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Target Killing: सोने से पहले हुई बात, सुबह निकलना था घर, मिली मौत, सांसों के साथ टूटा पक्की छत का वादा

Wed, 19 Oct 2022 12:38 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू/कन्नौज

सार

शोपियां में टारगेट किलिंग में मारे गए कन्नौज के दोनों मजदूरों ने सोने से पहले पत्नी से बात की थी और सुबह घर निकलने की सूचना दी थी। वे दीपावली पर घर के लिए निकल पाते इससे पहले ही सोमवार रात 12:30 बजे आतंकियों ने उन पर ग्रेनेड से हमला कर दिया।
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विपाल करते परिजन - फोटो : अमर उजाला
कश्मीर के शोपियां में टारगेट किलिंग में मारे गए कन्नौज के दोनों मजदूरों ने सोने से पहले पत्नी से बात की थी और सुबह घर निकलने की सूचना दी थी। वे दीपावली पर घर के लिए निकल पाते इससे पहले ही सोमवार रात 12:30 बजे आतंकियों ने उन पर ग्रेनेड से हमला कर दिया। वारदात में दो की मौत और तीन के घायल होने की सूचना गांव पहुंची तो परिजनों की चीख पुकार से सुबह का सन्नाटा टूटा।

ठठिया थाना क्षेत्र के दन्नापुरवा निवासी रामसागर (50), मुनेश कुमार (38), मुनेश का भाई रामबाबू, भोला, मोनू, पिंटू और विनय शोपियां में एक बागान में सेबों की पैकेजिंग और लोडिंग करते थे। ठेकेदार से हिसाब-किताब कर सभी को मंगलवार सुबह करीब चार बजे घर के लिए निकलना था। रात 12 बजे सभी ने अपना सामान और कपड़े पैक किए। सोने से पहले रामसागर ने पत्नी मालती और मुनेश ने पुष्पा को घर निकलने की सूचना दी थी। 
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शोपियां: इसी जगह गैर कश्मीरी श्रमिकों की हत्या की गई - फोटो : अमर उजाला
करीब आधा घंटा बाद आतंकियों ने ग्रेनेड से हमला कर दिया। इससे रामसागर और मुनेश की मौके पर मौत हो गई। ग्रेनेड की चपेट में आकर मुनेश का भाई रामबाबू, भोला और मोनू घायल हो गए। सुबह करीब नौ बजे गांव में आतंकी हमले की सूचना पहुंची। इससे कोहराम मच गया। रागसागर की पत्नी मालती देवी और मुनेश की पत्नी पुष्पा देवी बेसुध हो गईं। उधर, कश्मीर में फंसे घायलों और अन्य लोगों की जानकारी के लिए परिजन फोन करने में जुट गए। आतंकी वारदात की सूचना से पूरे गांव में सन्नाटा छा गया। गांव की गलियों में चीखें गूंज उठीं। एसडीएम उमाकांत तिवारी और सीओ शिव प्रताप सिंह ने मौके पर पहुंच परिजनों को सांत्वना दी। 
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शोपियां: जांच के लिए पहुंचे एडीजीपी कश्मीर विजय कुमार - फोटो : बासित जरगर
बागानों से एक माह में होने वाली कमाई खींच लाई मौत

जिस शोपियां में गोलियों की तड़तड़ाहट से ही अक्सर नींद टूटती हो, वहां कोई भी रहना पसंद नहीं करता। मगर वहां के बागानों से एक माह में होने वाली कमाई मजदूरों को खींच ले जाती है। कन्नौज के दन्नापुरवा और आसपास के तीन चार गांवों के 50-60 परिवारों का खर्चा भी इन्हीं बागानों से चलता है। ये मजदूर यहां सिर्फ एक डेढ़ महीने के लिए ही जाते हैं और कमाई करके लौट आते हैं।

हर वर्ष की तरह इस बार भी 28 अगस्त को ठठिया थाना क्षेत्र के अति पिछड़े गांव दन्नापुरवा से रामसागर, मुनेश, रामबाबू, भोला, मोनू, पिंटू, विनय, क्षत्रपाल, नन्हें, अंकित, दीपक, शैलेंद्र, आलोक, किशोर, भोला, सुनील, राजन, जय सिंह समेत 30 लोग बागानों में मजदूरी करने गए थे। इसी तरह आसपास के गांवों से भी  लगभग इतने ही लोग शोपियां गए थे। इनमें से दन्नापुरवा के 23 ग्रामीण करवाचौथ वाले दिन लौट आए थे। हिसाब-किताब न होने से सात ग्रामीण वहीं पर रुके थे। अब इनमें से दो के शव आ रहे हैं। 

मथुरा के ठेकेदार सोमू की ओर से बाग में प्रति पेटी भरने और ट्रक में लादने का 10 रुपये मिलता था। ये श्रमिक 15 घंटे काम कर छह से सात सौ रुपये प्रतिदिन कमाते थे। घर लौटे श्रमिक सुनील और राजन ने बताया कि शोपियां में आतंकियों की गोलियों की गूंज अक्सर ही सुनाई देती थी। हर समय डर लगा रहता था। किसी तरह हिम्मत जुटाकर एक से डेढ़ माह में 30 से 35,000 रुपये कमाकर घर चले आते हैं। इस कमाई साल भर घर का खर्च चलाने में मदद करती है। बाकी दिनों में यहां मजदूरी कर लेते हैं तो स्थिति ठीक बनी रहती है।
 

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गमगीन परिजन - फोटो : अमर उजाला
तालाब के किनारे फूस की झोपड़ी बनाकर रहकर गुजारा करता है परिवार

गांव की ऊबड़-खाबड़ तंग गलियों से होकर तालाब किनारे फूस की झोपड़ी में बच्चों के साथ बिलखती पुष्पा को जिसने भी देखा, उसकी आंखें नम हो गईं। झोपड़ी में अलमारियों की जगह सूखी लौकियों के खोखों में रखा गृहस्थी का सामान और फटी चटाई हर किसी को द्रवित कर रही थी। सिसकियां लेते पुष्पा का कहना था कि पति मुनेश ने कश्मीर से लौटकर पक्की छत बनवाने का वादा किया था। अब पति वादा तोड़कर चले गए।

बिलखती हुई पुष्पा बेहोश हो गई तो पड़ोसियों ने थपकी देकर उसे उठाया। झोपड़ी के अंदर आठ साल की बेटी अनुष्का, छह वर्षीय प्रिया और तीन साल का बेटा रंजीत को गोद में लेकर शादी का एलबम देखकर फफक पड़ी। महज चंद कदमों की दूरी पर ऐसा ही गमगीन माहौल रामसागर के घर में था। दो कमरे के मकान में पत्नी मालती देवी बेसुध थीं। पास ही पिता को यादकर 16 वर्षीय प्रांशू, 13 वर्षीय हिमांशु और 22 वर्षीय बेटी संतोषी का रो-रोकर बुरा हाल था। एक साथ गांव में दो श्रमिकों की मौत से गलियों में सन्नाटा था।
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मृतक मुनेश का घर - फोटो : अमर उजाला
बच्चे कर रहे थे पापा का इंतजार

मंगलवार की सुबह जब पुष्पा की झोपड़ी पर सूरज की किरण पड़ी तो बच्चों को उठाते हुए उसने कहा था पापा कश्मीर से आज निकल पड़े और वह जल्द घर आ जाएंगे। बच्चे खुश हुए और पापा के आने की उम्मीद में आंखें खोलीं। थोड़ी ही देर बाद कश्मीर से जेठ रामबाबू का पत्नी सुमन के पास फोन आया। रामबाबू ने बताया कि आतंकी हमले में छोटे भाई मुनेश और रामसागर की मौत हो गई। वह खुद और पड़ोसी भोला व मोनू घायल हो गए। यह सुनते ही घर में कोहराम मच गया। पुष्पा ने बताया कि रात करीब 10 बजे पति मुनेश से मोबाइल पर बात हुई थी। पति ने कहा था सुबह चार बजे वह लोग ट्रक से घर के लिए निकलेंगे। पड़ोसी पिंटू और विनय ठेकेदार के पास हिसाब-किताब करने गए हैं।
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