भारत और पाकिस्तान के बीच होने वाली हर बातचीत में पाकिस्तान सियाचिन का मामला जरूर उठाता है। दरअसल, यह क्षेत्र सामरिक दृष्टि से खासा महत्वपूर्ण हैं।
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सियाचिन की चौकियों पर रोज 10 करोड़ खर्च करती है सेना
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सियाचिन को दुनिया का सबसे ऊंचाई पर बना युद्धक्षेत्र माना जाता है। भारत और पाकिस्तान दोनों इस पर अपना अधिकार जताते हैं। सियाचिन विवादित कश्मीर सीमा से सटा है।
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सूत्रों का कहना है कि सियाचिन में भारत के १० हजार सैनिक तैनात हैं और इनके रखरखाव पर भारत प्रतिदिन 10 करोड़ रुपये का खर्च आता है।(फोटो-सोशल मीडिया)
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सियाचिन में सैनिक का सबसे बड़ा दुश्मन दरअसल वहां के मौसम को माना जाता है। Pic: BBC
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आज भी सियाचिन में हजारों सैनिक तैनात हैं। Pic: BBC
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सैनिकों के लिए सामग्री यहां के फॉरवर्ड बेस पर हेलीकॉप्टर के जरिए पहुंचाई जाती है। भारत मानता है कि ये ग्लेशियर रणनीतिक और कूटनीतिक रूप से काफी अहम है। Pic: BBC
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सियाचिन में लड़ाई की तुलना में मौसम की मार के कारण ज्यादा सैनिकों की मौत हुई है। Pic: BBC
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सैन्य गतिविधियां सियाचिन के पर्यावरण को खासा प्रभावित कर रही हैं। इसका जिक्र शेर ए कश्मीर युनिवर्सिटी ऑफ एग्रकल्चर के आर डी गुप्ता ने अपनी किताब ग्लोबल वॉर्मिंग एंड मेल्टिंग ऑफ हिमालयन ग्लेशियर में किया है। किताब में सैन्य गतिविधियों और उनके द्वारा उत्सर्जित कैमिकल्स को ग्लेशियर को नुकसान पहुंचाने का जिम्मेदार ठहराया गया है।
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इस ग्लेशियर के काफी करीब चीन की सीमा और भारतीय क्षेत्र को विभाजित करता है एक जल-संभर। 21000 फिट की ऊंचाई पर विश्व का सबसे ऊंची युद्धभूमि सियाचीन अपने आप में कठिन परिस्थितियों वाले रणक्षेत्र का अद्भुत उदाहरण है।
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यहां पर भारतीय सेना ने विश्व में सबसे ऊंचा हैलीपैड 21000 फीट की ऊंचाई पर पाइंट सोनम पर बनाया है। भारतीय सेना ने यहां विश्व का सबसे ऊंचा टेलिफोन बूथ भी बनाया है।
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सियाचिन शब्द का अर्थ है जंगली गुलाबों का क्षेत्र। यह ग्लैशियर सिंधु नदी के पानी का प्रमुख स्त्रोत है। गर्मियों में यहां की पिघली हुई बर्फ सिंधु नदी का प्रवाह बन जाती है।
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1984 में 20000 फीट की ऊंचाई पर बर्फिले पहाड़ों के लिए भारत और पाकिस्तान के विवाद रहा बीच। ऑपरेशन मेघदूत के नाम से भारत पाक के बीच सियाचिन ग्लेशियर को लेकर विवाद रहा। इसके बाद दोनों देशों ने सबसे खर्चीले सैन्य बेस से अपनी सेना हटाने का निर्णय लिया। लेकिन बाद में कारगिल युद्ध के समय पाकिस्तान द्वारा घुसपैठ ने एक बार फिर सियाचिन की चौकसी बढ़ा दी गई।
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2000 लोग सियाचिन की दुर्गम परिस्थितियों में मौसमी मार के चलते अपनी जान गंवा चुके हैं। इन में से ज्यादातर लोग फ्रॉस्ट बाइट, बर्फीले तुफान में मारे गए थे। 2003 में लगे शांति विराम के पहले भारतीय सैनिक यहां पर दुश्मन की गोली का शिकार भी हुए।
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प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 2005 में यहां आने वाले पहले प्रधानमंत्री बनें, वहीं अब्दुल कलाम यहां आने वाले पहले राष्ट्रपति बनें।
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कारगिल युद्द के समय पाकिस्तान ने शर्त रखी थी कि यदि भारत सियाचिन से सेना हटा ले तो पाक कारिगल से दूर हट जाएगा। इसी साल सेना की महिला ब्रिगेड ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर सियाचीन ग्लेशियर तक ट्रैकिंग की थी। वर्तमान में सियाचीन में महिला सैनिकों की तैनाती नहीं की गई है।
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सियाचिन ग्लेशियर 76 किमी लंबी बर्फ की नदी है जो इंद्रा नामक पहाड़ी चोटी से शुरू होती है। इसकी ऊंचाई 23 हजार फीट है। (फोटो-सोशल मीडिया)
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भारतीय सीमा की सुरक्षा के लिए तैनात भारतीय स्नेपर।
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सियाचिन दौरे के बाद से यह क्षेत्र एक बार फिर से चर्चा में आ गया है। (फोटो-सोशल मीडिया)
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सियाचिन क्षेत्र पर भारत का कब्जा है। यही कारण है कि पाकिस्तान हमेशा ही सियाचिन के विसैन्यीकरण की बात करता है। (फोटो-सोशल मीडिया)
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इसी ग्लेशियर से नुब्रा नदी निकलती है जो नुब्राघाटी की जान है। इस घाटी में हजारों लद्दाखी रहते हैं। यहां की ऊंचाई दस हजार फीट है। (फोटो-सोशल मीडिया)
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यह विश्व का सबसे ऊंचा युद्ध क्षेत्र है। इस पर सेनाएं तैनात रखना दोनों ही देशों के लिए महंगा सौदा साबित हो रहा है। (फोटो-सोशल मीडिया)
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सियाचिन हिमनद काराकोरम रेंज के पांच बडे हिमनदों में सबसे बड़ा और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा हिमनद है। (फोटो-सोशल मीडिया)
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इस क्षेत्र के प्रति भारत की उपेक्षा का लाभ उठा कर पाकिस्तान ने बड़ी संख्या में देशी-विदेशी पर्वतारोहियों को काराकोरम और सियाचिन में भेजना शुरू कर दिया। (फोटो-सोशल मीडिया)
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2012 में अप्रैल के पहले सप्ताह में विवादित कश्मीर के सियाचिन में आए बर्फीले तूफान में सौ से अधिक पाकिस्तानी सैनिक दब गए थे।
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1988 से 2008 के बीच सियाचिन ग्लेशियर पिघलकर 800 मीटर सिकुड़ गया है और इस बात पर यूएनडीपी के बंसीलाल कौल ने अपनी किताब बॉयोडाइवरसिटी कंजरवेशन इन हिमालय में खासी चिंता जताई है।
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सियाचिन मुद्दे पर पहली बार 1986 में भारत-पाक वार्ता होने के बाद दोनों देशों के बीच अब तक वार्ताओं के 12 विफल दौर हो चुके हैं। (फोटो-सोशल मीडिया)
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इससे चिंतित होकर भारत ने 1985 में ऑपरेशन मेघदूत के ज़रिए एनजे-9842 के उत्तरी हिस्से पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। (फोटो-सोशल मीडिया)
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इस क्षेत्र में संसार की कुछ सबसे ऊंची चोटियां स्थित हैं। जिनमें के-2, ब्रोड, घोगोलिसा, मशेरब्रम, गशेरब्रम, बालटोरो, शेरपी और सासेर मुख्य हैं। (फोटो-सोशल मीडिया)