शिक्षा विभाग सरकारी स्कूलों में मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के दावे तो करता है, लेकिन मेंढर की बालाकोट तहसील के गांव चंडेयाल स्थित प्राइमरी स्कूल इन दावों की पोल खोल रहा है। हैरानी यह है कि प्राइमरी स्कूल कला करमाड़ी पिछले सात वर्षों से बिना भवन के चल रहा है। विद्यार्थी कभी कहीं तो कभी कहीं खुले आकाश तले बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं। स्कूल में 40 विद्यार्थी हैं।
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पढ़ते हुए विद्यार्थी
- फोटो : अमर उजाला
बारिश और तेज धूप में अकसर बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। इससे उनकी पढ़ाई प्रभावित हो रही है। गांव वाले कई दफा स्कूल के लिए भवन की मांग कर चुके हैं, लेकिन विभाग सात वर्षों से इस मुद्दे पर मूकदर्शक बना हुआ है।
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स्कूल की इमारत
- फोटो : अमर उजाला
गांव निवासी मोहम्मद आजम खान, अब्दुल गफार और मोहम्मद सदर का कहना है कि वर्ष 2014 में भारी बारिश और भूस्खलन से प्राइमरी स्कूल कला करमाड़ी का भवन पूरी तरह ध्वस्त हो गया था। उसके बाद से आज तक दोबारा स्कूल का भवन नहीं बनाया गया है।
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कक्षा की तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
इमारत किराये पर भी नहीं ली जा सकी। हमने कई बार शिक्षा विभाग के अधिकारियों से स्कूल का पुनर्निर्माण कराने की मांग की लेकिन कोई कार्रवाई नहीं। गांव के बच्चे खुले आकाश तले पढ़ाई करने को मजबूर हैं। उन्होंने उपराज्यपाल से स्कूल का पुनर्निर्माण कराने की मांग की। जब तक स्कूल का भवन नहीं बनता किराये पर इमारत लेकर कक्षाएं लगाई जाएं।
मुझे कुछ माह पहले ही पुंछ का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। ऐसे में पुंछ के बारे में अधिकारी जानकारी नहीं है। इस बारे में जेडईओ से रिपोर्ट तलब मांगी जाएगी, जल्द ही इस समस्या के समाधान के लिए कदम उठाए जाएंगे। -गुलजार हुसैन, मुख्य शिक्षा अधिकारी, पुंछ