शिमला की वादियों की तरह ही अब आप धरती का स्वर्ग कहे जाने वाले कश्मीर की वादियों के मनोरम दृश्य को भी ट्रेन से यात्रा के दौरान देख सकेंगे। कश्मीर में विस्टाडोम (पारदर्शी कोच) कोच चलाने की अनुमति मिल गई है। जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने रेलवे बोर्ड को सुरक्षा और सेफ्टी को लेकर हरी झंडी दे दी है।
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कश्मीर में पत्थरबाजों के डर से कोच तैयार होने के बावजूद पिछले दो साल से विस्टाडोम कोच वाली ट्रेन नहीं चल पा रही थी। पिछले साल इस ट्रेन का ट्रायल भी हुआ, लेकिन सुरक्षा कारणों से इसे ट्रैक पर नहीं उतारा गया।
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यह ट्रेन पिछले एक साल से बडगाम रेलवे स्टेशन पर खड़ी है। पत्थरबाजों के चलते मुसाफिरों को खतरा था। सूत्रों के अनुसार, सब कुछ ठीक रहा तो सर्दी में घाटी के सैलानी इस ट्रेन का आनंद उठा सकेंगे।
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कांच की बनी है छत
विस्टाडोम कोच की छत कांच की बनी है। इसकी खिड़कियां भी पूरी तरह से बड़ी व पारदर्शी हैं। लिहाजा ट्रेन से बाहर व आसमान की नजारा बेहतर दिखता है। कश्मीर घाटी में बनिहाल से बारामुला के बीच 137 किलोमीटर तक पारदर्शी कोच वाली ट्रेन को चलाने की योजना है।
किराया कुछ अधिक होगा
चेयर कार वाली इस ट्रेन में सैलानियों के खाने-पीने के लिए पैंट्री कार की भी सुविधा होगी। सर्दियों के दौरान कोच में हीटर भी चलाया जाएगा, ताकि ठंड से यात्रियों को परेशान न होना पड़े। विस्टाडोम कोच होने के कारण इसका किराया कुछ अधिक रखा जाएगा। हालांकि, अभी इसका खुलासा रेलवे ने नहीं किया है।