राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की जीत के बाद सचिन पायलट डिप्टी सीएम का पद संभालेंगे। ऐसे में उनकी पत्नी सारा पायलट देश की एक मात्र ऐसी महिला होंगी जिनके पति डिप्टी सीएम बनेंगे, जबकि दादा, पिता, फूफा और भाई भी जम्मू कश्मीर के सीएम रह चुके हैं। सारा के पिता फारुख अब्दुल्लाह, दादा शेख अब्दुल्लाह, भाई उमर अब्दुल्लाह और फूफा गुलाम मोहम्मद शाह जम्मू-कश्मीर के सीएम रहे हैं। आगे की स्लाइड में जानें सचिन और सारा की पहली मुलाकात से लेकर शादी तक के सफर के बारे में।
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sachin pilot
- फोटो : instagram
लंदन में पढ़ाई के दौरान सचिन की मुलाकात सारा अब्दुल्लाह से हुई और कुछ दिनों के बाद दोनों एक दूसरे को डेट करने लगे। पढ़ाई पूरी करने के बाद सचिन वापस दिल्ली लौट आए लेकिन, सारा अपनी आगे की पढ़ाई के लिए लंदन में ही थीं। दोनों के बीच यह दूरी आ जाने के बाद भी दोनों का प्यार बना रहा। दोनों ई-मेल और फोन के जरिए बात किया करते थे। दोनों ने लगभग तीन साल तक एक-दूसरे को डेट किया और इसके बाद दोनों ने अपने रिश्ते के बारे में अपने परिवार को बताने का फैसला लिया।
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सचिन और सारा ने जब अपने परिवार वालों को बताया तो दोनों के प्यार के बीच मजहब की दीवार आ खड़ी हुई। एक तरफ सचिन हिंदू परिवार से थे, तो वहीं सारा का ताल्लुक मुस्लिम परिवार से था।
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सचिन के परिवार ने दोनों की शादी के लिए इनकार कर दिया। वहीं, सारा के लिए भी यह राह आसान नहीं थी। खबरों की मानें तो उनके पिता फारुख अब्दुल्ला ने उनसे इस बारे में बात करने से ही मना कर दिया था, लेकिन सारा ने हार नहीं मानी। उसने अपने पिता को मनाने के लिए सारे प्रयास किए। वह कई दिनों तक रोती रहीं, लेकिन उनके पिता नहीं माने।
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बाद में सचिन और सारा ने किसी की परवाह किए बिना जनवरी 2004 में शादी कर ली। इस शादी में अब्दुल्ला परिवार का कोई भी सदस्य शामिल नहीं हुआ था। सचिन के परिवार ने सारा का बहुत साथ दिया। समय के साथ अब्दुल्लाह परिवार ने भी दोनों के रिश्ते को स्वीकार लिया।
पॉलिटिक्स में आने के बारे में सचिन ने कभी नहीं सोचा था
सचिन ने शादी से पहले पॉलिटिक्स में कदम रखने के बारे में कभी नहीं सोचा था। लेकिन पिता राजेश पायलट की मौत के बाद उन्हें राजनीति में उतरना पड़ा। जिस समय सचिन ने राजनीति के मैदान में कदम रखा उस समय उनकी उम्र महज 26 साल थी। सचिन ने 2004 के लोकसभा चुनावों में दौसा (राजस्थान) से बड़ी जीत हासिल की।