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Kashmiri Pandit Target Killing: मां का बेटा गया, पत्नी का सुहाग उजड़ा, सरकार और आतंकियों का क्या बिगड़ा

Sun, 16 Oct 2022 02:44 AM IST
विमल शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
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कश्मीर पंडित पूरन कृष्ण भट की हत्या के बाद प्रदर्शन करते कर्मचारी - फोटो : संजय कुमार

एक बार फिर निर्दोष कश्मीरी पंडित आतंकियों की गोलियों का शिकार हो गया। एक मां का बेटा, पत्नी का सुहाग और बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। न तो सरकार और न ही आतंकियों का कुछ गया, सिर्फ कश्मीरी पंडित परिवार उजड़ गया।ये बातें कश्मीरी पंडित कर्मचारियों ने दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में कश्मीरी पंडित पूरण कृष्ण भट की हत्या के विरोध में प्रदर्शन करते हुए कहीं। पीएम पैकेज के कर्मचारियों ने दो घंटे तक केनाल रोड जाम कर प्रदर्शन कर आरोप लगाया कि कश्मीरी पंडित कर्मियों को सुरक्षा देने में सरकार विफल रही है।

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कश्मीरी पंडित पूरण भट्ट की हत्या के बाद बिलखते परिजन - फोटो : बासित जरगर
कर्मचारियों ने कहा, पूरण भट की हत्या ने एक बार फिर हमारे डर को सच साबित कर दिया है। घाटी में कश्मीरी पंडित सुरक्षित नहीं हैं। शनिवार को पीएम पैकेज के कर्मचारियों ने केनाल रोड पर प्रदर्शन किया। कर्मचारियों ने कहा कि छह महीने से हम जम्मू और श्रीनगर में प्रदर्शन कर रहे हैं। उनकी एकमात्र मांग है कि घाटी से स्थानांतरण किया जाए। घाटी में लक्षित हत्याएं बढ़ रही हैं। आतंकी संगठन योजना बनाकर कश्मीरी पंडितों व अल्पसंख्यकों की हत्याएं कर रहे हैं और सरकार का काम अब सिर्फ हमारी मौत पर संवेदना जताने तक ही समिति रह गया है।
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कश्मीरी पंडित पूरण भट्ट की हत्या के बाद बिलखते परिजन - फोटो : बासित जरगर
साल 1990 से शुरू हुआ कश्मीरी पंडितों की हत्याओं का सलिसिला 2022 में भी जारी है। पूरण भट का कसूर सिर्फ इतना था कि वह कश्मीरी पंडित था। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि हमारी मांग सिर्फ स्थानांतरण की है, जिसके बिना वे काम पर नहीं लौटेंगे। 

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कश्मीरी पंडित पूरण भट्ट की हत्या के बाद बिलखते परिजन - फोटो : संजय कुमार

आतंकवाद कापुतला जलाकर  पाकिस्तान के खिलाफ निकाली भड़ास

प्रदर्शनकारी कर्मियों ने पूरन कृष्ण भट की हत्या के विरोध में आतंकवाद का पुतला जलाकर पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी की। कर्मचारी राहत आयुक्त कार्यालय से विरोध व्यक्त करते हुए कैनाल रोड पर पहुंचे और प्रदर्शन किया। इस दौरान एडीसी हरविंद्र सिंह भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने कर्मचारियों से बातचीत कर उनकी मांगों का समर्थन किया। आश्वासन दिया की उनकी मुलाकात उच्च अधिकारियों से करवाएंगे। इसके बाद कर्मचारी सड़क से हटे। इस प्रदर्शन का बजरंग दल ने भी समर्थन किया।
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कश्मीरी पंडित पूरण भट्ट की हत्या के बाद बिलखते परिजन - फोटो : हरदीप ठाकुर

जिस डर के कारण हम छह महीने से प्रदर्शन कर रहे थे, वह सच साबित हो गया। हम चीख-चीखकर कह रहे थे की कश्मीरी पंडित घाटी में सुरक्षित नहीं हैं, लेकिन सरकार उनकी बात को अनसुना करती रही। इसका नतीजा आज पूरन भट की हत्या से भुगतना पड़ रहा है। जब तक हमारा स्थानांतरण नहीं होगा संघर्ष जारी रहेगा। 
- अरविंद रैना, कश्मीरी पंडित कर्मचारी 

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कश्मीर पंडित पूरन कृष्ण भट के पार्थिव शव को ले जाते परिजन - फोटो : बासित जरगर

जम्मू-कश्मीर में एक तरफ कश्मीरी पंडितों की हत्याएं हो रही हैं, वही सरकार तुगलकी फरमान जारी कर कर्मचारियों कार शोषण कर रही है। उन्हें कश्मीर में ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। जब हमारा जीवन ही सुरक्षित नहीं तो बायोमीट्रिक हाजिरी का क्या करेंगे। - नीतू रैना कौल, कश्मीरी पंडित कर्मचारी

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Shopian - फोटो : अमर उजाला

सरकार कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर कितनी गंभीर है, यह बात संभागीय आयुक्त कश्मीर के बायोमीट्रिक हाजिरी वाले आदेश से पता चलती है। घाटी में लक्षित हत्याएं हो रही हैं और सरकार कर्मचारियों का वेतन बंद कर उन्हें घाटी वापस बुला रही है। सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है।  - आशीष पंडिता, कश्मीरी पंडित कर्मचारी 

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टारगेट किलिंग के बाद पहुंचे सुरक्षाबल - फोटो : बासित जरगर

कश्मीरी पंडित कर्मचारी घाटी से तबादले के लिए लगातार छह महीने से प्रदर्शन कर रहे हैं, लेकिन सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर नहीं है। सुरक्षा की दृष्टि से खतरा होने के बावजूद आखिर क्यों कश्मीरी पंडितों को मौत के मुंह में धकेला जा रहा है। घाटी में अब कश्मीरी पंडित सुरक्षित नहीं हैं। - सुमन लता, कश्मीरी पंडित कर्मचारी

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