कश्मीर को धरती का स्वर्ग कहा जाता है, मगर धरती के इस स्वर्ग का दूसरा पहलू यह भी है कि बर्फबारी यहां जनजीवन को बेहाल कर देती है। बाहर के लोगों को यह बर्फबारी आकर्षित जरूर करती है, लेकिन स्थानीय लोगों के लिए यह मौत से कम नहीं है।
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Kashmir Snowfall
- फोटो : AMAR UJALA
ऐसा ही हाल श्रीनगर से सिर्फ 20 किलोमीटर की दूर बसे फकीर गुजरी इलाके का है। जबरवन पहाड़ी के दामन में बसे इस इलाके में करीब 2000 परिवार हैं। भारी बर्फबारी के बीच इस इलाके के लोग बिजली, पानी, ट्रांसपोर्ट आदि सुविधाओं से वंचित हो गए हैं।
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अगर श्रीनगर जिले में यह हाल है तो अन्य जिलों के दूरदराज के इलाकों का क्या हाल होगा जहां ने तो सरकार की नजर है और न ही अधिकारियों की पहुंच। जब इलाके में जाकर लोगों से बात की गई तो उन्होंने मुश्किलें गिनाना शुरू कर दिया।
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ऐसा लगा कि वह शिकायतों की लंबी सूची लिखा रहे हैं। मोहम्मद अशरफ ने बताया कि इस इलाके के लिए कोई बस सेवा नहीं है। सिर्फ निजी टाटा सूमो गाड़ियां चलती हैं। थोड़ी भी बर्फबारी होने पर फिसलन के चलते गाड़ियां यहां नहीं आ पातीं।
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लगभग सात किलोमीटर का सफर पैदल करना पड़ता है। अगर कोई बीमार पड़ जाए तो उसे चारपाई पर लादकर नीचे तक ले जाना पड़ता है। लोगों को कंधों पर सामान रखकर ढोना पड़ता है।
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इलाके में बिजली और पानी की किल्लत से भी बुरा हाल है। मुदसिर अहमद ने बताया कि बर्फबारी के बाद से यहां बिजली केवल नाम के लिए है। 24 घंटों में कुछ घंटे बिजली आती है, वह कम वोल्टेज। शहर के पास होने के बावजूद भी यहां बिजली नहीं होती।
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मोबाइल की बैटरी भी चार्ज नहीं हो पाती। डिजिटल इंडिया के जमाने में यहां के लोग किसी और ही सदी जैसे हालात के बीच रहने को मजबूर हैं। गांव के कुछ लोग पानी की पाइप के नीचे आग जलाते दिखे। उनसे जब पूछा गया तो उन्होेंने आपबीती सुनाई।
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मोहम्मद सुभान के अनुसार बर्फबारी से नलों में पानी जम गया है। इलाके में सरकारी प्लंबर नहीं है, इसलिए खुद ही आग जलाकर इसे ठीक करना पड़ता है। उन्होेंन बताया कि महिलाओं को भीषण बर्फबारी में पांच किलोमीटर दूर पहाड़ी के दामन में स्थित एक चश्मे से पानी लाना पड़ता है। फातिमा ने बताया उन्हें पांच किलोमीटर चलकर सिर पर मटका रखकर पानी लाना पड़ता है। फिसलन इतनी है कि पैदल चलना भी मुश्किल है। महिलाएं अक्सर घायल हो जाती हैं।
इलाके के लोगों को बर्फबारी के बाद अब हिमस्खलन की चिंता भी सता रही है, लेकिन सरकार की ओर से सतर्क रहने या प्रभावित गांव को खाली करने का कोई इंतजाम नहीं किया गया है। यह लोग भगवान के भरोसे हैं। गौरतलब है कि यह इलाका रियायत की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर जिले का हिस्सा है। मगर हालात दूरदराज के गांव जैसे हैं। लोग सरकार को कोस रहे हैं।