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कारगिल विजय के 21 साल: भारत के इस ‘बहादुर’ का खौफ इतना था कि पाकिस्तान कहता था 'चुड़ैल'

Mon, 06 Jul 2020 09:34 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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मिग 21 - फोटो : Social Media
कारगिल के युद्ध को 21 साल हो चुके हैं। भारतीय सैनिकों ने कारगिल पर विजय हासिल कर वहां देश का झंडा लहराया था। साल 1999, कारगिल की ऊंची चोटियों पर घात लगाकर बैठे पाक सैनिकों को यह अंदेशा नहीं था कि उनके ऊपर आसमान से भी हमला हो सकता है। भारतीय वायुसेना के मिग 27 लड़ाकू विमानों ने आसमान से पाकिस्तानी सैनिकों पर आग बरसानी शुरू कर दी। वायुसेना के इस बहादुर ने पाक सेना के सप्लाई और पोस्ट पर इतनी सटीक और घातक बमबारी की जिससे उनके पांव उखड़ गए।
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मिग 21 - फोटो : Social Media
1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार और हवा से जमीन पर अचूक हमला करने में सक्षम इस रूसी लड़ाकू विमान को कारगिल युद्ध में पराक्रम दिखाने के लिए बहादुर नाम दिया गया। इसका खौफ पाकिस्तान के दिलो दिमाग में ऐसा छाया कि उसने 'चुड़ैल' नाम दे डाला।
 
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मिग 21 - फोटो : IAF
जब यह विमान जमीन की सतह के करीब उड़ान भरता था तब कोई भी रडार बड़ी मुश्किल से इसकी पहचान कर पाता था। इसकी आवाज दुश्मनों के दिलों में खौफ पैदा करती थी। हालांकि भारतीय वायुसेना में अपने 38 साल के सफर के दौरान इस लड़ाकू विमान ने कई उतार-चढ़ाव भी देखें हैं।

 

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मिग 21 - फोटो : IAF
मिग-27 के इस अंतिम और उन्नत बेड़े पर वायुसेना की लड़ाकू टुकड़ी को 2006 से ही गर्व रहा है। मिग-23 बीएन, मिग-23 एमएफ और प्योर मिग-27 जैसे लड़ाकू विमान पहले ही सेवा से बाहर हो चुके हैं।
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मिग 21 - फोटो : Social Media
इन विमानों ने शांति और युद्ध दोनों के दौरान राष्ट्र के लिए बहुत बड़ा योगदान दिया है। बेड़े ने कारगिल युद्ध के दौरान एक महत्वपूर्ण योगदान देते हुए दुश्मन के ठिकानों पर सटीकता के साथ रॉकेट और बम से हमले किए थे।
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MIG 27 - फोटो : PTI
हवा से जमीन पर सटीक निशाना लगाने में था माहिर
मिग अपने जमाने का सबसे बेहतरीन 27 लड़ाकू विमान था। यह हवा से जमीन पर निशाना लगाने में इतना माहिर था कि दुश्मन को भनक लगने से पहले यह उसे नेस्तनाबूत कर देता था। यह फाइटर जेट 1700 किलोमीटर प्रतिघंटे की उड़ान भरने में सक्षम था। इसके अलावा यह चार हजार किलोग्राम के वॉरहेड को ले जा सकता था।


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