एलओसी पर घुसपैठ रोकने के लिए इस्तेमाल हो रहे उपकरणों में मेड इन इंडिया की धमक बढ़ने लगी है। अत्याधुनिक तकनीक से तैयार स्वदेशी उपकरण दुशमन पर नजर रखने, समय से ताड़ने और त्वरित कार्रवाई में कारगर साबित हो रहे हैं।
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- फोटो : Amar Ujala
सेना के सामरिक महत्व के साजोसामान में भारत निर्मित उपकरणों का इस्तेमाल बढ़ने लगा है। खासकर डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन द्वारा तैयार किए गए उपकरण एलओसी की जटिल भौगोलिक परिस्थितियों के मुफीद बैठ रहे हैं।
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ऐसा ही एक उपकरण है पोर्टेबल जैमर, जिसे पीठ पर बांधकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर आसानी से ले जाया जा सकता है।
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विदेशी जैमर की तुलना में बेहद छोटा दिखने वाला यह जैमर अपने काम को बखूबी अंजाम देता है।
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पीठ पर बांधे जवान जैमर को चलाकर जहां से भी गुजरे, उसके 50 मीटर व्यास के दायरे में रिमोट सेंसर निष्क्रिय हो जाते हैं। न तो रिमोट कंट्रोल चल पाते हैं और ना ही मोबाइल सिगनल ही काम कर पाते हैं।
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एलओसी पर इसकी उपयोगिता और भी खास है। जम्मू-कश्मीर में एलओसी ऐसे इलाकों से होकर गुजरती है जहां पर्वतीय इलाका है और घने जंगल में आवाजाही चुनौतियों से भरी है।
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- फोटो : PTI
पारंपरिक जैमर वाहनों के माध्यम से ले जाने पड़ते हैं या फिर एक ही स्थान पर स्थापित कर चलाने पड़ते हैं। एलओसी से सटे इलाके में दिन और रात की पेट्रोलिंग से लेकर रोड ओपनिंग पार्टी की मूवमेंट को पोर्टेबल जैमर महफूज बना देता है।
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यहां तक कि जंगल में नालों और पगडंडियों पर सेना की गश्त को यह जैमर अदृश्य ढाल की सुविधा देता है।