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सेब उत्पादकों को माह-ए-रमजान से बड़ी उम्मीदें, बोले- ऐसा न हुआ तो सफेद हाथी ही होंगे ये फल

Tue, 28 Apr 2020 10:14 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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कश्मीरी सेब - फोटो : बासित जरगर
लॉकडाउन से प्रभावित कश्मीर के सेब उत्पादकों को रमजान के महीने में सेब की खपत बढ़ने की उम्मीद है। सेब उत्पादकों का कहना है कि अगर अधिकारी उन्हें इसकी बिक्री करने की आसानी से अनुमति दे देंगे तो उन्हें काफी राहत मिलेगी। अन्यथा सेब उनके लिए सफेद हाथी साबित होंगे।

 
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कश्मीरी सेब - फोटो : अमर उजाला, फाइल
सेब उत्पादकों ने अक्टूबर 2019 से घाटी के 22 भंडार गृहों में लगभग 350 करोड़ रुपये मूल्य के लगभग एक लाख टन ए-श्रेणी का सेब एकत्र कर रखा है। जिसकी मार्च-अप्रैल में देश के विभिन्न हिस्सों में आपूर्ति की जानी थी, परंतु देशव्यापी  लॉकडाउन के कारण इसकी आपूर्ति संभव नहीं हो पाई।

 
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कश्मीरी सेब - फोटो : अमर उजाला, फाइल
एक फल उत्पादक मोहम्मद सलीम वानी ने बताया कि जल्द स्थिति सामान्य होने की उम्मीद कम है और सेब का यह भंडार अब हमारे लिए सफेद हाथी बन गया है। हम भंडार गृह शुल्क के रूप में हर महीने 30 से 35 रुपये प्रति पेटी खर्च कर रहे हैं। ये उच्च गुणवत्ता वाले सेब आमतौर पर बड़ी कंपनियों की खुदरा दुकानों को भेजे जाते हैं, इससे काफी फायदा होता था। अब हम स्थानीय स्तर पर इसे बेच सकते हैं। हम जो भी बिक्री कर पाएंगे उससे कम से कम लागत का हिस्सा तो वसूल होगा। अन्यथा हम इस वर्ष फसल लगाने की स्थिति में भी नहीं होंगे।

 

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कश्मीरी सेब - फोटो : अमर उजाला, फाइल
कोल्ड एटमॉस्फियर स्टोरेज ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष माजिद वफाई ने कहा कि घाटी के विभिन्न भंडार गृहों में सेब की 30 लाख से अधिक पेटियां रखी हैं। सरकार को कश्मीर के बाहर सेब के ट्रकों को जाने की अनुमति देनी चाहिए।

 
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कश्मीरी सेब - फोटो : अमर उजाला, फाइल
इस बीच कश्मीर के मंडलीय आयुक्त पांडुरंग कुंदबाराव पोल ने कहा कि प्रतिदिन सेबों से लदे 30 से अधिक ट्रक कश्मीर के बाहर के बाजारों के लिए रवाना हो रहे हैं। अब तक 1000 मीट्रिक टन से अधिक सेब घाटी से बाहर जा चुके हैं। फिलहाल मुद्दा कश्मीर के बाहर की मांग का है। प्रशासन पहले से ही घाटी में सेबों की ढुलाई को आसान बना रहा है।
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