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भारत माता के बेटों की इस रणनीति ने लिख दी 'आतंकवाद की मौत', पढ़ें 'ऑपरेशन जैकबूट से सुगू तक'

Wed, 10 Jun 2020 02:38 PM IST
प्रशांत कुमार प्रशांत कुमार द्विवेदी, अमर उजाला, जम्मू-कश्मीर
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भारतीय सेना - फोटो : निखिल मेहता
कश्मीर घाटी में शोपियां के सुगू में आज यानी कि बुधवार को सुरक्षाबलों ने पांच आतंकियों को ढेर कर दिया है। यह सुरक्षाबलों के लिए बड़ी सफलता है। सुरक्षाबलों ने दो सप्ताह में 27 आतंकियों को मार कर हिजबुल मुजाहिदीन, लश्कर-ए-तैयबा समेत सभी बडे़ आतंकी संगठनों की कमर तोड़ दी है। आतंकी संगठनों के कई मोस्ट वांटेड कमांडर मारे गए हैं। इससे पहले छह मई को ऑपरेशन जैकबूट में हिजबुल मुजाहिदीन का मुख्य कमांडर रियाज नायकू मारा गया था। फिर सुरक्षाबलों ने जुनैद सेहराई और उसके साथी आंतकी को ठिकाने लगाया था।

आगे की स्लाइड में पढ़िएः 'ऑपरेशन जैकबूट से सुगू तक' और एक बैठक जिसने ने ठोक दी आतंकियों के ताबूत में आखिरी कील

 
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भारतीय सेना - फोटो : अमर उजाला
दो मई को हंदवाड़ा में हुई आतंकी मुठभेड़ में कर्नल आशुतोष शर्मा समेत पांच जवान शहीद हो गए थे। इसके बाद भारतीय सेना ने बेगपोरा में ऑपरेशन जैकबूट चलाकर हिजबुल कमांडर रियाज नायकू और उसके साथी आतंकी को ढेर कर दिया था। वहीं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, एनएसए अजीत डोभाल और देश के पहले चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल बिपिन रावत कई बार स्पष्ट तौर पर कह चुके हैं कि आतंकवाद के खात्मे के लिए वह प्रतिबद्ध हैं। वहीं ऑपरेशन जैकबूट के बाद से हर दिन आतंकियों के लिए मौत बनकर आ रहा है।
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भारतीय सेना - फोटो : अमर उजाला
बेगपुरा के बाद श्रीनगर के कानेमजार नवाकदल इलाके में सुरक्षाबलों और आतंकियों के बीच हुई मुठभेड़ में जुनैद सहराई और पुलवामा निवासी तारिक अहमद शेख मारा गया था। 29 वर्षीय जुनैद सहराई सैयद अली शाह गिलानी के बाद तहरीक ए हुर्रियत के चेयरमैन बने मोहम्मद अशरफ सहराई का बेटा था। साल 2018 के मार्च महीने में जुमे की नमाज के बाद जुनैद लापता हो गया था। इसके बाद वह आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के साथ जुड़ गया था।

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भारतीय सेना - फोटो : अमर उजाला
वहीं बीते दिनों पुलवामा जिले के कंगन में सुरक्षाबलों ने जैश-ए- मोहम्मद के टॉप पाकिस्तानी कमांडर और आईईडी एक्सपर्ट अब्दुल रहमान उर्फ फौजी भाई समेत तीन आतंकियों को मुठभेड़ में मार गिराया था। आतंकी फौजी पाकिस्तान में रहने वाले जैश सरगना मसूद अजहर का रिश्तेदार था। ऑपरेशन कंगन के बाद से जैश सरगना मसूद अजहर बौखलाया हुआ है। वहीं घाटी में खात्मे की कगार पर पहुंच चुका हिजबुल घबराया हुआ है। उसकी घबराहट का सबूत ये है कि बीते दिनों उसने आतंकी संगठनों से गुहार लगाई थी कि सभी एकजुट होकर हमले करें।

 
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भारतीय सेना - फोटो : अमर उजाला
अब आपको बताते हैं उस अहम बैठक के बारे में जिसने आतंकी संगठनों को खात्मे की कगार पर पहुंचा दिया है। मई महीने के आखिरी सप्ताह में श्रीनगर में सेना, पुलिस और नागरिक प्रशासन की कोर ग्रुप की बैठक हुई थी। इस बैठक में तय किया गया था कि घाटी में विभिन्न तंजीमों के आतंकियों का सफाया करने के साथ ही उन्हें आर्थिक मदद पहुंचाने की सप्लाई लाइन को भी काटा जाएगा। धरपकड़ कर आतंकी तंजीमों को मिलने वाली आर्थिक मदद को रोका जाएगा।
 
 
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भारतीय सेना - फोटो : अमर उजाला
बैठक में घाटी में सुरक्षा हालात व सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए की गई तैयारियों की समीक्षा की गई। कहा गया कि खुफिया इनपुट में बताया गया है कि पाकिस्तान ने घुसपैठ की कोशिशें तेज कर दी हैं। एलओसी पर सीजफायर उल्लंघन की घटनाओं में भी तेजी आई है। घाटी में आतंकी घटनाओं में तेजी लाने की कोशिशें की जा रही हैं।
 
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भारतीय सेना - फोटो : अमर उजाला
पाकिस्तान की ओर से सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार अभियान से घाटी के हालात बिगाड़ने की कोशिश जारी है। खुफिया इनपुट यह भी है कि पाकिस्तान और देशविरोधी ताकतें जम्मू-कश्मीर में हिंसा को बढ़ावा देने की भी लगातार कोशिशें कर रही हैं। हाल में आतंकी तंजीमों के दहशतगर्दों के सफाए और आईईडी विस्फोट की साजिश को नाकाम कर ऐसी ताकतों के मंसूबों को नाकाम बनाया गया है। कश्मीर की अवाम के सहयोग से सुरक्षाबलों को यह सफलता मिल पाई है।
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भारतीय सेना
कोर ग्रुप ने एलओसी पर घुसपैठ रोकने के लिए काउंटर इंफिल्ट्रेशन ग्रिड और घाटी में आतंकवाद निरोधक ग्रिड को मजबूत करने की रणनीति बनाई गई। तय किया गया कि खुफिया सूचनाओं पर आधारित आतंकवाद निरोधक अभियानों को जारी रखा जाएगा। बैठक में सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए आतंकवाद निरोधक अभियानों को चलाने और घाटी में शांति कायम रखने पर बल दिया गया। कोर ग्रुप ने हालिया ऑपरेशन पर संतोष जताते हुए कहा कि घाटी में शांति व्यवस्था कायम रखने के लिए सभी का सहयोग जरूरी है। बैठक में चिनार कोर कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू, डीजीपी दिलबाग सिंह के अलावा प्रशासन, खुफिया विभाग के अधिकारी मौजूद थे।
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