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तस्वीरों में देखें: कश्मीरी व्यापारियों का छलका दर्द, बोले- अब सता रही घर-परिवार चलाने की चिंता

Sun, 11 Aug 2019 12:25 AM IST
Pranjal Dixit एजेंसी, श्रीनगर
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : PTI
जम्मू-कश्मीर में सख्त पाबंदियां लागू होने के बावजूद शनिवार को श्रीनगर अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर के बाहर टैक्सी स्टैंड पर भीड़भाड़ नजर आ रही थी। क्योंकि दूसरे प्रदेशों और विदेशों में बसे कश्मीरी बकरीद मनाने के लिए घर लौट रहे हैं। इसके बावजूद पर्यटन व्यवसाय से जुड़े टैक्सी ऑपरेटर निराश हैं। उनका मानना है कि घाटी में हालात सामान्य होने और पर्यटकों की वापसी तक उनका व्यवसाय प्रभावित ही रहेगा। फिलहाल उन्हें अपना भविष्य धूमिल नजर आ रहा है।
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : PTI
मालूम हो कि राज्य में अनुच्छेद 370 के प्रावधान हटाए जाने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में विभाजित करने के केंद्र सरकार के फैसले से पहले दो अगस्त को जम्मू-कश्मीर में प्रशासन ने अमरनाथ यात्रा को रोक दिया था और तीर्थ यात्रियों और पर्यटकों को कश्मीर घाटी छोड़ने के लिए कहा था। इसके साथ ही घाटी में सख्त पाबंदियां लागू कर दी गई थीं। 
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : PTI
कश्मीरी अर्थव्यवस्था की रीढ़ कहलाने वाले पर्यटन उद्योग को तीन दशक पुराने उग्रवाद से हर बार जबरदस्त झटका लगा है। इसी वर्ष 14 फरवरी को पुलवामा में हुए आतंकी हमले के कारण पर्यटन का सीजन देर से शुरू हुआ। इस हमले में सीआरपीएफ के चालीस जवान शहीद हुए थे। बालाकोट में हवाई हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच दूरियां चरम पर पहुंच गईं। इसके बाद जम्मू-श्रीनगर हाईवे पर चुनिंदा दिनों के लिए आम यातायात पर लगाया गया प्रतिबंध और संसदीय चुनाव के कारण भी पर्यटन उद्योग प्रभावित हुआ।

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कुछ ऐसे हैं श्रीनगर के हालात - फोटो : अमर उजाला
धूमिल दिख रहा भविष्य
टैक्सी ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मो. अशरफ लोन कहते हैं, पर्यटन का मौसम समाप्त हो चुका है। पर्यटन व्यवसाय से जुड़े हम सभी लोग घबराए हुए हैं। भविष्य धूमिल दिखाई दे रहा है। हमें फिलहाल अगले वर्ष मार्च से पहले कोई उम्मीद नहीं दिखाई दे रही। जबकि इस बार उन्हें बेहतर व्यावसायिक सीजन की उम्मीद थी। लोन ने कहा कि टैक्सी स्टैंड का व्यवसाय पूरी तरह से पर्यटकों के आवागमन पर निर्भर है, क्योंकि अधिकांश स्थानीय लोग हवाई अड्डे से घरों तक आने और जाने के लिए  निजी वाहनों का इस्तेमाल करते हैं। चूंकि अभी चारों ओर सख्त पाबंदियां हैं, लैंड लाइन व मोबाइल फोन बंद हैं इसलिए स्थानीय लोग हमारी सेवाएं ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्टैंड पर मौजूद 200 टैक्सी ऑपरेटरों में से 85 फीसदी ने बैंकों से कर्ज ले रखा है। अब वह सभी मासिक किस्तों को लेकर चिंतित हैं। इन्हें 8000 से लेकर 20000 प्रतिमाह की किस्त चुकानी पड़ती है। उन्होंने कहा कि हम जानते हैं कि सोमवार को ईद के बाद स्थानीय निवासियों का आगमन भी बंद हो जाएगा। फिर हमें कोई काम नहीं मिलेगा।
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कुछ ऐसे हैं घाटी के हालात - फोटो : PTI
संचार माध्यम ठप होने से लोगों में निराशा
दूसरी ओर जो लोग शनिवार को हवाई अड्डे पर उतरे वह घर पहुंचने के लिए टैक्सी चालकों को अतिरिक्त भुगतान के लिए भी तैयार थे। मॉरीशस से यहां पहुंचे एक छात्र ने बताया कि उसने लंबे समय के बाद अपने परिवार के साथ बकरीद का त्योहार मनाने के लिए महीनों पहले अपनी यात्रा की योजना बनाई थी। संचार माध्यम बंद होने के बाद वह काफी हताश है। कम से कम लैंड लाइन तो चालू रहनी चाहिए। श्रीनगर के सिविल लाइंस इलाके का निवासी उक्त युवक जल्द से जल्द अपने घर पहुंचना चाहता था। 
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हाल-ए-कश्मीर - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन ने खोले 300 टेलीफोन बूथ
इस बीच स्थानीय प्रशासन ने त्योहारों के मद्देनजर शहर के कुछ हिस्सों में आम लोगों की सहूलियत के लिए कई उपाय किए हैं। वह फंसे हुए लोगों को निकालने के लिए विशेष बस सेवा चलाने की योजना बना रहे हैं। साथ ही विभिन्न स्थानों पर 300 टेलीफन बूथ बनाए हैं। जम्मू में फिजियोथैरेपी की पढ़ाई कर रही तीन छात्राएं यहां पहुंचने के बाद इस बात से खफा थीं कि वह श्रीनगर के अशांत इलाकों में स्थित अपने घरों में अब कैसे पहुंचें। इनमें से एक कौसर ने कहा कि हमारे परिवारों को हमारे आगमन के बारे में नहीं पता है, अन्यथा कोई हमें लेने आया होता।
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डल झील - फोटो : PTI
अर्थव्यवस्था पर एक और चोट
केवल टैक्सी ऑपरेटर ही नहीं बल्कि होटल व्यवसायियों, हाउस बोट मालिकों और टूर एंड ट्रैवेल्स एजेंटों ने भी व्यापार के नुकसान के बारे में आशंका जताई है। एक ट्रैवेल एजेंट तौशीफ मीर का कहना है कि मेरे कर्मचारियों का प्रति माह वेतन का खर्च एक लाख रुपये से अधिक है। जो भी स्थिति हो हमें उन्हें भुगतान करना होगा, क्योंकि यह मेरा नैतिक दायित्व है। ऐसे समय में हम उन्हें छोड़ भी नहीं सकते। घाटी में  अर्थव्यवस्था पहले से ही संघर्ष कर रही थी वर्तमान माहौल ने इस पर कील ठोंक दी। 

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पर्यटकों के जल्दी लौटन की उम्मीद नहीं
एक हाउस बोट मालिक बशीर अहमद ने कहा, पर्यटन का मौसम समाप्त हो गया है और फिलहाल पर्यटकों के जल्दी लौटने की संभावना नहीं है। हम यहां अमन के लिए प्रार्थना कर रहे हैं। अहमद ने कहा कि कई हाउस बोट मालिकों ने बैंकों से ऋण लिया है और मौजूदा स्थिति में मासिक किस्तों का भुगतान करना बहुत मुश्किल है। हमारे बच्चों की पढ़ाई और उनका भविष्य भी दांव पर लग गया है। 
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हजारों पर्यटकों ने घाटी आने का प्लॉन किया रद्द
दैनिक मजदूरी का विकल्प तलाशना होगा
घाटी आने वाले पर्यटकों के मुख्य आकर्षण ‘शिकारा’ चलाने वाले अहमद डार कहते हैं कि उन्हें अब दैनिक मजदूर की तरह विकल्प तलाशना होगा। 
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