जम्मू-कश्मीर में बुधवार सुबह बडगाम में सुरक्षाबलों ने लश्कर-ए-तैयबा के टॉप कमांडर नवीद जट को मार गिराया। इस मुठभेड़ में एक अन्य आतंकी भी मारा गया वहीं एक आतंकी भागने में सफल रहा। आतंकवादी नावेद जट पत्रकार सुजात बुखारी की हत्या सहित घाटी में कई बड़ी आतंकी वारदातों में शामिल रहा है। इस मुठभेड़ में सेना के भी तीन जवान घायल हुए हैं। फिलहाल फरार आतंकियों के खिलाफ सर्च ऑपरेशन जारी है।
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- फोटो : अमर उजाला
ऐसे फरार हुआ था आतंकी जट
इसी साल 7 फरवरी शहर को हाई सिक्योरिटी जोन में एसएमएचएस अस्पताल में आतंकियों ने पुलिस पार्टी पर हमला कर हार्ड कोर लश्कर आतंकी नवीद जट उर्फ अबु हंजुला को भगा लिया। नवीद पाकिस्तानी आतंकी था। उसके साथ छह आतंकियों को 6 फरवरी को सेंट्रल जेल से इलाज के लिए अस्पताल लाया गया था। वहां पहले से मौजूद दो आतंकियों ने पुलिस पार्टी पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं थी। इसमें दो पुलिस कर्मी हेड कांस्टेबल मुश्ताक अहमद और कांस्टेबल बाबर अहमद शहीद हो गए थे। घटना के बाद अस्पताल में अफरातफरी मच गई। तीनों आतंकी फिल्मी अंदाज में मोटरसाइकिल से फरार हो गए थे।
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2010 में लश्कर में हुआ था शामिल
नवीद 2010 में लश्कर में शामिल हुआ था और दो साल की ट्रेनिंग के लिए भारत भेजा गया था। उसने मुजफ्फराबाद कैंप में ट्रेनिंग ली थी। अक्टूबर-नवंबर 2012 में वह कुपवाड़ा के रास्ते सात अन्य विदेशी आतंकियों के साथ रियासत में दाखिल हुआ था। नावेद तथा 22 आतंकियों का ग्रुप छह महीने से अधिक समय तक बांदीपोरा के जंगलों में मई 2013 तक ठहरा था। नवीद तथा एक अन्य आतंकी आशिक लोन को पुलवामा व शोपियां के इलाके में भेजा गया था। इस दौरान उन्हें मोबाइल फोन, सिम कार्ड देने के साथ ही स्काईपे के इस्तेमाल की जानकारी दी गई थी। नावेद को पाकिस्तान से दिशा निर्देश मिलते थे और वह लगातार अबु सज्जाद व अबु हंजाला के संपर्क में रहता था।
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कई हमलों में शामिल रहा है आतंकी नवीद
नवीद घाटी में कई हमलों में शामिल रहा है। हैदरपोरा में सेना पर हमला, श्रीनगर के बाहरी इलाके में नेशनल हाईवे पर स्थित सिल्वर स्टार होटल में हमले के साथ ही दक्षिणी कश्मीर में पुलिस व सीआरपीएफ कैंप पर तीन हमले में शामिल रहा है। पुलिस के अनुसार वह कंपास, जीपीएस, वायरलेस सेट तथा मोबाइल फोन के मामले में काफी प्रशिक्षित है।
दूसरे जेल में शिफ्ट करना चाहती थी पुलिस
पुलिस नवीद तथा पांच अन्य कैदियों को श्रीनगर जेल से शिफ्ट करना चाहती थी। उसे घाटी के बाहर किसी अन्य हाई सिक्योरिटी जेल में शिफ्ट करने की योजना थी, लेकिन सेशन कोर्ट ने दिसंबर 2017 में इसकी अनुमति नहीं दी थी।