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नवरात्रिः माता का धाम जो घाटी में आने वाली आफत-बदलाव की देता है आहट, पानी देख हैरान रह जाते हैं लोग

Mon, 30 Sep 2019 09:51 AM IST
प्रशांत कुमार बृजेश कुमार सिंह, जम्मू/श्रीनगर
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क्षीर भवानी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
नवरात्रि के पावन पर्व का आज दूसरा दिन है। जम्मू के कटड़ा स्थित माता के दरबार में भक्तों का तांता लगा हुआ है। देश-विदेश से माता के भक्त यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं। साथ ही यहां की मान्याताओं व रहस्यों से रूबरू होते हैं। आज हम आपको माता के एक ऐसे धाम के बारे में बताने जा रहे हैं जो कश्मीर में होने वाले किसी भी परिवर्तन या संकट का संदेश देता है। तुलमुला मध्य कश्मीर का गांदरबल जिला जोकि श्रीनगर से लगा हुआ है। यहां तुलमुला में कश्मीरी पंडितों का माता क्षीर भवानी मंदिर है।
 
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क्षीर भवानी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मंदिर के कुंड के पानी ने रंग बदल कर पांच अगस्त को हुए परिवर्तन का संकेत पहले ही दे दिया था। 25 दिन बाद धीरे-धीरे पानी अपने मूल रंग में आ रहा है लेकिन हल्का काला रंग अब भी देखा जा सकता है। कहते हैं कि जब कभी घाटी में बड़ा बदलाव या संकट या आपदा की स्थिति आने वाली होती है, मां राघन्या के कुंड में पानी का रंग बदल जाता है। स्थानीय लोगों को इसका आभास भी हो जाता है।
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क्षीर भवानी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मंदिर की देखरेख करने वाले राजेंद्र सिंह ने बताया कि महीने की शुरूआत में कुंड के जल का रंग बदल गया था। कुंड का पानी काले रंग का हो गया था। अब भी पानी का रंग बदला हुआ है लेकिन धीरे-धीरे यह अपने मूल रंग में आने लगा है। यह संकेत है कि अब हालात सामान्य की ओर बढ़ रहे हैं।

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क्षीर भवानी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
इससे पहले 2008 में अमरनाथ भूमि आंदोलन, 2010 में उमर अब्दुल्ला सरकार में हिंसा, 2014 में बाढ़ तथा 2016 में हिजबुल आतंकी बुरहान वानी के मारे जाने के बाद हुई हिंसा के दौरान भी पानी का रंग बदल गया था। घाटी में जब आतंकवाद का दौर शुरू हुआ था, तब भी कुंड के जल का रंग बदला था। 
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क्षीर भवानी मंदिर - फोटो : अमर उजाला
मंदिर परिसर में बने सीआरपीएफ कैंप के जवान पूजा करने के लिए आते हैं। परिसर में ही प्रधानमंत्री पैकेज के तहत नियुक्ति पाने वाले कश्मीरी पंडितों के 40 परिवार रहते हैं। केंद्र के फैसले के बाद सभी परिवार जम्मू चले गए हैं।
 
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