शारदीय नवरात्र की प्रथम आराध्य माता पार्वती हैं। पर्वत पुत्री के कारण वह शैलपुत्री के नाम से लोकप्रसिद्ध हुईं। मां का वास पर्वत पर है और इस कारण वह प्रकृति की अधिष्ठात्री हैं। पूर्व जन्म में माता सती नाम से दक्ष प्रजापति की पुत्री थीं। दक्ष ने शिव को यज्ञ का आमंत्रण न देकर अपमानित किया था, फिर भी पति की इच्छा के विरुद्ध सती यज्ञ में शामिल होने पहुंची, जहां उनका तिरस्कार हुआ। इससे क्षुब्ध सती ने यज्ञ वेदी में कूद कर शरीर की आहुति दे दी। अगले जन्म में मां ने हिमाचल की पुत्री पार्वती के रूप में जन्म लिया। पार्वती ने कठोर तप से शिव को प्रसन्न किया और दोनों का मंगल परिणय संपन्न हुआ। मां को शिवांगी भी कहते हैं। - आगे पढ़े आराधना का मंत्र
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नवरात्रि कल से, यह है घट स्थापना का शुभ मुहूर्त
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आराधना का मंत्र : या देवी सर्वभूतेषु प्रकृति रूपेण संस्थिता, नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।
घट स्थापना सूर्योदय से चार घंटे के मध्य करना शुभ रहता है। इस वर्ष वैधृति योग एवं चित्रा नक्षत्र का योग घट स्थापना काल को दूषित कर रहा है। ऐसे समय में अभिजित मुहूर्त में घट स्थापना का निर्देश है। अस्तु दिन में 11.49 से 12.31 तक घट स्थापना शुभ रहेगा।