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पाकिस्तान की चादर के बदले हिंदुस्तानी शक्कर

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चमलियाल। भारत-पाक सीमा पर स्थित बाबा चमलियाल की मजार पर वीरवार को हजारों लोगों ने माथा टेक दुआएं मांगी। रामगढ़ क्षेत्र के सीमांत गांव दग में बाबा दलीप सिंह मन्हास उर्फ बाबा चमलियाल की दरगाह पर दोनों देशों के  अमन के लिए प्रार्थना की गई। परंपराओं के अनुसार बाबा दलीप सिंह की मजार पर चढ़ने के लिए पाकिस्तान से सुनहरी चादर पहुंची और इस ओर से शक्कर और शरबत सीमा पार भेजा गया। दिनभर श्रद्धालुओं का यहां तांता लगा रहा। पाकिस्तान के श्रद्धालुओं की ओर से आई अमन की चादर को स्थानीय प्रशासन और बीएसएफ अधिकारियों ने बाबा की मजार पर चढ़ाया। (फोटो - निखिल मेहता, खबर - भूपेंद्र सिंह भाटिया)
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पाकिस्तान की चादर के बदले हिंदुस्तानी शक्कर

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बाबा की मजार में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे और उन्हें माथा टेकने के लिए लंबी कतार में घंटों इंतजार करना पड़ा। सुबह लगभग दस बजे पाकिस्तान के रेंजर जीरो लाइन पहुंचे और तैयारियों का जायजा लिया। इसके बाद साढ़े दस बजे ब्रिगेडियर वसीफ जफर भट्टी के नेतृत्व में पाकिस्तानी पहुंचे। उनका स्वागत डीआईजी बीएसएफ बीएस कसाना ने किया। उसके बाद वहां के नागरिक चादर लेकर पहुंचे। जीरो लाइन पर आयोजित दोनों ओर की बैठक में बीएसएफ डीआईजी बीएस कसाना, डीआईजी पुलिस अशकूर वानी, डीसी सांबा शीतल नंदा, एसएसपी जोगिंदर सिंह, एडीडीसी विवेक शर्मा, एडीसी पवन शर्मा, एसडीएम विजयपुर, तहसीलदार रामगढ़ उपस्थित थे।

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पाकिस्तान की ओर से ब्रिगेडियर वसीम जफर भट्टी के अलावा सियालकोट के डीसी, एसएसपी सियालकोट, असिस्टेंट कमिश्नर, डीएसपी, तहसीलदार और अन्य अधिकारी पहुंचे। इस दौरान दोनों ओर से मिठाइयां और प्रतीक चिन्ह व तोहफे भेंट किए गए। गांव चमलियाल मेले की तरह सीमा पार सैदावाली में भी मेले का आयोजन किया गया, लेकिन उस पार की हलचल इस बार नहीं दिख पाई। चमलियाल में लगने वाले वार्षिक मेले का विधिवत उद्घाटन उद्योग व वाणिज्य मंत्री चंद्र प्रकाश गंगा ने किया। बाबा की मजार पर श्रद्धा सुमन भेंट करने के बाद मंत्री ने मेले में फोटो प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया। मेले में लोगों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से ट्रैफिक व्यवस्था, चिकित्सा सुविधा, पीने के पानी और सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए।

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परंपराओं के अनुसार पाकिस्तान जाने वाली शक्कर और शरबत की ट्रालियां एक दिन पहले ही जीरो लाइन पर पहुंच गई। सीमा पर तनाव और अन्य सुरक्षा मुद्दों को ध्यान में रखते हुए ऐसा किया गया। एक सुरक्षा अधिकारी का कहना था कि सुरक्षा की दृष्टि से ट्रालियां की गहन जांच करने के बाद उन्हें जीरो लाइन पर पहुंचा दिया गया। ताकि किसी तरह का विवाद खड़ा न हो। जीरो लाइन पर दोनों ओर के सुरक्षा अफसरों की औपचारिकता पूरी होने के बाद पाकिस्तानी चालक ट्रेक्टर ट्राली अपने देश ले गए।

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जानकारों के मुताबिक की दो सौ वर्ष पूर्व दग गांव में बाबा दलीप सिंह मन्हास रहा करते थे। वह चंबल रोग का उपचार करते थे। सैदावाली (अब पाकिस्तान में) में किसी ने धोखे से उनका गला काट दिया। कहा जाता है कि उनका सिर वहीं गिर गया, जबकि उनका घोड़ा धड़ लेकर इस ओर गांव चमलियाल आ गया। वहां लोगों ने उनकी याद में मजार बना दी। उनकी मौत के बाद जब लोग चंबल रोग का शिकार होने लगे तो एक दिन बाबा ने अपने शिष्य को सपने में बताया कि उनके स्थान से मिट्टी और कुएं का पानी का लेप करने से चंबल का रोग ठीक हो जाएगा। यह विधि अपनाते ही उक्त चर्म रोग से पीड़ित लोगों को लाभ मिलने लगा। तब से लोगों की यहां आस्था बढ़ गई।

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मेले में बीएसएफ की ओर से लगाया गया स्टाल आकर्षण का केंद्र रहा। इस स्टाल में जहां बीएसएफ ने अपने जांबाज कुत्तों का प्रदर्शन कर लोगों का मन मोह लिया। वहीं स्टाल में लगी हथियारों की प्रदर्शनी के प्रति भी लोगों ने काफी रुचि दिखाई। इसके अलावा मेले में लगे खानपान के स्टाल पर भी लोगों का हुजूम उमड़ पड़ा। खासकर बच्चों के बीच झूले व अन्य मनोरंजन के साधन आकर्षण का केंद्र रहे।

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