अगर आप घूमने का प्लान बना रहे हैं तो जम्मू-कश्मीर से अच्छा और कोई स्थान नहीं हो सकता। यहां आपको खाने-पीने और खरीदारी करने का अलग ही आनंद आएगा। दिल को छू लेने वाली बर्फ से ढकी पहाड़ियां आपको दीवाना बना लेंगी।
विज्ञापन
2 of 20
बर्फबारी की तस्वीरें
- फोटो : अमर उजाला
कश्मीर का सबसे बड़ा शहर और राज्य की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर है। यह अपनी विशिष्टताओं और खूबसूरती के कारण पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र है। श्रीनगर कस्बा दरिया झेलम के दोनों किनारों पर फैला हुआ है। 'राजतरंगिणी’ के लेखक कल्हण कहते हैं कि श्रीनगरी की स्थापना महाराजा अशोक ने तीसरी सदी में की थी। श्रीनगरी से बने श्रीनगर शहर का निर्माण परावरशना द्वितीय और ह्वेन सांग ने 631 एडी में कराया था।
विज्ञापन
3 of 20
पत्थर मस्जिद श्रीनगर
- फोटो : सोशल मीडिया
पत्थर मस्जिदः यह मस्जिद पत्थर से बनी हुई है। इसका निर्माण नूरजहां ने करवाया था। उस दौरान इसमें सिर्फ शिया मुसलमान ही इबादत करते थे।
4 of 20
शाह हमदान मस्जिद
- फोटो : सोशल मीडिया
शाह हमदान मस्जिदः यह मस्जिद शहर की सबसे पुरानी मस्जिद है। जिसकी दीवारों पर पेपरमाशी की कारीगरी की गई है।
विज्ञापन
5 of 20
जामिया मस्जिद
- फोटो : सोशल मीडिया
जामिया मस्जिद का निर्माण सुल्तान सिकंदर ने 1400 एडी में करवाया था।
विज्ञापन
6 of 20
झील
- फोटो : अमर उजाला
नगीन झील श्रीनगर शहर से 8 किमी की दूरी पर है। जोकि अपनी खूबसूरती के लिए प्रसिद्ध है। नीले पानी और चारों ओर अंगूठी की तरह दिखने वाले पेड़ों के कारण इसका नाम नगीन पड़ा है।
विज्ञापन
7 of 20
हरि पर्वत किला
- फोटो : सोशल मीडिया
हिंदुओं का पवित्र कहे जाने वाला हरि पर्वत किला श्रीनगर शहर के उत्तर-पूर्व में शरीका पर्वत पर है। इसका निर्माण अत्ता मुहम्मद खान जोकि अफगानी शासक था उसने 18वीं सदी में करवाया था।
8 of 20
परी महल
- फोटो : सोशल मीडिया
परी महल शहर से 11 किमी की दूरी पर स्थित है, यह महल कभी बौद्ध मठ था। जिसे मुगल बादशाह शाहजहां के बेटे दाराशिकोह ने ज्योतिष के एक स्कूल के रूप में बदल दिया था।
9 of 20
हजरत बल दरगाह
- फोटो : अमर उजाला
हजरत बल दरगाह जोकि शहर से 9 किमी की दूरी पर है। एक ओर झील तथा दूसरी ओर पर्वत श्रृंखला होने के कारण यह बहुत ही खूबसूरत दिखती है।
10 of 20
शंकराचार्य मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
शंकराचार्य मंदिर शहर से एक हजार फुट की ऊंचाई पर तख्त-ए-सुलेमान नामक पहाड़ी पर स्थित है। इसका निर्माण महाराजा अशोक के बेटे जलुका ने करवाया था। इस मंदिर से पूरी पीरपंजाल पर्वत श्रृंखला के साथ ही शहर के कई भागों को देखा जा सकता है।
11 of 20
डल झील
- फोटो : बासित जरगर
विश्वप्रसिद्ध डल झील शहर के पूर्व में स्थित है।
12 of 20
शिव मंदिर
- फोटो : amarujala
पहलगाम मार्ग पर स्थित मट्टन हिंदुओं का पवित्र स्थल है। यहां एक शिव मंदिर और खूबसूरत झरना भी है। श्रीनगर से यह 61 किमी की दूरी पर है।
13 of 20
सूर्य मंदिर
- फोटो : अमर उजाला
मट्टन से 3 किमी आगे चलकर मार्तण्ड में कश्मीर के इतिहास के कुछ खंडहर हैं। जो सूर्य मंदिर के नाम से भी जाने जाते हैं।
14 of 20
बर्फबारी की तस्वीरें
- फोटो : बासित जरगर
अच्छाबल जोकि श्रीनगर से 58 किमी दूर और 1677 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। जहां मुगल उद्यान भी हैं, जो अपनी खूबसूरती के लिए जाने जाते हैं।
15 of 20
बर्फबारी की तस्वीरें
- फोटो : बासित जरगर
शहर से 29 किमी की दूरी पर अंवतिपुर में अवंतिवर्मा के शासनकाल के खंडहर हैं। साथ ही 9वीं सदी के मंदिरों के अवशेष हैं।
16 of 20
बर्फबारी की तस्वीरें
- फोटो : बासित जरगर
एशिया की स्वच्छ और ताजे पानी की सबसे बड़ी वुलर झील, जोकि 125 वर्ग किमी के क्षेत्रफल में फैली हुई है। यह शहर से करीब 60 किमी की दूरी पर है।
17 of 20
बर्फबारी की तस्वीरें
- फोटो : बासित जरगर
विश्व के प्रसिद्ध हिल स्टेशनों में एक गुलमर्ग, जिसे लोग फूलों की घाटी भी कहते हैं। यह अपनी बर्फ के लिए प्रसिद्ध है।
18 of 20
बर्फबारी की तस्वीरें
- फोटो : बासित जरगर
श्रीनगर शहर से 70 किमी की दूरी पर स्थित कोकरनाग झरनों के लिए जाना जाता है।
19 of 20
बर्फबारी की तस्वीरें
- फोटो : बासित जरगर
श्रीनगर से 96 किमी की दूरी पर पहलगाम एक बहुत ही रमणीय स्थल है। यह बाबा अमरनाथ की वार्षिक यात्रा का बेस कैंप भी है। इसके साथ ही घूमने के लिहाज से पटनीटाप आपके लिए बेहतरीन जगह हो सकती है। देश-विदेश के सैलानियों को यहां होने वाली भारी बर्फबारी अपनी ओर आकर्षित करती है।
पटनीटॉप में हुई बर्फबारी के बाद सैलानियों को बर्फ से खेलने का भरपूर मौका मिलता है। पटनीटॉप में जमीन, घरों, पेड़ों यहां तक कि गाड़ियो पर बर्फ जम जाती है। पटनीटॉप नत्थाटाप में जमकर बर्फबारी होती है। सड़क पर बर्फ गिरने से ट्रैफिक व्यवस्था में भी गड़बड़ा जाती है, इसलिए यहां आते समय विशेष सावधानी भी बरतें। बर्फबारी से ठंड भी बढ़ जाती है। इसको देखते हुए गर्म कपड़े लाना न भूलें। 60 मीटर की ऊंचाई से पटनीटॉप के खूबसूरत देवदारों और उसके आसपास की खूबसूरती को गंडोले से निहारते ही लोग एक अलग दुनिया में खो जाते हैं।