स्वच्छ अभियान के तहत भारतीय सेना ने दुनिया की सबसे खतरनाक रणभूमि सियाचिन ग्लेशियर के इको-सिस्टम की सुरक्षा के लिए 130 टन ठोस अपशिष्ट को हटाया। सेना के अधिकारियों ने बताया कि सैनिकों ने ग्लेशियर में मौजदू ठोस अपशिष्ट से छुटकारा पाने के लिए दृढ़ संकल्प लिया है। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 130.18 टन कचरे का निस्तारण किया जा चुका है।
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सियाचिन ग्लेशियर
- फोटो : ANI
इसमें 48.41 टन बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट, 40.32 टन नॉन-बायोडिग्रेडेबल नॉन-मेटालिक अपशिष्ट और 41.45 टन नॉन-बायोडिग्रेडेबल अपशिष्ट शामिल है। आधिकारिक तिथि के अनुसार, ग्लेशियर में फैले हुए ठोस अपशिष्ट की कुल मात्रा 236 टन है। यह अभियान करीब डेढ़ साल पहले शुरू किया गया था।
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सियाचिन ग्लेशियर
- फोटो : ANI
काराकोरम रेंज में लगभग 12,000 फीट की ऊंचाई पर स्थित सियाचिन ग्लेशियर को दुनिया में सबसे ऊंचे सैन्य क्षेत्र के रूप में जाना जाता है, जहां सैनिकों को ठंडी और तेज हवाओं से जूझना पड़ता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सेना ने पिछले 10 वर्षों के दौरान दुनिया के सबसे ऊंचे युद्ध क्षेत्र में 163 सैन्य कर्मियों को खो दिया।
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सियाचिन ग्लेशियर
- फोटो : ANI
भारत और पाकिस्तान ने रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ग्लेशियर पर 1984 में सैनिकों की तैनाती शुरू की थी। सेना के अधिकारियों ने बताया कि नॉन-मेटालिक ठोस अपशिष्ट को खाद में बदलने के लिए लेह में सियाचिन बेस कैंप और बुकांग के पास परतापुर में इंसीनेटर लगाए गए हैं।
सेना ने लेह में कार्डबोर्ड रीसाइक्लिंग मशीनों की भी स्थापना की है। सेना ने पर्यावरण की रक्षा के लिए लेह और आसपास के क्षेत्रों में लोगों में जागरूकता पैदा करने के लिए एक कार्यक्रम भी शुरू किया है।