पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले में शहीद मुलखराज का शव पहुंचते ही जख गांव में शोक की लहर दौड़ गई।
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'पापा की तरह मैं भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करूंगा'
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मुलखराज डिफेंस सिक्योरिटी कोर (डीएससी) में तैनात थे। बड़ी संख्या में लोग उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे। सैन्य सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया गया।
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मुलखराज पहले 17 डोगरा रेजिमेंट से सेवानिवृत्ति के बाद डीएससी में भर्ती हो गए थे। परिवार ने बताया कि नए साल का जश्न घर में धूमधाम से मनाया गया। किसी ने सोचा भी नहीं था कि यह दिन देखना पड़ेगा।
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उनकी शहादत की खबर ने एक झटके में पूरे गांव को मर्माहत कर दिया। तिरंगे में लिपटा मुलखराज का शव जब घर पहुंचा, तो सभी की आंखें नम हो गईं। परिवार की महिलाएं दहाड़ मार कर रोने लगीं।
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उनकी पत्नी गायत्री देवी बेहोश हो गईं। वृद्ध मां भी भरी आंखों से बेटे के शव को एकटक देखती रहीं। शहीद को बेटे आशीष ने मुखाग्नि दी। उसका भी रो-रोकर बुरा हाल था। आशीष ने कहा कि वह भी सेना में भर्ती होकर देश की सेवा करेगा।
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मुलखराज के भाई दर्शन कुमार ने कहा कि उन्हें भाई की शहादत पर गर्व है, जिसने देश के लिए अपने प्राणों की बाजी लगा दी। अंतिम विदाई देने पहुंचे शहीद के सैनिक दोस्तों ने कहा कि देश सेवा के लिए मुलखराज हमेशा आगे रहते थे।
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दूसरों की मदद करने में भी कभी पीछे नहीं हटे। अंतिम विदाई देने वालों में क्षेत्र के विधायक एवं मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा सहित जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौजूद रहे।