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जम्मू-कश्मीरः पुराने रूट के सहारे आतंकवाद को दोबारा जिंदा करने की फिराक में आतंकी

Sat, 06 Jun 2020 12:57 PM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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आतंकी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया
कालाकोट में गुरुवार को हुई मुठभेड़ से साफ हो गया कि आतंकी संगठन राजोरी और पुंछ जिले में भी माहौल खराब करने की साजिश रच रहे हैं। कालाकोट कभी आतंक का गढ़ रहा है। करीब 10 साल बाद यहां मुठभेड़ हुई, जिसमें सुरक्षाबलों ने एक आतंकी को मार गिराया। सूत्रों की मानें तो डोडा, किश्तवाड़ और रामबन की तरह ही आतंकी संगठन कालाकोट, नौशेरा, सुंदरबनी और रियासी में पुराने रूट के सहारे आतंकवाद को दोबारा जिंदा करने की फिराक में हैं।

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आतंकी सुंदरबनी और नौशेरा से घुसपैठ करके कालाकोट के रास्ते रियासी और बुद्धल की तरफ निकल जाते थे। यहां से कुछ आतंकी रियासी से होकर जम्मू संभाग और कुछ आतंकी बुद्धल से होकर कश्मीर संभाग जाते थे। आतंकी फिर से ऐसा ही करने लगे हैं।

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सूत्रों की मानें तो कालाकोट में मारा गया आतंकी उसी ग्रुप का हिस्सा है, जिसने 25 मई को नौशेरा सेक्टर से घुसपैठ की थी। सेना ने इनमें से तीन आतंकियों को घुसपैठ करते ही मार गिराया था। इसके कब्जे से भारी मात्रा में गोला बारूद और 60 से अधिक वस्तुएं बरामद की गई थीं।
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घुसपैठ करने वाले आतंकी अपने साथ इतना सामान ला रहे हैं कि आसानी से कहीं पर भी ठिकाना बनाकर 15 से 20 दिन रह सकते हैं। इतने दिनों में वह ओजीडब्ल्यू (ओवर ग्राउंड वकर्र) के साथ जुड़कर नई रणनीति बना सकते हैं। डोडा-किश्तवाड़ में भी ऐसा ही किया जा रहा था। वहीं बड़े स्तर पर एलओसी से घुसपैठ कर क्षेत्र में हमले करने की फिराक में आतंकी बैठे हुए हैं।

सेना के एक अधिकारी ने बताया कि एलओसी पर लगातार पाकिस्तान की तरफ से फायरिंग की जा रही है, ताकि आतंकियों की घुसपैठ कराकर क्षेत्र में माहौल खराब किया जा सके। बता दें कि तीन जून के अंक में अमर उजाला ने पहले ही खुलासा कर दिया था कि आतंकी संगठन राजोरी और पुंछ जिले में माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रहे हैं। 1990 की तरह ही दहशतगर्दी फैलाने की साजिश रची जा रही है। 
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