जम्मू-कश्मीर के पलांवाला सेक्टर में पाकिस्तानी सेना की गोलाबारी में शहीद हुए नायक कृष्ण लाल का बुधवार को उनके पैतृक गांव घिगडयाल के श्मशान घाट पर सैन्य सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। शहीद का घर भारत-पाक सीमा से कुछ ही फीट की दूरी पर स्थित है। शहीद के अंतिम संस्कार में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इस दौरान वहां मौजूद लोगों की आंखों में पाकिस्तान के खिलाफ घृणा व गुस्सा स्पष्ट दिखाई दिया। लोग कृष्ण लाल अमर रहे के नारे लगा रहे थे।
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बुधवार दोपहर 12.20 बजे शहीद का शव गांव घिगडयाल पहुंचा। घर के बरामदे में बैठी शहीद की मां समीत्री देवी, पत्नी शशी देवी, बेटा समीर, छोटी बहन, रिश्तेदार तथा गांव के लोग सेना की गाड़ी को देख कर चीत्कार कर उठे। शहीद के पार्थिव शरीर को देख मां समीत्री तथा पत्नी शशि देवी बेसुध हो गई। दोनों कभी शव के साथ लिपट कर रो लेतीं तो कभी बेसुध हो जातीं। शहीद का बेटा समीर पिता के चेहरे की तरफ ही चुपचाप देख रहा था। उसकी आंखों से आंसू भी नहीं टपक रहे थे। यह दृश्य देख वहां मौजूद सभी लोगों की आंखें नम हो गईं।
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बहन से किया था रक्षा बंधन पर आने का वादा
शव को घर में डेढ़ घंटे रखा गया, उसके बाद अंतिम संस्कार के लिए निकल पड़े। शव जब घर से ले जाने के लिए सेना के जवान उठाने लगे तो शहीद की मां, पत्नी तथा बहन शव से लिपट गईं। जोर-जोर से कह रही थी, काका एक बार उठ, तुम मुझे कह कर गए थे कि मैं रक्षा बंधन पर घर आऊंगा। मुझसे तुम झूठ नहीं बोल सकते।
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मां ने माथा चूम कर बेटे को किया विदा
श्मशान घाट पर शहीद की मां ने बेटे के शरीर पर अपना हाथ फेर माथे को चूमा, पत्नी और बेटे ने शहीद कृष्ण लाल के पांव छूकर विदाई दी।
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आठ ग्रेनेडियर के जवानों ने दी सलामी
शहीद की अंतिम यात्रा घर से पूरे सैन्य सम्मान के साथ निकाली गई। शव के आगे सेना की असम रेजीमेंट का बैंड था, उसके पीछे सेना की आठ ग्रेनेडियर के जवान चल कर शहीद को सलामी दे रहे थे। शव के पीछे क्षेत्र के लोग शहीद कृष्ण लाल अमर रहे, भारतीय सेना जिंदाबाद के नारे लगा रहे थे।
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शहीद जवान को सेना के अफसरों ने दी सलामी
- फोटो : अमर उजाला
ये रहे मौजूद
शहीद का अंतिम संस्कार गांव घिगडयाल के श्मशान घाट पर किया गया। जहां 18 जैक राइफल से सेवानिवृत्त हुए जवान, तहसीलदार अशरफ परवेज, एसडीएम, नायब तहसीलदार बाल कृष्ण, आठ ग्रेनेडियर के टूआईसी अशोक तिवारी, सीओ विपिन कुमार सिंह, 52 ब्रिगेड के कमांडर रमेश सहित क्षेत्र के हजारों की संख्या में लोगों ने शहीद को श्रद्धांजलि दी।
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शहीद जवान की पत्नी व बेटा
- फोटो : अमर उजाला
सेना में भर्ती होकर लूंगा पिता की शहादत का बदला
शहीद के बेटे समीर ने पिता को मुखाग्नि देने के बाद बताया कि मैं भी सैन्य में भर्ती होकर पापा की शहादत का बदला लूंगा। 52 ब्रिगेड के कमांडर ने शहीद के परिवार को राष्ट्रीय ध्वज सौंपा।
शहीद जवान को सेना ने दी श्रद्धांजलि
- फोटो : अमर उजाला
अगली छुट्टी पर मकान बनाने को कहा था
श्मशान घाट पर कृष्ण लाल के एक दोस्त विजय कुमार ने बताया कि हम पांच दोस्त थे। हमने गांव के ही सरकारी स्कूल से पहली कक्षा से दसवीं तक की पढ़ाई की। कृष्ण लाल दसवीं कक्षा में पास हो गया और सेना में भर्ती हो गया। पिछले ही महीने कृष्ण लाल छुट्टी पर घर आया था, तो मुझ से बात कर रहा था कि इस छुट्टी पर मैंने अपने मकान के आंगन और दीवारों में टाइल लगाई है। अगली बार छुट्टी आऊंगा तो जो हमारी नाईवाला में जमीन है उस पर मकान बनाऊंगा। सीमावर्ती गांव से परिवार को ले जाऊंगा क्योंकि यहां गोलाबारी का डर रहता है। गांव के बुजुर्ग तथा अन्य लोगों से बात करने पर पता चला कि कृष्ण लाल एक होनहार और बहादुर लड़का था। सेना से गांव छुट्टी आने पर भी वह सभी के साथ घुल मिल कर रहता था।