प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं जम्मू-कश्मीर के लोगों की सुरक्षा में तैनात अपने सुरक्षा बलों के साथियों का भी आभार व्यक्त करता हूं। प्रशासन से जुड़े सभी लोग, राज्य के कर्मचारी और जम्मू-कश्मीर पुलिस जिस तरह से स्थितियों को संभाल रही है, वो बहुत प्रशंसनीय है। आपके इस परिश्रम ने मेरा ये विश्वास और बढ़ाया है, बदलाव हो सकता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जम्मू-कश्मीर हमारे देश का मुकुट है। गर्व करते हैं कि इसकी रक्षा के लिए जम्मू-कश्मीर के अनेकों वीर बेटे-बेटियों ने बलिदान दिया है। अपना जीवन दांव पर लगाया है। पुंछ जिले के मौलवी गुलाम दीन, जिन्होंने 1965 की लड़ाई में पाकिस्तानी घुसपैठियों के बारे में भारतीय सेना को बताया था, उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया था, लद्दाख के कर्नल सोनम वानंचुग जिन्होंने कारगिल की लड़ाई में दुश्मन को धूल चटा दी थी, उन्हें महावीर चक्र दिया गया था।
कहा कि राजौरी की रुखसाना कौसर, जिन्होंने एक बड़े आतंकी को मार गिराया था, उन्हें कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया था, पुंछ के शहीद औरंगजेब, जिनकी पिछले वर्ष आतंकियों ने हत्या कर दी थी और जिनके दोनों भाई अब सेना में भर्ती होकर देश की सेवा कर रहे हैं, ऐसे वीर बेटे-बेटियों की ये लिस्ट बहुत लंबी है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि आतंकियों से लड़ते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के अनेक जवान और अफसर भी शहीद हुए हैं। देश के अन्य भू-भाग से भी हजारों लोगों को हमने खोया है इन सभी का सपना रहा है- एक शांत, सुरक्षित, समृद्ध जम्मू-कश्मीर बनाने का। उनके सपने को हमें मिलकर पूरा करना है।
अनुच्छेद 370 को हटाने को लेकर उन्होंने कहा कि ये फैसला जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के साथ ही पूरे भारत की आर्थिक प्रगति में सहयोग करेगा। जब दुनिया के इस महत्वपूर्ण भू-भाग में शांति और खुशहाली आएगी, तो स्वभाविक रूप से विश्व शांति के प्रयासों को मजबूती मिलेगी।
उन्होंने कहा कि मैं जम्मू-कश्मीर के अपने भाइयों और बहनों से, लद्दाख के अपने भाइयों और बहनों से, आह्वान करता हूं.. आइए, हम सब मिलकर दुनिया को दिखा दें कि इस क्षेत्र के लोगों का सामर्थ्य कितना ज्यादा है, यहां के लोगों का हौसला, उनका जज्बा कितना ज्यादा है। आइए, हम सब मिलकर, नए भारत के साथ-साथ अब नए जम्मू-कश्मीर और नए लद्दाख का भी निर्माण करें। संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने सभी को धन्यवाद दिया।