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PHOTOS: फिर हमलों के लिए धर्मस्थलों का सहारा लेने लगे आतंकी, जानिए मस्जिदों में कब-कब घुसे दहशतगर्द

Thu, 02 Jul 2020 02:56 PM IST
प्रशांत कुमार चंद्र प्रकाश श्रीवास्तव, जम्मू
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Sopore Terror Attack - फोटो : साकिब नबी
कश्मीर घाटी में दहशतगर्द अब हमलों के लिए धर्मस्थलों का सहारा लेने लगे हैं। सोपोर में मस्जिद में छिपे आतंकियों ने सीआरपीएफ की पेट्रोलिंग पार्टी पर हमला कर इसे फिर साबित किया है। वैसे यह पहला मौका नहीं है, जब आतंकियों ने धर्मस्थल बदनाम करने की साजिश को अंजाम दिया है। 19 जून को भी पुलवामा जिले के पांपोर में हमला करने के बाद आतंकी मस्जिद में छिप गए थे। सुरक्षाबलों ने इन्हें बाहर निकाल कर मारा था। आम तौर पर आतंकी इस तरह की गतिविधियां 90 के दशक में अमल में लाते थे। बीच में यह सिलसिला बंद हो गया था।
  
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Sopore Terror Attack - फोटो : साकिब नबी
दरअसल, कश्मीर घाटी में आतंकी मानसिक युद्ध भी लड़ रहे हैं। यह उनकी धर्मस्थलों की आड़ लेकर स्थानीय लोगों की भावनाओं से खेलने की साजिश भी है। इसलिए सुरक्षाबलों पर हमला करने से पहले व बाद वे धर्मस्थलों की शरण लेते हैं, ताकि इनकी जान बच जाए। यदि सुरक्षाबल कठोर कार्रवाई करें और इसमें धर्मस्थलों को नुकसान पहुंचे तो उसे धार्मिक रंग देकर लोगों को भड़काया जा सके।

 
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Sopore Terror Attack - फोटो : साकिब नबी
19 जून को पुलवामा जिले के पांपोर के मीज इलाके में भी दहशतगर्दों ने ऐसी ही साजिश रची थी, परंतु सुरक्षाबलों ने अपनी सूझबूझ से इसे नाकाम कर दिया था। सुरक्षाबलों ने विशेष रणनीति के तहत मस्जिद को नुकसान पहुंचाए बिना आंसू गैस का प्रयोग कर आतंकियों को बाहर निकालकर ढेर कर दिया था। सुरक्षाबलों के इस ऑपरेशन की स्थानीय लोगों ने भी तारीफ की थी।

 

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Sopore Terror Attack - फोटो : साकिब नबी
पहले भी धर्मस्थलों में छिप चुके हैं आतंकी
1996 में जेकेएलएफ कमांडर बशारत रजा और शब्बीर सिद्दीकी ने दो दर्जन साथियों समेत दरगाह में पनाह ली थी। उन्होंने दरगाह की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों पर हमला बोल दिया। जवाबी कार्रवाई में सभी आतंकी मारे गए। इस दौरान तीन पुलिसकर्मी भी शहीद हुए थे।
  
 
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Sopore Terror Attack - फोटो : साकिब नबी
मार्च 1995 में बडगाम जिले के चरार-ए-शरीफ इलाके में स्थित सूफी संत शेख नूरूद्दीन नूरानी की दरगाह में हरकत उल अंसार और हिजबुल के आतंकियों ने पनाह ली थी। 66 दिन तक आतंकी इसी दरगाह में छिपे रहे थे। 12 मई को मुठभेड़ में नौ पाकिस्तानियों समेत 25 आतंकी मारे गए थे। 15 अक्तूबर 1993 को 40 आतंकी हजरतबल दरगाह में करीब एक महीने तक छिपे रहे। 16 नवंबर को आतंकियों ने आत्मसमर्पण कर दिया था।
 
 
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Sopore Terror Attack - फोटो : साकिब नबी
ज्यादातर मुठभेड़ से नागरिकों को पहले निकालते हैं सुरक्षाबल
सोपोर में बुधवार को सुरक्षाबलों ने जिस प्रकार एक मासूम की जान बचाई, उसकी पूरे देश में प्रशंसा हो रही है। कश्मीर घाटी में प्रत्येक दिन होने वाली मुठभेड़ों से पहले सुरक्षाबल स्थानीय लोगों की जान बचाने के लिए पहले उन्हें निकालकर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाते हैं। कई बार मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल आतंकियों की उनके परिजनों से बात कराते हैं ताकि यदि वे आत्मसमर्पण कर दें।

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