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उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना: बड़े खास हैं ये सात स्टेशन, 4 स्टेशनों से पहली बार गुजरेंगी ट्रेनें

Thu, 05 Jun 2025 12:29 PM IST
शाहरुख खान अरुण कुमार, अमर उजाला, जम्मू

सार

उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना में बक्कल, सुम्बड़, रियासी जैसे स्टेशन नई पहचान देंगे। सामरिक और पर्यटन की दृष्टि से ये रेलवे स्टेशन काफी अहम हैं। चार स्टेशनों से पहली बार ट्रेनें गुजरेंगी। पर्यटकों का मन मोह लेंगे।
 
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बड़े खास हैं ये सात स्टेशन - फोटो : संवाद
उधमपुर-श्रीनगर-बारामुला रेल लिंक परियोजना में 25 रेलवे स्टेशन आते हैं। 2014 में उधमपुर से कटड़ा तक पहली बार ट्रेन दौड़ी। 2013 में बनिहाल-बारामुला के बीच जबकि 2024 में बारामुला से संगलदान तक आगे बढ़ी। अब रियासी, बक्कल, डुगा, सावलकोट स्टेशनों से पहली बार ट्रेनें गुजरेंगी। 

कटड़ा से बनिहाल तक 111 किमी. के रेलखंड में सात रेलवे स्टेशन हैं। इनमें से चार रेलवे स्टेशनों से पहली बार ट्रेन गुजरेगी। पहली बार इस रूट पर वंदे भारत दौड़ेगी, जिससे वे स्टेशन देश के मानचित्र पर आ जाएंगे। ये स्टेशन इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि भौगोलिक चुनौतियां यहां ज्यादा थीं। पर्यटन और सामरिक दृष्टि से भी बेहद अहम हैं। 


पर्यटकों का मोह लेंगे मन 
कटड़ा से श्रीनगर तक ट्रेन शुरू हो जाने से पर्यटकों की कश्मीर की राहें तो आसान होंगी ही, रियासी और रामबन जिले में पड़ने वाले पर्यटन स्थलों का विकास भी होगा। इससे रोजगार की उम्मीदों को भी पंख लगेंगे। लोगों को ये उम्मीदें कटड़ा से श्रीनगर तक के सफर में पड़ने वाले सात स्टेशनों से है। इसकी बड़ी वजह यह है कि इन स्टेशनों के आसपास के मनोरम प्राकृतिक दृश्य लोगों का ध्यान बरबस ही खींच लेते हैं। इनमें से तीन रियासी और तीन रामबन जिले में स्थित हैं। अंजी खड्ड केबल स्टेड ब्रिज के साथ ही चिनाब आर्च ब्रिज की लाजवाब इंजीनियरिंग तो पर्यटकों को आकर्षित करेगी ही, वे सैर-सपाटा के लिए आसपास के खूबसूरत स्थल भी जा सकेंगे।
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रियासी रेलवे स्टेशन - फोटो : संवाद
रियासी रेलवे स्टेशन : यूएसबीआरएल परियोजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां दो प्लेटफाॅर्म हैं। इस स्टेशन से कटड़ा रेलवे स्टेशन 17 किमी दूर है। रियासी रेलवे स्टेशन के आसपास का क्षेत्र प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर है। रियासी शहर से रियासी रेलवे स्टेशन पांच किमी दूर है।


 
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बक्कल रेलवे स्टेशन - फोटो : संवाद
बक्कल रेलवे स्टेशन : यह रियासी जिले में आता है। स्टेशन समुद्र तल से 858 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद है। यहां दो प्लेटफॉर्म हैं। यह स्टेशन चिनाब नदी पर बने विश्व के सबसे ऊंचे आर्च पुल के दक्षिण में स्थित है। चिनाब नदी के किनारे स्थित यह रेलवे स्टेशन पर्यटन की दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। स्टेशन के आसपास का क्षेत्र हरा-भरा और सुरम्य है। सेना और आपदा प्रबंधन के लिए यह स्टेशन रणनीतिक दृष्टि से अहम है।

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डुगा रेलवे स्टेशन - फोटो : संवाद
डुगा रेलवे स्टेशन
यह स्टेशन रामबन जिले में है। चिनाब पुल से बनिहाल की तरफ जाने पर यह रेलवे स्टेशन आता है। यह स्टेशन दो नालों के ऊपर बने ब्रिज के ऊपर है। इसमें एक डुगा खंड और एक डुगा नाला है। इसके दो प्लेटफॉर्म हैं। स्टेशन का आधा हिस्सा टनल- 42 के अंदर है। इस टनल की लंबाई 9.3 किमी है। यह पहला स्टेशन जो पुल के ऊपर बना है।
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सावलकोट रेलवे स्टेशन - फोटो : संवाद
सावलकोट रेलवे स्टेशन
समुद्र तल से 1036 मीटर की ऊंचाई पर यह स्टेशन बना है। इस रेलवे स्टेशन के दो प्लेटफाॅर्म हैं। रेलवे स्टेशन के पास कई महत्वपूर्ण टनल हैं। टनल टी-42 9.3 किमी टनल-43 6.2 किमी, टनल टी-44 11.3 किमी लंबी है। सावलकोट रेलवे स्टेशन का 150 मीटर क एक हिस्सा टनल के अंदर है। इस स्टेशन का क्षेत्र काफी दुर्गम और भुरभुरा है। इन चट्टानों को मजबूत किया है। इस स्टेशन पर करीब 45 करोड़ रुपये का खर्च आया है।
 
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संगलदान रेलवे स्टेशन - फोटो : संवाद
संगलदान रेलवे स्टेशन
रामबन जिले में आता है। यह स्टेशन समुद्र तल से 1232 मीटर की ऊंचाई पर बना है। इसके तीन प्लेटफाॅर्म हैं। संगलदान और सावलकोट रेलवे स्टेशन के बीच टनल टी-44 है। कटड़ा से बनिहाल के बीच यह मुख्य स्टेशन है। इस स्टेशन को पहाड़ काटकर बनाया गया है। स्टेशन पर परिचालन शुरू हो चुका है। यह स्टेशन सामरिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है।
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सुम्बड़ रेलवे स्टेशन - फोटो : संवाद
सुम्बड़ रेलवे स्टेशन
यह स्टेशन भी रामबन जिले में आता है। यह स्टेशन समुद्र तल से 1418 मीटर की ऊंचाई पर बना है। यहां एक प्लेटफाॅर्म है। यह स्टेशन पहाड़ों के बीच है। इस स्टेशन का निर्माण दुर्गम और भूस्खलन से प्रभावित रहने वाले क्षेत्र में हुआ है, जो इंजीनियरिंग के लिहाज से इसे खास बनाता है। इस रेलवे स्टेशन पर डीएमयू चलती है। इस स्टेशन से गुजरते हुए बर्फ से ढके पहाड़ मन मोह लेते हैं।
 
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खड़ी रेलवे स्टेशन - फोटो : संवाद
खड़ी रेलवे स्टेशन
यह स्टेशन रामबन जिले में आता है। इस स्टेशन को पहाड़ों के बीच बनाया गया है। स्टेशन समुद्र तल से 1560 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां एक प्लेटफाॅर्म और दो ट्रैक हैं। खड़ी रेलवे स्टेशन के पास टनल टी-50। यह भारत की सबसे लंबी परिवहन टनल है।
 
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