रियासत मंगलवार को दो फिदायीन हमलों से थर्रा उठी। आतंकवाद के 26 साल के इतिहास में पहली बार सेना मुख्यालय पर हुए हमले में दो अफसर और पांच जवान शहीद हो गए।
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- फोटो : Amar Ujala
सेना के जवानों ने तीन फिदायीन हमलावरों को ढ़ेर कर दिया। आतंकियों ने 12 जवानों, 2 महिलाओं और 2 बच्चों को बंधक बना लिया था।
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बंधकों को छुड़ा लिया गया है। बंधकों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश के कारण आपरेशन पूरा करने में भी लगभग दस घंटे का वक्त लग गया।
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घने अंधेरे के कारण आपरेशन रोक दिया गया है। अभी और आतंकियों की मौजूदगी की आशंका से सेना ने इनकार नहीं किया है। बुधवार सुबह फिर से आपरेशन शुरू किया जाएगा।
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पाकिस्तान में नए सेनाध्यक्ष की ताजपोशी के दिन हुए हमले में महाराष्ट्र पंढरपुर निवासी मेजर कुणाल गोसावी, नांदेड़ के लांसनायक संभाजी कदम और कास्टेबुल राघवेंद्र शहीद हो गए।
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हमलों के बाद राज्य में हाई अलर्ट कर दिया गया है। आतंकियों ने तड़के जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर सेना मुख्यालय से करीब तीन किलोमीटर दूर 166 आर्टिलरी यूनिट पर हमला किया।
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सबसे पहले संतरी को गोली मारने के बाद यूनिट में दाखिल हुए। आतंकियों ने आफिसर मेस के दो भवनों को कब्जे में ले लिया जिसमें 12 जवान, 2 महिलाएं और 2 बच्चे थे।
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बंधकों को छुड़ाने में एक मेजर और दो जवान शहीद हुए जबकि दूसरे मेजर और तीन जवान आतंकी हमले में शहीद हुए हैं।
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घायल तीन जवानों सूबेदार प्रहलाद सिंह, हवलदार कोशक चौधरी व सिपाही तरसेम सिंह को मिलिट्री हास्पिटल सतवारी शिफ्ट किया गया। आतंकियों को मार गिराने के लिए पैरा कमांडो भी बुलाए गए।
ड्रोन तथा हेलीकाप्टर से आतंकियों के लोकेशन का पता लगाया जाता रहा। हमले के बाद नगरोटा इलाके के सभी स्कूल बंद करा दिए गए। दुकानदारों ने पाकिस्तान के खिलाफ दुकानें बंद कर विरोध प्रदर्शित किया।