परिचितों की रविवार शाम को हुई हत्या के बाद हम कमरों में कैद हो गए। हम लोगों में से किसी ने भी रात में झपकी तक नहीं ली। ऐसा लगा कि आज की रात हमारे भाग्य का फैसला हो जाएगा। स्थानीय लोग बातचीत करने के लिए कमरे की तरफ आए लेकिन हमने दरवाजे तक नहीं खोले। पूरी रात बेहद खौफ में गुजरी। किसी भी समय बंदूकधारियों के कमरों में घुस आने की आशंका थी। रात ही में जानने वाले एक टैक्सी चालक को ज्यादा किराया देकर जम्मू पहुंचे। वनपोह से जम्मू तक के 12 घंटे के सफर में बच्चों से लेकर बड़ों तक किसी ने भी खाना तक नहीं खाया।
यह दर्द बिहार निवासी अरविंद पासवान, राहुल कुमार, अंजनी कुमार, अफजल अहमद का है। वह सात-आठ सालों से वनपोह इलाके में किराए पर रहते हैं। इन लोगों का कहना है कि अनुच्छेद-370 के हटने और विकास कार्यों के चलते आतंकियों में बौखलाहट है। इसी वजह से लोगों पर हमला कर रहे हैं। आगे की स्लाइड में जानिए उस रात कब-क्या और कैसे हुआ...