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युवाओं को आतंकवाद की राह पर जाने से रोकने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने शिक्षकों से की यह अपील

Sun, 04 Apr 2021 10:47 AM IST
करिश्मा चिब अमृतपाल सिंह बाली, जम्मू-कश्मीर
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आतंकी - फोटो : Demo Pic.
कश्मीर घाटी में पाकिस्तान के बहकावे में आकर आतंकवाद में शामिल होने वाले भटके हुए युवाओं को सही राह दिखाने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस अब शिक्षकों से उनकी काउंसिलिंग करने की अपील कर रही है। पुलिस के अनुसार समाज का यह तबका युवाओं को सही राह दिखाने में अहम भूमिका निभा सकता है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजीपी विजय कुमार ने कहा कि पकिस्तान लगातार कश्मीर के नौजवानों को सोशल मीडिया के जरिये भड़काने, कट्टरपंथ की ओर झुकाने और उन्हें आतंकवाद में शामिल होने की कोशिश करता आया है।



 


 
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आतंकी (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : ANI
आईजीपी ने सोनवर में कृष्णा ढाबा के मालिक का उदहारण देते हुए कहा कि उस हमले को अंजाम देने वाला 17 वर्ष का था, बागात में पुलिस कर्मियों पर हमले को अंजाम देने वाला आतंकी भी छोटा था और जो नौगाम में हमला हुआ वो भी नए लड़कों (आतंकियों) ने अंजाम दिया है।
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सांकेतिक तस्वीर
भटके हुए युवाओं को वापस मुख्यधारा में शामिल करने के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस और भारतीय सेना पिछले कुछ वर्षों से काफी प्रयास कर रही है। आईजीपी ने बताया कि वह लगातार ऐसे बच्चों के अभिभावकों के संपर्क में हैं और मीडिया के लोगों से भी अपील करते हैं कि वह भी इनके अभिभावकों के साथ संपर्क कर उन्हें अपने बच्चों की काउंसिलिंग करने को कहें ताकि वह इस राह को छोड़ वापस सामान्य जीवन व्यतीत कर सकें।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : amar ujala
इससे पहले पुलिस और सेना भटके हुए नौजवानों को सही राह पर लाने के लिए सिविल सोसाइटी के जिम्मेदार नागरिकों, धर्म गुरुओं और उनके अभिभावकों का सहारा लेती आई है। आईजीपी विजय कुमार ने हाल ही में कश्मीर यूनिवर्सिटी में एक कार्यक्रम के दौरान भी शिक्षकों से बच्चों के सोशल कंट्रोल का रोल निभाने के लिए उनसे अपील की थी। आईजीपी ने कहा कि सबसे पहले युवाओं को समझाने का घर पर रोल अभिभावकों का होता, उसके बाद स्कूल और कॉलेज में टीचरों का और सबसे आखिर में पुलिस का होता है।
 
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आईजीपी कश्मीर विजय कुमार - फोटो : अमर उजाला
उन्होंने कहा कि सोशल कंट्रोल में घर वाले, टीचर, आदि अपनी भूमिका निभा सकते हैं। आईजीपी ने कहा कि इस रास्ते पर जाकर या तो जेल मिलती या फिर इसका नतीजा मौत होती है। इस वर्ष अब तक 20 स्थानीय युवा आतंकवाद में शामिल हुए हैं जिनमें से आठ मारे जा चुके हैं। 3 को गिरफ्तार किया गया, जबकि बाकी के अभी भी सक्रिय हैं।
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