शुक्रवार को कुछ स्कूली बच्चे जम्मू-कश्मीर विधानसभा की कार्रवाई देखने के लिए पहुंचे थे। इन बच्चों ने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा कि सदन में कार्रवाई के नाम पर वह वैसा ही ड्रामा देखेंगे जैसा कि स्कूलों में होता है। सदन में पॉवर प्रोजेक्ट के मसले पर पक्ष-विपक्ष के विधायक स्कूली बच्चों की तरह लड़ने लगे। आगे की तस्वीरों में देखिए, इन बच्चों ने क्या-क्या देखा।
(सभी फोटो - निखिल मेहता)
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सदन में 'बच्चों' की तरह लड़े विधायक तो हंसने लगे बच्चे
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सलाल, डुल हस्ती और उड़ी पनबिजली परियोजनाओं को एनएचपीसी से वापस लाने के मुद्दे पर एकजुट विपक्ष ने शुक्रवार को विधान परिषद की कार्यवाही नहीं चलने दी। यह मुद्दा नेकां अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने उठाया था।
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प्रश्न काल शुरू होते ही नेकां-कांग्रेस सदस्यों ने सीटों पर खड़े होकरहंगामा शुरू कर दिया।
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केंद्र और राज्य सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए विपक्षी सदस्य चेयरमैन वेल के सामने धरने पर बैठ गए। इस वजह से प्रश्न काल की कार्यवाही चेयरमैन को दो बार स्थगित करनी पड़ी।
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इसके बाद भी हंगामा न थमते देख कार्यवाही को पूरे दिन के लिए स्थगित कर दिया गया।
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नेशनल कांफ्रेंस और कांग्रेस सदस्यों में सज्जाद किचलू, कैसर जमशेद लोन, रविंद्र शर्मा, अजय कुमार सडोत्रा, गुलाम नबी मोंगा, डा. बीए शाह वीरी, डा. शहनाज गनेई, जहांगीर मीर, नरेश गुप्ता, जुगल किशोर, धर्मवीर सिंह, शाम लाल भगत, रानी बिलोरिया ने सीटों पर खड़े होकर कहा कि पीडीपी भाजपा गठबंधन सरकार ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम के अलावा राज्यपाल अभिभाषण में भी एनएचपीसी से पनबिजली परियोजनाओं को वापस लाने की बात कहीं। केंद्र सरकार अब इससे इंकार कर रही है।
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सदन में मौजूद उपमुख्यमंत्री डा. निर्मल सिंह दो बार अपनी सीट से विपक्ष के सवालों का जवाब देने के लिए उठे लेकिन विपक्षी सदस्यों के हंगामे की वजह से अपनी बात नहीं रख पाए। इससे पूर्व विपक्षी सदस्यों के हंगामे के दौरान सत्तापक्ष की तरफ से उपभोक्ता और जन वितरण मंत्री जुल्फिकार अली, भाजपा एमएलसी विबोध गुप्ता, पीडीपी सदस्य सुरेंद्र चौधरी और फिरदौस टाक ने कहा कि नेकां कांग्रेस की छह साल तक सरकार रही। उसने इस मुद्दे पर क्या किया।
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सत्तापक्ष और विपक्षी सदस्यों में कई बार तीखी नोकझोंक भी हुई। विधानसभा में हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही देखने आए बच्चों को निराशा हाथ लगी।
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विधानसभा की कार्यवाही देखने मुबारक मंडी के गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल और परेड के रणवीर सिंह स्कूल के छात्र-छात्राएं सदन में दर्शक गैलरी में आए थे। बच्चों को सदन की कार्यवाही से संसदीय व्यवस्था के बारे में जानकारी मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सदन की कार्यवाही शुरू होते ही बिजली प्रोजेक्टों की वापसी के मुद्दे पर विपक्ष का हंगामा शुरू हो गया। इस कारण बच्चे निराश हुए।
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बच्चों ने कहा कि सदन के सदस्य उनके स्कूल आकर देखें कि वहां कितना अनुशासन रहता है। इस तरह हंगामे की उम्मीद विधायकों से नहीं थी।
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बच्चों ने कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला को अपने विधायकों को अनुशासन में रखना चाहिए था, लेकिन इसकी कोई कोशिश नहीं हुई। उप मुख्यमंत्री ने बच्चों को समझाया कि लोकतंत्र में विपक्ष अपनी बात रखता है। विपक्ष को सदन चलाने में सकारात्मक सहयोग करना चाहिए। विपक्ष की भूमिका अहम है। उन्होंने बच्चों से अनुरोध किया कि वह हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही के बारे में कोई गलत धारणा नहीं बनाएं।
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ग्यारहवीं का छात्रा आशी डोगरा और आरजू रशीद ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि उन्हें बड़ों से ऐसे आचरण की उम्मीद नहीं थी। छात्र मोहम्मद अदीब भट ने कहा कि विपक्ष की सोच पाजिटिव होनी चाहिए।