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मासूम शिकायत: छह साल की माहिरा ने प्रधानमंत्री को बताया था पढ़ाई के बोझ का दर्द, जानिए अब क्या हुआ

Wed, 02 Jun 2021 11:40 AM IST
करिश्मा चिब न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
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इन दिनों कोरोना ने सबको घरों में कैद किया हुआ है। बच्चों पर खासी पाबंदियां भी घर वालों ने लगा रखी हैं। खेल और खुले माहौल से महरूम बच्चे लंबे समय से घरों में रहने को मजबूर हैं। उस पर स्कूली कामकाज का बोझ। बस इसी से रूठकर एक छह साल की बच्ची ने पीएम मोदी से एक भावुक अपील एक वीडियो के जरिए कर दी और कहा कि हम बच्चों पर काम का इतना बोझ आखिर क्यों है। अपने अंदाज में बच्ची ने कहा कि मैं छह साल की हूं और इन दिनों स्कूल की ऑनलाइन क्लास का बच्चों पर बहुत बोझ है। बच्ची ने कहा- जो छोटे बच्चे होते हैं उनको स्कूल वाले ज्यादा काम देते हैं, ऐसा क्यों। बच्ची ने बताया कि वह सुबह उठने के साथ ही स्कूल के कामकाज में लग जाती है। बच्ची का वीडियो वायरल हो गया। इसका जम्मू-कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने भी संज्ञान लिया और बच्ची की भावुक और व्यावहारिक अपील से वे भी द्रवित हो गए। सिन्हा ने एक ट्वीट कर कहा कि - स्कूली बच्चों पर होमवर्क का बोझ कम करने के लिए स्कूल शिक्षा विभाग को 48 घंटे के भीतर नीति बनाने का निर्देश दिया है। बचपन की मासूमियत भगवान का उपहार है। उनका जीवन जीवंत और खुशियों से भरा होना चाहिए। 
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ऑनलाइन माध्यम से चल रही स्कूली बच्चों की पढ़ाई को लेकर छोटी बच्ची के वायरल वीडियो के बाद सरकार ने नई गाइडलाइन जारी कर दी है। प्री प्राइमरी के बच्चाें की कक्षा दिनभर में 30 मिनट से ज्यादा नहीं होगी। पहली से आठवीं तक की कक्षाएं 30 से 45 मिनट के अधिकतम दो सत्रों में होंगी। इसी तरह से 9वीं से 12वीं तक की कक्षाओं के अधिकतम चार सत्र ही होंगे।
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हर सत्र की अवधि 30 से 45 मिनट के बीच होगी। वायरल वीडियो का उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने स्वत: संज्ञान लिया था। शिक्षा विभाग ने मंगलवार को गाइडलाइन जारी की, जिसे एलजी ने अपने ट्विटर हैंडल पर शेयर भी किया।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा जारी दिशा- निर्देश में वर्चुअल क्लास में छोटे बच्चों पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। वर्चुअल क्लास के दौरान आनंदमयी शिक्षा के साथ दैनिक जीवन के अनुभव के बारे में बताने पर जोर रहेगा।
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jammu kashmir - फोटो : बासित जरगर
बच्चों को कहानी लिखना और सुनाना, ड्राइंग, नए शब्दों को सीखना, तस्वीरें पहचानने, पढ़ने जैसे रोचक होमवर्क देने को कहा गया है। इसके साथ छोटे बच्चों और अभिभावकों के साथ ऑनलाइन बैठक कर उन्हें तनाव मुक्त जीवन शैली के प्रति जागरूक करने जैसे गतिविधियां आयोजित करने को कहा है।

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