार गनई गुंड की शकीला बेगम, हरिपरिगाम में एसपीओ फैयाज अहमद, उसकी पत्नी रजा बेगम और बेटी रफिया जान की हत्या में शामिल था। इसके अलावा उसके खिलाफ सुरक्षाबलों पर ग्रेनेड हमले के कई मामले दर्ज थे। त्राल बस स्टैंड में ग्रेनेड हमले में भी वह शामिल था। इसके साथ ही त्राल पाईन में नशे की खेप और विस्फोटक की बरामदगी मामले में भी उस पर केस चल रहा था।

 
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सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला
सेना की दक्षिण कश्मीर में कमान संभालने वाले जीओसी मेजर जनरल रशिम बाली ने कहा कि इस ऑपरेशन को लेकर जो इनपुट मिला वह एक ह्यूमन इंट था। उन्होंने बताया कि जिस इलाके में आतंकियों के खिलाफ  ऑपरेशन चलाया गया वह काफी दुर्गम इलाका है। आतंकियों का यह ग्रुप पिछले काफी समय से इलाके में सक्रिय था। उन्हें पहले भी काफी शिकायतें मिली थीं कि यह आतंकी गुज्जर समुदाय की कुछ महिलाओं का शारीरिक शोषण करते थे और उनकी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचा रहे थे। ऑपरेशन से साफ संदेश है कि आतंकी जहां भी जाएंगे उन्हें मार गिराया जाएगा। आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी रहेगा।  

 
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सुरक्षाबल - फोटो : अमर उजाला
आईजी विजय कुमार ने बताया कि आरपीजी और इस तरह के हथियारों की भीतरी इलाकों में मौजूदगी की सुरक्षा बलों को जानकारी नहीं है। हमने अपने खुफिया तंत्र को सक्रिय कर दिया है और अगर ऐसा कोई खतरा है तो हम उसे बेअसर कर देंगे। सुरक्षा एजेंसियां तैयार हैं और आतंकवाद निरोधक ग्रिड को मजबूत बनाया गया है। इस साल अब तक केवल एक विदेशी आतंकी मारा गया जिसने हाल ही में घुसपैठ की थी। उनसे पूछा गया था कि क्या 13 अगस्त को कुलगाम में हुई मुठभेड़ में पाकिस्तानी आतंकवादी उस्मान के मारे जाने के दौरान घाटी के अन्य इलाकों में भी ऐसे हथियार उपलब्ध हैं।
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